Holashtak में क्या करें और क्या बिल्कुल न करें? यहां है सारी जानकारी

Holashtak: होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहा है और 03 मार्च तक रहेगा। यह आठ दिनों की अशुभ अवधि मानी जाती है जब मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे कार्य वर्जित हैं।

Holashtak
होलाष्टक 2026
locationभारत
userअसमीना
calendar23 Feb 2026 11:50 AM
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सनातन धर्म में होलाष्टक का अपना खास महत्व है। यह वह अवधि है जिसे अशुभ माना जाता है लेकिन इसके बावजूद धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इसे गंभीरता से देखा जाता है। होलाष्टक के आठ दिन उस समय को दर्शाते हैं जब असुर राज हिरण्यकश्यप अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को कष्ट पहुंचा रहे थे। इस अवधि में मांगलिक कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता इसलिए धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सावधानी बरतनी चाहिए।

होलाष्टक की तिथि और अवधि

इस साल होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से हो रही है। यह अवधि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर होलिका दहन के दिन 03 मार्च, 2026 तक चलेगी। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय बुरी शक्तियां और ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं जिससे शुभ कार्यों का परिणाम प्रभावित हो सकता है।

होलाष्टक में क्या करें?

होलाष्टक के आठ दिनों में विशेष रूप से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य हैं-

दान-दक्षिणा: जरूरतमंदों को दान दें और द्रव्य या वस्तुएं दान करें।

पूजा-पाठ: भगवान विष्णु और शिव जी की नियमित पूजा करें।

मंत्र जप और पाठ: ऋण मोचन स्त्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा और श्रीसूक्त का नियमित पाठ करें।

पितरों की पूजा: पितरों का तर्पण और स्मरण करें।

ग्रह शांति: यज्ञ या विशेष पूजा करवाकर ग्रहों की शांति का उपाय करें।

धार्मिक यात्रा: यदि संभव हो तो मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा करें।

इन कार्यों से मानसिक शांति मिलती है और इस अशुभ अवधि का आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होता है।

होलाष्टक में क्या न करें?

होलाष्टक के दिनों में कुछ कार्यों से पूरी तरह बचना चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके। इनमें प्रमुख हैं-

शादी-विवाह: इस अवधि में विवाह या अन्य मांगलिक संस्कार न करें।

भवन और संपत्ति खरीदना: भूमि, भवन या वाहन आदि की खरीदारी न करें।

नवविवाहित महिलाओं का ससुराल रहना: होलाष्टक में नवविवाहित महिलाएं ससुराल में न रहें।

संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान: सनातन धर्म में बताए गए 16 मुख्य संस्कारों में से किसी भी संस्कार को इस समय न करें।

इन प्रतिबंधों का पालन करने से अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है और होलाष्टक का समय सुरक्षित और शांति पूर्ण बीतता है।

होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्व

होलाष्टक केवल अशुभता का प्रतीक नहीं है। इसे ध्यान, पूजा और धर्म कर्म की ओर ध्यान केंद्रित करने का अवसर माना जाता है। इस समय की गंभीरता को समझकर धार्मिक कृत्य करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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रोजेदार खजूर से ही क्यों खोलते हैं रोजा? क्या आप जानते हैं इसकी हकीकत?

Ramadan Mubarak: रमजान के पाक महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं और इफ्तार में खजूर से रोजा खोलते हैं। खजूर खाने के पीछे पैगंबर मोहम्मद (PBUH) की सुन्नत और स्वास्थ्य संबंधी फायदे हैं। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और रोजेदारों को दिनभर की थकान से बचाता है।

Dates
खजूर से ही क्यों खोला जाता है रोजा?
locationभारत
userअसमीना
calendar20 Feb 2026 05:03 PM
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रमजान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पाक महीना है और मुस्लिम समुदाय के लिए यह समय इबादत, दान-पुण्य और आत्म-संयम का होता है। इस दौरान सुबह से लेकर शाम तक रोजेदार भूखे-प्यासे रहते हैं और रोजा रखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजा खोलते समय मुसलमान सबसे पहले खजूर क्यों खाते हैं? आइए जानते हैं इस परंपरा और इसके पीछे की वजह।

पैगंबर-ए-इस्लाम की सुन्नत

इस्लाम में खजूर से रोजा खोलना सुन्नत माना जाता है। सुन्नत वे कार्य हैं जिन्हें पैगंबर हज़रत मोहम्मद (PBUH) ने किया और लोगों को पालन करने की सलाह दी। कहा जाता है कि पैगंबर हमेशा खजूर खाकर रोजा खोलते थे। यही कारण है कि आज भी दुनिया भर के मुसलमान इस परंपरा का पालन करते हैं।

एक मुबारक फल है खजूर

खजूर को सिर्फ स्वादिष्ट नहीं बल्कि मुबारक (आशीर्वाद) फल भी माना जाता है। इसे खाने से बरकत आती है और यह इबादत का हिस्सा बन जाता है। यदि किसी कारणवश खजूर उपलब्ध न हो तो पानी पीकर भी रोजा खोलना सही माना जाता है।

शरीर को तुरंत एनर्जी देता है खजूर

रोजा रखने के दौरान शरीर का शुगर लेवल कम हो जाता है। खजूर में ग्लूकोज, सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसी नेचुरल शुगर होती है जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है। इसके अलावा खजूर में फाइबर भी होता है जो पाचन के लिए अच्छा है। इसीलिए खजूर इफ्तार में रोजेदारों को तुरंत थकान से राहत देता है। रमजान केवल भूख और प्यास सहने का महीना नहीं है। यह हमें दान-पुण्य, अनुशासन और दया सिखाता है। खजूर से रोजा खोलना इस बात का प्रतीक भी है कि इबादत के साथ शरीर और आत्मा दोनों को संतुलित रखा जाए।

रोजा खोलने की परंपरा

रोजेदार जब खजूर से रोजा खोलते हैं तो न केवल पैगंबर की सुन्नत का पालन होता है बल्कि यह शरीर को भी तुरंत ताकत देता है। यह परंपरा दिखाती है कि धर्म और स्वास्थ्य एक साथ संतुलित रह सकते हैं।

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Ramzan Mubarak
रोजा कौन नहीं रख सकता?
locationभारत
userअसमीना
calendar20 Feb 2026 04:01 PM
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रमजान का महत्व

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रोज़े में किसे छूट है?

रोज़ा हर उस व्यक्ति पर वाजिब है जो शारीरिक रूप से स्वस्थ और सक्षम है लेकिन कुछ लोगों को इस्लामी कानून के अनुसार रोज़ा रखने से छूट मिलती है।

बीमार और बुजुर्ग: जो लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं या बुजुर्ग हैं उन्हें रोज़ा रखने की जरूरत नहीं है।

बच्चे: छोटे बच्चे रोज़ा नहीं रखते।

लंबी यात्रा पर जाने वाले: यात्रा के दौरान रोज़ा रखने से छूट है लेकिन यात्रा के बाद इसे पूरा करना जरूरी है।

लंबी बीमारी: अगर किसी को लगातार बीमारी है तो उसे रोज़ा रखने से छूट मिलती है और वो आवश्यकता अनुसार रोज़ा की कजा कर सकता है। ध्यान रखें कि ऐसे लोगों के लिए पेट भरकर खाना मकरूह माना गया है यानी जरूरत से ज्यादा खाना नहीं खाना चाहिए।

रोज़े में क्या करें और क्या नहीं?

  • रोज़ा सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं है। इसे इबादत के रूप में देखा जाता है।
  • कुरान-ए-मजीद पढ़ें और मज़हबी किताबों का अध्ययन करें।
  • नेक बातें और नसीहत सुनें और दुआओं में मशगूल रहें।
  • रोज़ा रखने के दौरान सांस लेना भी इबादत का हिस्सा है।

रोज़ा रखते हुए ऑफिस जाएं तो क्या करें?

ऑफिस जाने से रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ता। रोज़ा और रोजगार दोनों इबादत के रूप में स्वीकार हैं। इसलिए ऑफिस में काम करते हुए भी रोज़ा जारी रखा जा सकता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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