DU Recruitment 2026: लंबे इंतजार के बाद 12 कॉलेजों में 600 असिस्टेंट प्रोफेसर की बंपर वैकेंसी!
दिल्ली यूनिवर्सिटी भर्ती 2026 में बड़ा अपडेट। DU के 12 कॉलेजों में 600 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर मार्च 2026 से भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। पूरी खबर पढ़ें।

दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ी बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया अब शुरू होने जा रही है। दिल्ली सरकार की मदद से चल रहे डीयू के 12 कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया मार्च 2026 से शुरू होगी। इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा, बल्कि वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे कॉलेजों को भी स्थायित्व मिलेगा।
DU के 12 कॉलेजों में क्यों खास है यह भर्ती
दिल्ली विश्वविद्यालय के ये 12 कॉलेज दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित हैं। बीते कई वर्षों से इन कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से ज्यादा पद खाली होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पा रही थीं। इसकी वजह विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार के बीच नियुक्तियों, खर्च और गवर्निंग बॉडी को लेकर चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध था। अब यह अड़चन दूर हो गई है और भर्ती को लेकर सभी स्तरों पर सहमति बन चुकी है।
मार्च 2026 से शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया
डीयू के डीन ऑफ कॉलेज प्रोफेसर बलराम पाणि के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली सरकार की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कुछ महीनों से इन कॉलेजों के रुके हुए फंड और शिक्षकों के वेतन संबंधी अनुदान भी जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में अब भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई बड़ी बाधा नहीं बची है।
पिछली सरकार के फैसले से क्यों अटकी थी भर्ती
दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित कॉलेजों के एक प्रिंसिपल के अनुसार पहले कॉलेज की गवर्निंग बॉडी की अनुमति से रिक्त पदों पर नियुक्तियां हो जाया करती थीं। लेकिन पिछली सरकार के दौरान व्यवस्था बदली गई और रिक्त पदों पर भर्ती के लिए सीधे सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई। इसी बदलाव के बाद से नियुक्तियों में देरी और गतिरोध की स्थिति बनती चली गई।
लंबे समय से तदर्थ और अतिथि शिक्षक संभाल रहे थे पढ़ाई
इन कॉलेजों में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर भी पड़ा। कई विभागों में वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जब दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों में पांच हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई थीं, तब भी इन 12 कॉलेजों में रिक्तियां नहीं भरी जा सकीं। अब स्थायी भर्ती शुरू होने से शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार और डीयू के बीच बनी सहमति
रिक्त पदों को भरने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बैठकें हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की पूरी संभावना है। इससे पहले जो प्रशासनिक अड़चनें थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है।
गवर्निंग बॉडी गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में
इन 12 कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के गठन को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है। डीयू के एक अधिकारी के मुताबिक यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। इन गवर्निंग बॉडी में दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार, दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। गवर्निंग बॉडी बनने के बाद प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों में और तेजी आने की उम्मीद है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों में 600 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर होने वाली यह भर्ती न केवल अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा मौका है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ी बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया अब शुरू होने जा रही है। दिल्ली सरकार की मदद से चल रहे डीयू के 12 कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया मार्च 2026 से शुरू होगी। इससे न केवल योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा, बल्कि वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षकों के सहारे चल रहे कॉलेजों को भी स्थायित्व मिलेगा।
DU के 12 कॉलेजों में क्यों खास है यह भर्ती
दिल्ली विश्वविद्यालय के ये 12 कॉलेज दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित हैं। बीते कई वर्षों से इन कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। असिस्टेंट प्रोफेसर के 600 से ज्यादा पद खाली होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पा रही थीं। इसकी वजह विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार के बीच नियुक्तियों, खर्च और गवर्निंग बॉडी को लेकर चला आ रहा प्रशासनिक गतिरोध था। अब यह अड़चन दूर हो गई है और भर्ती को लेकर सभी स्तरों पर सहमति बन चुकी है।
मार्च 2026 से शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया
डीयू के डीन ऑफ कॉलेज प्रोफेसर बलराम पाणि के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दिल्ली सरकार की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कुछ महीनों से इन कॉलेजों के रुके हुए फंड और शिक्षकों के वेतन संबंधी अनुदान भी जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में अब भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई बड़ी बाधा नहीं बची है।
पिछली सरकार के फैसले से क्यों अटकी थी भर्ती
दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित कॉलेजों के एक प्रिंसिपल के अनुसार पहले कॉलेज की गवर्निंग बॉडी की अनुमति से रिक्त पदों पर नियुक्तियां हो जाया करती थीं। लेकिन पिछली सरकार के दौरान व्यवस्था बदली गई और रिक्त पदों पर भर्ती के लिए सीधे सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई। इसी बदलाव के बाद से नियुक्तियों में देरी और गतिरोध की स्थिति बनती चली गई।
लंबे समय से तदर्थ और अतिथि शिक्षक संभाल रहे थे पढ़ाई
इन कॉलेजों में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर भी पड़ा। कई विभागों में वर्षों से तदर्थ और अतिथि शिक्षक ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जब दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों में पांच हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई थीं, तब भी इन 12 कॉलेजों में रिक्तियां नहीं भरी जा सकीं। अब स्थायी भर्ती शुरू होने से शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार और डीयू के बीच बनी सहमति
रिक्त पदों को भरने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच बैठकें हो चुकी हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की पूरी संभावना है। इससे पहले जो प्रशासनिक अड़चनें थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है।
गवर्निंग बॉडी गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में
इन 12 कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के गठन को लेकर भी प्रक्रिया चल रही है। डीयू के एक अधिकारी के मुताबिक यह प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। इन गवर्निंग बॉडी में दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार, दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। गवर्निंग बॉडी बनने के बाद प्रशासनिक फैसलों और नियुक्तियों में और तेजी आने की उम्मीद है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों में 600 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर होने वाली यह भर्ती न केवल अभ्यर्थियों के लिए सुनहरा मौका है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।












