प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. ललित मिश्रा ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुन मायवुड्स सोसायटी में रहते हैं। भगवान राम के प्रसिद्ध मंदिर पर फहराई गई धर्म ध्वजा हमेशा अमर रहेगी। इसी के साथ ही धर्म ध्वजा का डिजाइन बनाने वाले डॉ. ललित मिश्रा तथा उनके साथ ग्रेटर नोएडा का नाम हमेशा जुड़ा रहेगा।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा शहर को बहुत बड़ा सम्मान मिला है। ग्रेटर नोएडा शहर को मिलने वाला यह सम्मान इतना बड़ा है कि इसके कारण ग्रेटर नोएडा का नाम दुनिया भर में स्थापित होने के साथ ही हमेशा के लिए अमर हो गया है। ग्रेटर नोएडा को यह सम्मान ग्रेटर नोएडा शहर के नवनिर्मित क्षेत्र ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले एक इतिहासकार के कारण मिला है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले जिन इतिहासकार ने ग्रेटर नोएडा को ऐतिहासिक सम्मान दिलवाया है उनका नाम डॉ. ललित मिश्रा है।
आपको बता दें कि मंगलवार 25 नवंबर 2025 को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर विशाल धर्म ध्वजा फहराई गई है। राम मंदिर के ऊपर फहराई गई धर्म ध्वजा की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। हर कोई जानना चाहता है कि भगवान राम के मंदिर पर स्थापित की गई धर्म ध्वजा का डिजाइन किसने बनाया है? इस सवाल का उत्तर है कि भगवान राम के मंदिर पर फहराई गई धर्म ध्वजा का डिजाइन ग्रेटर नोएडा शहर के रहने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. ललित मिश्रा ने बनाया है। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. ललित मिश्रा ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुन मायवुड्स सोसायटी में रहते हैं। भगवान राम के प्रसिद्ध मंदिर पर फहराई गई धर्म ध्वजा हमेशा अमर रहेगी। इसी के साथ ही धर्म ध्वजा का डिजाइन बनाने वाले डॉ. ललित मिश्रा तथा उनके साथ ग्रेटर नोएडा का नाम हमेशा जुड़ा रहेगा।
ग्रेटर नोएडा के रहने वाले डॉ. ललित मिश्रा को भगवान राम के मंदिर का काम करने पर गर्व का अनुभव हो रहा है। श्री मिश्रा 25 नवंबर को धर्म ध्वजा फहराए जाने के समय अयोध्या के कार्यक्रम में मौजूद थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि -‘‘भगवान श्रीराम पूरी दुनिया के आराध्य हैं,। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर से मैं भी कभी किसी रूप में जुड़ पाऊंगा।’’ उन्होंने कहा कि भगवान राम का काम करके बहुत अधिक गर्व अनुभव कर रहा हूं।
ग्रेटर नोएडा के रहने वाले डॉ. ललित मिश्रा ने बताया कि मई 2023 में संयोगवश उन्हें ध्वज डिजाइन का अवसर मिला। करीब छह माह के शोध के बाद उन्होंने अयोध्या का ध्वज तैयार कर उसका डिजाइन संस्कृति मंत्रालय में जमा कराया। स्वीकृति मिलने पर ध्वज को गुजरात की कंपनी ने निर्मित किया। डिजाइन की शोध यात्रा पर उन्होंने बताया कि मेवाड़ रामायण, वाल्मीकि रामायण और अयोध्या कांड के आधार पर ध्वज की व्यावहारिक एवं ऐतिहासिक पहचान स्थापित हुई। डॉ. मिश्रा ने बताया कि रामायण के अनुसार कोविदार वृक्ष से ध्वज का संबंध है। यही वृक्ष ऋषि कश्यप द्वारा विकसित माना जाता है। शोध के दौरान इस वृक्ष की खोज में उन्हें बॉटेनिकल गार्डन से लेकर कई नर्सरी तक जाना पड़ा। अंतत: सेक्टर-132 में सडक़ किनारे उन्हें इसका पौधा मिला, जिसे अंग्रेजी में बाहुनिया परप्यूरिया कहा जाता है। Greater Noida News