ऐसी होली जिससे महिलाओं को रखा जाता है दूर, रहस्य जानकर पकड़ लेंगे माथा

Masan Holi: जानिए मसान होली कब और कैसे मनाई जाएगी, क्या है भस्म होली की अनोखी परंपरा, मणिकर्णिका घाट का महत्व और क्यों महिलाओं को इस आयोजन से दूर रखा जाता है। काशी की इस रहस्यमयी होली से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा, धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक महत्व यहां विस्तार से पढ़ें।

Masan Holi
मसान होली
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Feb 2026 02:34 PM
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भारत में होली का त्योहार रंगों, गुलाल और खुशियों का प्रतीक माना जाता है लेकिन अगर आप वाराणसी की मसान होली के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। यहां होली रंगों से नहीं बल्कि जलती चिताओं की राख यानी भस्म से खेली जाती है। काशी के मणिकर्णिका घाट पर मनाई जाने वाली यह परंपरा दुनिया की सबसे रहस्यमयी और अनोखी होली मानी जाती है। जहां एक ओर पूरा देश रंगों में डूबा होता है वहीं काशी में महादेव के भक्त चिता की राख उड़ाकर उत्सव मनाते हैं। साल 2026 में मसान होली 28 फरवरी को मनाई जाएगी। यह उत्सव जीवन और मृत्यु के गहरे दर्शन को दर्शाता है और काशी की आध्यात्मिक पहचान का अहम हिस्सा है।

क्या होती है मसान होली?

मसान होली को भस्म होली या भभूत होली भी कहा जाता है। मसान शब्द का अर्थ है श्मशान। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव श्मशान में वास करते हैं और अपने गणों के साथ वहीं होली खेलते हैं। इस दिन काशी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अघोरी साधु, नागा संत और शिव भक्त भूत-प्रेत का रूप धारण कर जलती चिताओं के बीच भस्म से होली खेलते हैं। यहां न पिचकारी होती है और न रंग-गुलाल बल्कि चारों ओर महादेव के जयकारों और दम्रू की गूंज सुनाई देती है।

कहां से शुरू हुई मसान होली?

इस परंपरा की शुरुआत को लेकर पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे और भक्तों के साथ गुलाल से होली खेली थी। लेकिन उनके प्रिय गण भूत, पिशाच और अघोरी उस उत्सव में शामिल नहीं हो सके। तब अगले दिन महादेव श्मशान घाट पहुंचे और अपने इन भक्तों के साथ चिता की भस्म से होली खेली। तभी से काशी में मसाने की होली की परंपरा शुरू हुई जो आज भी उसी श्रद्धा और रहस्य के साथ निभाई जाती है।

महिलाएं क्यों नहीं खेलती मसान होली?

मसान होली में महिलाओं के शामिल होने को लेकर भी खास मान्यताएं हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्मशान घाट को अत्यंत शक्तिशाली और रहस्यमयी स्थान माना जाता है जहां सूक्ष्म ऊर्जाएं सक्रिय रहती हैं। मान्यता है कि महिलाओं और बच्चों को इन ऊर्जाओं से दूर रखने के लिए उन्हें इस आयोजन में जाने से रोका जाता है। इसके अलावा श्मशान को वैराग्य और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है जो गृहस्थ जीवन से जुड़े लोगों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं समझा जाता। कुछ प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महिलाओं को भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील माना गया है इसलिए उन्हें श्मशान के वातावरण से दूर रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि वर्तमान समय में कई महिलाएं इस परंपरा को देखने के लिए घाटों के आसपास उपस्थित रहती हैं लेकिन मुख्य अनुष्ठान में उनकी भागीदारी सीमित रहती है।

जीवन और मृत्यु का सत्य

काशी की मसान होली केवल एक उत्सव नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के सत्य को स्वीकार करने का प्रतीक है। यह परंपरा बताती है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंत में सब कुछ भस्म में मिल जाना है। इसलिए काशी की यह होली आनंद, वैराग्य और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम मानी जाती है। यही कारण है कि इसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक वाराणसी पहुंचते हैं।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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हर परिस्थिति में खुश कैसे रहें? जानिए प्रेमानंद महाराज का जीवन सूत्र

यह लेख वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के उन अनमोल उपदेशों पर आधारित है जिनमें उन्होंने बताया है कि हर हाल में खुश कैसे रहा जा सकता है। आज की तनाव भरी जिंदगी में सच्ची खुशी कहां मिलती है, नाम जप की शक्ति क्या है, और भगवान से जुड़ाव किस तरह मन को स्थायी शांति देता है।

Premanand Maharaj
प्रेमानंद महाराज
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Feb 2026 12:22 PM
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आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर व्यक्ति सफलता, पैसा और सुविधाओं की दौड़ में लगा हुआ है। बाहर से सब कुछ ठीक दिखने के बावजूद अंदर से मन अशांत और तनावग्रस्त रहता है। हर कोई खुश रहना चाहता है लेकिन स्थायी खुशी आखिर मिलती कहां है? इसी सवाल का बेहद सरल और गहरा उत्तर वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने सत्संग में दिया है। उनका संदेश स्पष्ट है कि सच्ची खुशी बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर और भगवान से जुड़ाव में छिपी है।

अंदर से कैसे खुश रहें?

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, असली आनंद हमारी चित्तवृत्ति में बसता है। जब मन बार-बार भगवान के नाम, रूप, गुण और लीलाओं में लगने लगता है तब व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होता। दुनिया की परिस्थितियां बदलती रहती हैं लेकिन भगवान का स्मरण मन को स्थिर और प्रसन्न बनाता है। यही स्थायी खुशी का मूल आधार है।

जीवन को सरल और आसान कैसे बनाएं?

वे समझाते हैं कि सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं। पैसा, पद और प्रतिष्ठा कुछ समय के लिए खुशी दे सकते हैं लेकिन समय के साथ वही चीजें चिंता और भय का कारण बन जाती हैं। वास्तविक आनंद केवल भगवान के चरणों के चिंतन और भक्ति में मिलता है। जब व्यक्ति अपनी अपेक्षाओं को कम कर देता है और ईश्वर पर भरोसा बढ़ा देता है तब जीवन सरल और शांत हो जाता है।

मन को शुद्द कैसे करें?

नाम जप को प्रेमानंद महाराज ने सबसे सरल और प्रभावी उपाय बताया है। उनका कहना है कि चाहे मन लगे या न लगे, भाव आए या न आए निरंतर भगवान का नाम लेते रहें। नाम जप मन को धीरे-धीरे शुद्ध करता है और अंदर से शक्ति देता है। अगर व्यक्ति अपने रोजमर्रा के कार्यों के साथ नाम जप को जोड़ ले तो जीवन के अंत समय में भी उसे कोई पछतावा नहीं होगा।

दुख का कारण क्या है?

शरीर और उससे जुड़े रिश्तों के प्रति अत्यधिक मोह भी दुख का कारण है। महाराज जी कहते हैं कि जब तक हम शरीर को ही सब कुछ मानते रहेंगे तब तक भय और चिंता बनी रहेगी। सत्संग, विवेक और हरि भजन के माध्यम से इस मोह को कम किया जा सकता है। जैसे-जैसे मोह कम होता है वैसे-वैसे मन हल्का और प्रसन्न होता जाता है।

हर काम को समझें भगवान की सेवा

प्रेमानंद महाराज कर्मयोग पर भी विशेष जोर देते हैं। उनका संदेश है कि अपने हर काम को भगवान की सेवा समझकर करें। चाहे आप नौकरी में हों, व्यापार कर रहे हों या घर संभाल रहे हों अगर हर कर्म को सेवा भाव से किया जाए तो मन में संतोष बना रहता है। साथ ही छल, कपट और बेईमानी से दूर रहना जरूरी है क्योंकि अधर्म अंततः मन की शांति छीन लेता है।

मृत्यु की हकीकत

महाराज जी ने मृत्यु को भी जीवन का सत्य बताया है। उन्होंने कहा कि मृत्यु कभी भी आ सकती है इसलिए समय को व्यर्थ मनोरंजन में गंवाने के बजाय भजन और स्मरण में लगाना चाहिए। उनका यह वाक्य “मेरी अटैची फुल है” जीवन की तैयारी का प्रतीक है। इसका अर्थ है कि जिसने भजन और सत्कर्मों की पूंजी जोड़ ली वह निडर और प्रसन्न रह सकता है।

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चाणक्य नीति में बताई गई है तथाकथित दोस्त की पहचान

चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस प्रकार आप धोखेबाज लोगों को पहचानकर उनसे अपनी रक्षा करने में सफल हो सकते हैं। चाणक्य नीति में दी गई यह जानकारी हर किसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

चाणक्य नीति की चेतावनी
चाणक्य नीति की चेतावनी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 03:14 PM
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Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित चाणक्य नीति ज्ञान का बहुत बड़ा भंडार है। चाणक्य नीति में दोस्त तथा दुश्मन को पहचानने तथा धोखेबाज तथाकथित दोस्त से बचने के उपाय भी बजाए गए हैं। चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस प्रकार आप धोखेबाज लोगों को पहचानकर उनसे अपनी रक्षा करने में सफल हो सकते हैं। चाणक्य नीति में दी गई यह जानकारी हर किसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। चाणक्य नीति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें हर किसी के काम की जानकारी मौजूद है।

सोने की शुद्धता की तरह ही पहचान कर सकते हैं धोखेबाज की

चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह सोने की शुद्धता की पहचान उसे घिसकर, काटकर, गरम करके और पीटकर की जाती है, ठीक उसी तरह एक इंसान के चरित्र की पहचान उसके त्याग, आचरण, गुणों और कर्मों से होती है। Fake People हमेशा मीठा बोलते हैं क्योंकि उनका मकसद आपसे अपना काम निकलवाना होता है। चाणक्य नीति के अनुसार, एक धोखेबाज इंसान की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह आपकी गैर-मौजूदगी में आपकी बुराई करेगा लेकिन आपके सामने आपकी इतनी तारीफ करेगा कि आपको शक ही नहीं होगा। ऐसे लोग अक्सर आपकी कमजोरियों को जानने की कोशिश करते हैं ताकि सही समय पर वह उन पर वार कर सकें। आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति हद से ज्यादा मीठा बोलता है, वह सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। चाणक्य इसे ‘विषकुम्भं पयोमुखम्’ कहते हैं, यानी ऐसा घड़ा जिसके ऊपर तो दूध है लेकिन अंदर जहर भरा हुआ है। Cunning People कभी भी आपका सीधा विरोध नहीं करेंगे।

आपकी हर बात का समर्थन करता है धोखेबाज दोस्त

चाणक्य नीति में बताया गया है कि वे हमेशा आपकी हर बात का समर्थन करेंगे, चाहे आप गलत ही क्यों न हों। ऐसा इसलिए क्योंकि वे नहीं चाहते कि आप अपनी गलती सुधारें और सफल हों। Selfish Friends सिर्फ तभी तक आपके पास रहते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई फायदा मिल रहा होता है। अगर आपको किसी पर शक है, तो चाणक्य नीति कहती है कि उसे परखने के लिए उसे कोई छोटा सा लालच देकर देखें। अगर वह इंसान उस लालच में फंस जाता है और आपके हितों को नुकसान पहुंचाता है, तो समझ लीजिए कि वह धोखेबाज है। इसके अलावा, अपनी Personal Information और बिजनेस की गुप्त बातें कभी भी किसी को न बताएं। चाणक्य कहते हैं कि वह मित्र जो आपके गुप्त राज जानता है, वह दुश्मन से भी ज्यादा डरावना हो सकता है क्योंकि वह जानता है कि आपको चोट कहाँ पहुँचानी है।

चाणक्य नीति की जरूरी शिक्षा

  1. मीठी बातों से कभी भी किसी को अपना सगा न समझें।
  2. जो व्यक्ति आपके सामने दूसरों की चुगली करता है, वह निश्चित ही दूसरों के सामने आपकी भी चुगली करेगा।
  3. संकट के समय जो व्यक्ति साथ छोड़ दे, वह कभी आपका शुभचिंतक नहीं हो सकता।
  4. सच्चा दोस्त वही है जो कड़वा सच बोले और आपको सही रास्ता दिखाए।
  5. अपनी सफलता का मंत्र तब तक किसी को न बताएं जब तक काम पूरा न हो जाए। Chanakya Niti

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