Friday, 23 February 2024

हमारे पास पिछले शताब्दियों की गलतियां सुधारने का समय नहीं है, ऐसा क्‍यों कहा मोदी ने

प्रधानमंत्री ने दुबई में हो रहे जलवायु पर्यावरण शिखर सम्मेलन कॉप 28 में कार्बन उत्‍सर्जन में 45 फ़ीसदी कमी करने की आवश्यकता पर बल दिया

हमारे पास पिछले शताब्दियों की गलतियां सुधारने का समय नहीं है, ऐसा क्‍यों कहा मोदी ने

Cop 28 dubai : प्रधानमंत्री ने दुबई में हो रहे जलवायु पर्यावरण शिखर सम्मेलन कॉप 28 में कार्बन उत्‍सर्जन में 45 फ़ीसदी कमी करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा “सभी देशों को मिलकर धरती के उज्जवल भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा की तरफ संकल्प बंद्ध होकर कार्य करना होगा। और सभी विकासशील देशों को मिलकर अपने बजट में भी धरती के भविष्य और मानवता के हित के लिए अपना योगदान देना होगा।

की गई गलतियों को सुधारने के लिए अधिक समय नहीं

प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को दुबई में हो रहे कॉप 28 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में यह भी कहा कि आज हमारे पास पिछली शताब्दियों के द्वारा पर्यावरण का दोहन करके की गई गलतियों को सुधारने के लिए अधिक समय नहीं है क्योंकि धरती का उज्जवल भविष्य हमारी तरफ देख रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमें इन्नोवेटिव टेक्नोलॉजी का विकास करने की जरूरत है और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने की जरूरत है और भारत इस दिशा में संतुलन बनाए हुए है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिर्फ मेरा ही भला हो हमें इस सोच से ऊपर उठकर धरती और मानवता के बारे में सोचने की जरूरत है।

वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर पर बल

प्रधानमंत्री ने वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर को प्रमुख रूप से रखते हुए कार्बन उत्सर्जन कम करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि सभी देशों को कार्बन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा की चयन सशक्त करने की तरफ संकल्प बद्ध होकर मिलजुल कर कार्य करना होगा। प्रधानमंत्री ने संभावना जताई कि कॉप 28 शिखर सम्मेलन विश्व की सफलता की ऊंचाई पर पहुंचेगा यह हमें पूरी उम्मीद है क्योंकि सभी देश कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए प्रतिबद्ध होकर अपनी भागीदारी के लिए इस शिखर सम्मेलन में पहुंचे हैं।

Cop 28 dubai in hindi

गाजियाबाद के महापौर की दुबई में कॉप 28 में भागीदारी

गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल भी दुबई में कॉप 28 में आमंत्रित की गई हैं और उन्होंने भारत से रवाना होने से पूर्व संभावना जताई थी कि कॉप 28 विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन पर चिंता करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और नई-नई टेक्नोलॉजी जो स्वच्छ ऊर्जा और हरित क्रांति की तरफ धरती के लिए महत्वपूर्ण है उस तरफ मिलजुल कर जाना होगा। सुनीता दयाल ने यह भी कहा कि भारतवर्ष पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाने के प्रतिमहत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। और भारतीय संस्कृति में हवन पूजा यज्ञ से लेकर आधुनिक स्वच्छ ऊर्जा की तमाम गतिविधियां और हरित क्रांति ग्रीन बिल्डिंग इस दिशा की तरफ उठाए गए कदम हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में तमाम देश मिलकर इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करेंगे।

प्रस्तुति मीना कौशिक

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