Friday, 23 February 2024

गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन, त्रिपुर सुंदरी की होती है पूजा

Gupt Navratri 2024 : दस महाविद्याओं में तीसरा स्थान त्रिपुर सुंदरी महाविद्या का होता है। माता पार्वती के प्रथमकाली रूप…

गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन, त्रिपुर सुंदरी की होती है पूजा

Gupt Navratri 2024 : दस महाविद्याओं में तीसरा स्थान त्रिपुर सुंदरी महाविद्या का होता है। माता पार्वती के प्रथमकाली रूप दूसरे तारा रूप के पश्चात कामदेव की भस्म से उत्पन भाण्डासुरकेवध के लिए देवताओं की प्रार्थना पर जिनकी उत्पत्ति हुई और उन्होंने त्रिपुर सुंदरी के रूप में ही अवतरित होकर उसका वध किया‌। षोडशी त्रिपुर सुंदरी त्रैलोक्य में सबसे सुंदर अपूर्व अप्रतिम सुंदर त्रिपुरेश्वरी त्रिपुरेश शिव की अर्धांगिनी है। इनका शक्ति पीठ स्थान राधाकिशोर गांव त्रिपुरा में कूर्म पीठ है। दूसरा राजस्थान के बांसवाड़ा में भव्य परा शक्ति का प्राचीन मंदिर जिसकी गणना 52 शक्ति पीठ के रूप में है। कहते हैं यहां देवी के तीन रूप के दर्शन होते हैं प्रात:काल में एक कुमारी कन्या, दोपहर में षोडशी युवती और अंत में  संध्याकाल में प्रौढ़ावस्था के रूप मे दर्शन होते हैं ।

बहुत प्राचीन है त्रिपुरसुंदरी का मंदिर

त्रिपुरसुंदरी का यह मंदिर अति प्राचीन है। अरावली की पहाड़ियों के बीच अपनी निर्माण में शिल्प कला और भव्यता के लिये संपूर्ण देश भर में प्रसिद्ध है । अजस्र सलिला माही नदी के पावन तट पर अपनी गाथा गाता,मंदिर के पीछे एक खदान है जिसमें पहले लोहा निकलता था।

ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियों का स्त्रोत यह दस महा विद्यायें ही हैं जिनके दो कुल हैं:-

1.उग्र काली कुल

2.श्री कुल ।

उग्र काली कुल की अधिष्ठात्री काली देवी हैं इसमें :- महाकाली छिन्नमस्ता , धूमावती , बगलामुखी है।

श्रीकुल की अधिष्ठात्री त्रिपुर सुंदरी के साथ :- त्रिपुर सुंदरी , भुवनेश्वरी,मातंगी और कमला है।

सौम्य उग्र से जान जाता है तीसका कुल

इसके अतिरिक्त एक तीसरा कुल भी है जो सौम्य उग्र के नाम से जाना जाता है इसमे:- तारा,त्रिपु भैरवी हैं। यह कभी सौम्य और आवश्यकतानुसार रौद्र रूप धारण कर लेती है। तंप्रशास्त्र में इनका विशेष महत्व है। शक्ति के पुजारी शाक्त सम्प्रदाय में शक्ति की ही पूजा का विधान है। सोलह कलाओं से सम्पन्न षोडशु त्रिपुर सुंदरी का अपना अलग महत्व है सभी का कल्याण करने वालीश्री यंत्र की अधिष्ठात्री देवीशिव और विष्णु दोशनों को हीशक्ति प्रदान कर उन्हें शव से शिव बनाती हैं।  इनके देव स्वयं कामेश्वर हैं। असम में कामाख्या देवी का शक्ति पीठ सती की योनि पर स्थित है। कहते हैं यहां सती की योनि गिरी थी। इसलिए इसका नाम कामख्या देवी है। यह मानव की सभी मनोकामनायें पूर्ण करती हुई उसे भुक्ति से मुक्ति की ओर ले जाती हैं।  सभी को एशवर्ये प्रदान करने वाली इनका दूसरा नाम राज राजेश्वरी है ।

उषा सक्सेना

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