Holi Celebration: होली का त्योहार सिर्फ मथुरा और वृंदावन तक सीमित नहीं है। भारत के कई हिस्सों में होली का जश्न अलग अंदाज में मनाया जाता है। बरसाना की लठमार होली, वाराणसी के रंग-बिरंगे उत्सव, उदयपुर की शाही होली और प्रयागराज की धूमधड़ाके वाली होली देशभर में खास मानी जाती है।

होली का नाम आते ही जहन में सबसे पहले मथुरा और वृंदावन की रंग-बिरंगी होली की तस्वीर उभरती है। राधा-कृष्ण की नगरी में लठमार और फूलों वाली होली का जो अद्भुत संगम दिखता है वह वाकई अनोखा होता है। दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं और हर साल इसका हिस्सा बनना अपनी तरह की परंपरा बन चुका है लेकिन सिर्फ मथुरा और वृंदावन ही नहीं, भारत में कई और ऐसी जगहें हैं जहां की होली का अपना अलग ही रंग देखने को मिलता है। होली सिर्फ रंग लगाने का त्योहार नहीं है बल्कि यह दिलों की दूरियों को मिटाने, पुराने गिले-शिकवे भूलने और रिश्तों में मिठास घोलने का भी अवसर है। हर राज्य और शहर में इसका जश्न अलग अंदाज में मनाया जाता है कहीं ढोल-नगाड़ों की धुन में, कहीं पारंपरिक व्यंजनों और लोककथाओं के संग तो कहीं गुलाल की खुशबू और भांग के रंग में।
बरसाना की होली दुनियाभर में लठमार होली के नाम से मशहूर है। यहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाते हैं। यह परंपरा राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है। रंग और भक्ति का यह संगम बरसाना की होली को बिल्कुल अलग बनाता है। 25 फरवरी को मनाई जाने वाली यह होली वाकई एक बार देखने लायक अनुभव देती है।
काशी की होली में आध्यात्म और मस्ती का अनोखा मेल देखने को मिलता है। गंगा घाटों पर रंगों के संग संगीत, भांग और ठंडाई की धूम रहती है। शिवभक्तों की टोली, ढोल-नगाड़ों की गूंज और उड़ता गुलाल वाराणसी की होली को बेहद खास बनाते हैं। यहां होली सिर्फ खेल नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है।
पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में होली को बसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। छात्र-छात्राएं पीले वस्त्र पहनकर रवींद्रनाथ टैगोर की परंपरा में गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए वसंत और होली का स्वागत करते हैं। यह होली शोर से कम और कला-सौंदर्य से भरपूर होती है। अगर आप शांत और सुकून देने वाली होली का अनुभव चाहते हैं तो शांतिनिकेतन जरूर जाएं।
उदयपुर की होली शाही अंदाज के लिए जानी जाती है। मेवाड़ राजघराने की परंपराओं के साथ होलिका दहन और भव्य जुलूस निकाले जाते हैं। राजसी पोशाकें, सज्जित हाथी-घोड़े और लोकनृत्य उदयपुर की होली को एक शाही उत्सव बना देते हैं। शाही फील और भव्यता का अनुभव लेने के लिए उदयपुर की होली देखना जरूर चाहिए।
संगम नगरी प्रयागराज में होली का जश्न एकदम अलग अंदाज में होता है। यहां कपड़ा फाड़ होली काफी मशहूर है। मोहल्लों में सामूहिक रूप से खेली जाने वाली इस होली में पुरुष एक-दूसरे के कपड़े तक फाड़ते हैं। म्यूजिक, मेल-मिलाप और उत्सव के रंग इसे बेहद जीवंत और मनोरंजक बनाते हैं।