मकर संक्रांति पर क्या करें और क्या न करें? यह रही पूरी गाइड

Makar Sankranti Snan Muhurat: मकर संक्रांति 2026 का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करके उत्तरायण होते हैं। सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक का ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सबसे शुभ माना गया है।

Makar Sankranti
मकर संक्रांति ब्रह्म मुहूर्त स्नान
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 04:14 PM
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मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण का समय देवताओं का काल माना जाता है। इसलिए इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान और दान पापों का प्रायश्चित करता है और जीवन में सुख, समृद्धि और यश प्रदान करता है।

मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्राह्माश्रम महाराज के अनुसार, इस दिन सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक किसी भी समय पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर स्नान किया जा सकता है। विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम माना गया है। द्रिग पंचांग के अनुसार, 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से लेकर सुबह 6:21 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान करने से देवताओं का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

मकर संक्रांति पर सुबह-सुबह स्नान क्यों जरूरी है?

शास्त्रों में मकर संक्रांति पर समयानुसार स्नान को अलग-अलग प्रकार के रूप में बताया गया है:

4 बजे से 5 बजे तक – मुनि स्नान: इस समय स्नान करने से बल और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

5 बजे से 6 बजे तक – देव स्नान: इस दौरान स्नान करने से धन, वैभव और यश की प्राप्ति होती है।

6 बजे से 8 बजे तक – मानव स्नान: इस समय स्नान सौभाग्य और कार्यों में सफलता दिलाता है।

8 बजे के बाद – राक्षसी स्नान: इसे निषिद्ध माना गया है क्योंकि देर से स्नान करने पर दुख और दरिद्रता आती है।

यदि किसी कारणवश पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर जाना संभव न हो तो घर में ही पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान कर लें। स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना शुभ माना गया है।

मकर संक्रांति पर दान का महत्व

मकर संक्रांति पर स्नान के बाद दान करना बेहद शुभ होता है। इस दिन किए गए दान का पुण्य हमेशा बना रहता है। विशेष रूप से निम्नलिखित चीजों का दान करने की परंपरा है:

तिल और गुड़: शुद्धता और समृद्धि के लिए।

नवीन अन्न और खिचड़ी: गरीबों और जरूरतमंदों को खाने का दान।

कंबल और वस्त्र: सर्दियों में जरूरतमंदों की मदद।

घी: धार्मिक कार्यों और पूजा में उपयोग के लिए।

दान करने से ग्रहों की अशुभता कम होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

स्नान के बाद दान जरूरी!

मकर संक्रांति 2026 पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना और दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ है। यदि आप इस समय स्नान और दान करते हैं तो जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रवेश होता है। इस पावन पर्व पर अपने परिवार और समाज की भलाई के लिए दान करना न भूलें।

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Makar Sankranti: मकर संक्रांति 2026 पर खिचड़ी खाने की परंपरा और उसके चार यार दही, घी, पापड़ और अचार के महत्व को जानें और जानें कि क्यों इन चारों के बिना मकर संक्राति को अधूरी मानी जाती है।

Makar Sankranti Khichdi
मकर संक्राति खिचड़ी
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 03:07 PM
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हर साल मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति सूरज के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है और इस दिन दान-पुण्य और नई शुरुआत का महत्व होता है। हर साल की तरह 15 जनवरी 2026 को भी मकर संक्रांति बड़े उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस दिन का एक खास हिस्सा है खिचड़ी खाना। खिचड़ी सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है लेकिन खिचड़ी को असली मजा तभी आता है जब उसे उसके चार यारों घी, दही, पापड़ और अचार के साथ परोसा जाए। ये चार चीजें मिलकर खिचड़ी को साधारण से शानदार बना देती हैं। आइए जानते हैं इन चारों यारों के बारे में।

1. देसी घी-खिचड़ी का असली स्वाद

खिचड़ी का सबसे खास यार है शुद्ध देसी घी। गरम-गरम खिचड़ी के ऊपर घी डालते ही उसका स्वाद दोगुना हो जाता है। घी न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि सर्दियों में शरीर को अंदरूनी गर्माहट और ऊर्जा भी देता है। इसलिए खिचड़ी में घी डालना न भूलें यह इसे परफेक्ट बनाता है।

2. दही या रायता-स्वाद और पाचन का संतुलन

खिचड़ी की तासीर गर्म होती है और इसे ठंडी दही या रायते के साथ खाने से स्वाद में संतुलन आता है। खासकर काली दाल की खिचड़ी के साथ गाढ़ी दही बहुत अच्छी लगती है। दही पाचन में मदद करता है और थाली को पौष्टिक भी बनाता है। इसलिए खिचड़ी के साथ दही का होना जरूरी है।

3. पापड़-खिचड़ी का क्रंची साथी

गरमा-गरम खिचड़ी के साथ पापड़ खाने का मजा ही कुछ और है। यह खिचड़ी के स्वाद को और भी लाजवाब बना देता है। मकर संक्रांति पर उड़द दाल का पापड़ खास तौर पर पसंद किया जाता है लेकिन आप अपनी पसंद का कोई भी पापड़ खा सकते हैं।

4. अचार-खिचड़ी का मसालेदार ट्विस्ट

खिचड़ी का स्वाद थोड़ा सादा होता है इसलिए इसे अचार या हरी चटनी के साथ परोसना बेहतरीन विकल्प है। आम या मिर्च का अचार खिचड़ी के स्वाद को शानदार बना देता है। अगर घर में बच्चे या बड़े खिचड़ी खाने में उचकते हैं तो अचार उन्हें जरूर पसंद आएगा।


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Makar Sankranti
मकर संक्रांति
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Jan 2026 03:54 PM
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Makar Sankranti भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। हर साल इस पर्व की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम रहता है। खासकर जब संक्रांति और एकादशी जैसी तिथियां एक ही समय पर पड़ती हैं। साल 2026 में भी यही स्थिति बनी है। चलिए जानते हैं कि क्यों ज्योतिषाचार्य और विद्वान 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति मनाने की सलाह दे रहे हैं।

सूर्य का गोचर और पुण्यकाल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। साल 2026 में सूर्य 14 जनवरी की दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे लेकिन शास्त्रों का नियम है कि यदि संक्रांति दोपहर के बाद होती है तो उसका पूर्ण पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय से शुरू माना जाता है। यही कारण है कि 15 जनवरी को संक्रांति मनाना शास्त्र सम्मत और शुभ माना जा रहा है।

उदया तिथि का महत्व

हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है। यह वह तिथि होती है जो सूर्योदय के समय मौजूद हो। साल 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर में होने के कारण, 15 जनवरी की सुबह सूर्योदय पर संक्रांति की तिथि प्रभावी रहेगी। इसलिए अधिकांश लोग और धार्मिक विद्वान 15 जनवरी को ही पवित्र स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान का आयोजन करने की सलाह दे रहे हैं।

23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग

इस साल एक और खास बात यह है कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ऐसा संयोग लगभग 23 साल बाद आया है। एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। मकर संक्रांति पर पारंपरिक रूप से खिचड़ी बनाई जाती है। इसलिए जो लोग एकादशी का उपवास रखते हैं उनके लिए 14 जनवरी को संक्रांति मनाना कठिन होगा। इस वजह से विद्वानों का सुझाव है कि 14 जनवरी को तिल, गुड़ और फलाहार का सेवन करें और 15 जनवरी को खिचड़ी और दान करें।

आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी का संगम होता है। इसे सूर्य-तत्व और विष्णु-भक्ति का अद्भुत मिलन माना जाता है। इस दिन किया गया दान, पूजा और स्नान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से भी 15 जनवरी को संक्रांति मनाना श्रेष्ठ और शुभ माना गया है।

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