Special Rights : यह फैसला मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। केंद्र सरकार ने अफस्पा (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) की अवधि छह महीने तक बढ़ा दी है, जिससे सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार मिलेंगे। लगातार हो रही हिंसक वारदातों और जासूसी सूत्रों से मिल रही जानकारी को देखते हुए इन तीनों ही प्रदेशों में अफस्पा की अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
मणिपुर में स्थिति
मणिपुर में यह कानून 1980 से लागू है। वर्तमान में राज्य में जारी हिंसा के कारण इसे और बढ़ा दिया गया है। 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में अफस्पा लागू रहेगा। मणिपुर में पिछले 21 महीनों से जातीय संघर्ष चल रहा है, जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा के लगातार बढ़ते ही जाने के कारण मणिपुर में यह फैसला लिया गया है। मणिपुर में स्थिति पिछले काफी समय से बद से बदतर होती जा रही है। हिंसा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है।
नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में विस्तार
नगालैंड के आठ जिलों और पांच अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों में अफस्पा को छह महीने तक बढ़ा दिया गया। अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में भी इसे लागू रखा गया है। इंफाल पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि आॅपरेशन के दौरान कई हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए, जिनमें देसी राइफल, पिस्तौल, मोर्टार, ग्रेनेड, हेलमेट, वायरलेस सेट, एचई बम और गन पाउडर शामिल हैं।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन और इस्तीफा
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। विधानसभा को निलंबित कर दिया गया, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई। यह कानून अशांत क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है ताकि वे सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रख सकें। इस फैसले से सरकार का उद्देश्य इन राज्यों में शांति बहाल करना और हिंसा को नियंत्रित करना है।
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