
Baba Bageshwar Latest, Hindi News: किसी ना किसी कारण से चर्चा में रहने वाले बाबा बागेश्वर धाम वाले पंड़ित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अब आर्य समाज ने आईना दिखाया है। प्रसिद्ध सुधारक आर्य समाज नामक संस्था ने बाबा बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण को शास्त्री मानने से ही इनकार कर दिया है। आर्य समाज स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित की गई थी।
हिन्दी खबरों के मुताबिक, राजस्थान प्रदेश के सवाई माधोपुर के मलारना चौड़ में गुरुकुल चलाने वाले आचार्य सोमदेव आर्य ने बाबा बागेश्वर वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर आलेख लिखा है।
बागेश्वर वाला धीरेंद्र शास्त्री, कुछ न जानने वाला अविद्या का प्रचारक है। धीरेंद्र शास्त्री के विचार स्थिर नहीं हैं, अस्थिर विचार वाला व्यक्ति है। हिन्दी समाचार में आचार्य सोमदेव आर्य ने कहा "शास्त्र पढ़ने की बात तो बहुत दूर की है इन्होंने ठीक प्रकार से महर्षि वाल्मीकि की रामायण भी नहीं पढ़ी प्रतीत होती है।"
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आचार्य सोमदेव आर्य[/caption]
हनुमान जी के भक्त कहाते हैं किंतु हनुमान जी के शुद्ध जीवन चरित्र से परिचित भी नहीं हैं। हनुमान जी माता सीता जी की खोज करने लंका गए,खोज उसकी की जाती है जिसका पता न हो। हनुमान जी को स्वयं भी पता नहीं था कि माता सीता लंका में कहां हैं। धीरेंद्र शास्त्री को सब पता हो जाता है किंतु जिन इष्ट का सहारा लेकर बोलता है उनको पता नहीं था। (पढ़ें रामायण के सुंदर काण्ड का पांचवां सर्ग)
गलती जितनी धीरेंद्र शास्त्री की है उससे कहीं अधिक समाज के प्रबुद्ध विद्वत वर्ग की है। जनता में जब तक शुद्ध यथार्थ ज्ञान नहीं फैलेगा तब तक ऐसे ही अनेकों धीरेंद्र शास्त्री आते रहेंगे।
प्रबुद्ध वर्ग इन जैसों के पास जाता नहीं है, प्रेम पूर्वक सुधार की भावना से समझाता नहीं है, कोई इन जैसों के पास जाने का साहस या प्रयास करता है तो वह निंदनीय हो जाता है और इनका धंधा धड़ल्ले से चलता रहता है।
Baba Bageshwar Latest: हिंदुओं के लिए भावनात्मक बात है, हिन्दू राष्ट्र की बात कहना। विचारणीय बात यह है कि हिंदू राष्ट्र हो भी गया तो जो हिंदुओं में ढोंग, पाखण्ड, अविद्या, अंधविश्वास हैं, अपनी भाषा अपने शास्त्रों की भाषा न जानना, अपने वेद आदि शास्त्रों को न पढ़ना । तो वह हिंदू राष्ट्र क्या हिन्दू राष्ट्र रह पाएगा। यदि इन समस्त ढोंग पाखंड अधंविश्वास से युक्त हिंदू राष्ट्र बना तो फिर कोई गौरी, बाबर जैसा क्रूर लुटेरा लूटेगा, फिर कोई अनिरुद्ध धीरेंद्र जैसा जनता में अविद्या को ही फैलाएगा। निष्कर्ष यह है कि जब तक महर्षि दयानंद जी के आदर्श वेद के आधार पर आर्य राष्ट्र आर्यावर्त भारत देश नहीं बनेगा तब तक यथार्थ में यह राष्ट्र विश्व शिरोमणि समस्त सत्य विद्याओं का संवाहक न बन पाएगा।