Saturday, 15 June 2024

कोचिंग मालिकों पर कोर्ट का शिकंजा, नहीं कर सकेंगे कमाई

Delhi High Court on Coaching : आज के समय में घरों और फ्लैट्स में कोचिंग चलाना आम बात हो गई…

कोचिंग मालिकों पर कोर्ट का शिकंजा, नहीं कर सकेंगे कमाई

Delhi High Court on Coaching : आज के समय में घरों और फ्लैट्स में कोचिंग चलाना आम बात हो गई है। वहीं अब दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे ट्यूशन, कोचिंग मालिकों पर शिकंजा कसाना शुरू कर दिया है। दिन पर दिन बढ़ते कोचिंग को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इन कोचिंग पर बड़ा फैसला सुनाया है। अपने फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर आपके ट्यूशन क्लास या कोचिंग क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या 20 से ज्यादा है, तो आपको रेजिडेंशियल एरिया छोड़कर बाहर निकलना होगा। ऐसे क्लासेस सिर्फ कॉमर्शियल इलाकों में ही चलाए जा सकते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद से सभी छोटे कोचिंग संस्थानों को लोग परेशान हो गए हैं।

स्टूडेंट्स की जान को हो सकता है खतरा – दिल्ली हाई कोर्ट

एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच कहा कि ‘आवासीय इमारतों में कोचिंग क्लास के लिहाज से सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। ऐसी जगहों पर ज्यादा स्टूडेंट्स के साथ क्लास चलाना उनकी जान के लिए खतरनाक है।’

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों दिया ये आदेश ?

दरअसल एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष कोचिंग सेंटर्स को एजुकेशनल बिल्डिंग की परिभाषा में शामिल किए जाने के संबंध में अपील की थी। पेटिशनर की ओर से वकील राजेश्वरी हरिहरण ने कहा कि ‘दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) 2020 में एक नोटिफिकेशन लेकर आया गया था, जिसमें हमें एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की तरह परिभाषित किया गया। हम चाहते हैं कि ये नोटिफिकेशन वापस लिया जाए और स्पष्टीकरण दिया जाए।’

साथ ही इसपर बेंच ने कहा, ‘आपके कोचिंग क्लास में 100 स्टूडेंट्स तो जरूर पढ़ते होंगे। आपको किसी रेजिडेंशियल बिल्डिंग में नहीं होना चाहिए। किसी कॉमर्शियल बिल्डिंग में जाइए। जहां 20 से ज्यादा छात्र हैं वहां आप आवासीय क्षेत्र से काम नहीं कर सकते। आपको बाहर निकलना पड़ेगा। हम इसे 2020 नोटिफिकेशन नहीं कह सकते। यहां सवाल लोगों की जान का है।’ वहीं इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फरवरी 2020 में ‘डीडीए के संशोधित बिल्डिंग बायलॉज (UBBL) में शिक्षण संस्थानों में कई तरह की सुविधाओं की बात कही गई है। जैसे- दो सीढियां, खेल का मैदान। जरूरी नहीं कि ये किसी पहले से बनी हुई रेजिडेंशियन बिल्डिंग में हो। उन्होंने ये भी कहा कि कोचिंग सेंटर और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में अंतर है। शिक्षण संस्थान डिग्री, डिप्लोमा जैसे कोर्स कराते हैं। हम शिक्षण संस्थान नहीं हो सकते। हमें इतने कठोर नियमों के तहत नहीं लाया जाना चाहिए। हालांकि हम फायर सेफ्टी के नियम का पालन करने के लिए तैयार हैं।’ वहीं इस पूरी सुनवाई के अंत में कोर्ट ने क्लासेस सिर्फ कॉमर्शियल इलाकों में चलाने का फैसला दिया।

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