जिंदगी और मौत एक छत के नीचे, जाने आगरा के गांव की दर्दनाक कहानी
आगरा छह पोखर गांव की सच्चाई ऐसी है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां एक गांव ऐसा है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। गांव के लगभग हर मुस्लिम परिवार के घर में किसी न किसी अपने की कब्र बनी हुई है। हम बात कर रहे हैं आगरा से करीब 30 किलोमीटर दूर किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित छह पोखर गांव की। बाहर से यह गांव किसी आम गांव जैसा ही नजर आता है, लेकिन जैसे ही इसकी गलियों में कदम रखते हैं, हकीकत भीतर तक झकझोर देती है।
कब्र के पास जलता है चूल्हा
बता दें कि गांव में रहने वाले करीब 15 मुस्लिम परिवारों के घरों में कब्रें बनी हैं। कहीं रसोई के पास तो कहीं आंगन में, कब्र के सामने ही चूल्हा जलता है और रोजमर्रा की जिंदगी चलती है। जहां बच्चे खेलते हैं, वहीं किसी मां, पिता या मासूम की आखिरी आरामगाह बनी हुई है।
मजबूरी बनी परंपरा
बता दें कि ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई धार्मिक परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है। गांव में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं है। अधिकांश लोग जमीन के मालिक नहीं हैं, ऐसे में जब किसी की मौत हो जाती है तो मजबूरन अपने ही घर में गड्ढा खोदकर शव को सुपुर्द-ए-खाक करना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके घर में पत्नी और मासूम बच्ची की कब्र है। बात करते समय उनकी आंखें भर आती हैं। उनका कहना है,जब दफनाने की कोई जगह ही नहीं थी, तो इंसान क्या करता?
कब्रों के बीच पलते बच्चे
बता दें कि गांव में बच्चे कब्रों के ऊपर खेलते नजर आते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी मौत की खामोश मौजूदगी के बीच चल रही है। रात के वक्त कई परिवारों को डर और खौफ के साए में रहना पड़ता है, लेकिन मजबूरी के आगे सब खामोश हैं।
2 गज जमीन का सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन गरीब मुस्लिम परिवारों को इंसान की आखिरी जरूरत 2 गज जमीन भी नसीब नहीं होगी? छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां एक गांव ऐसा है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। गांव के लगभग हर मुस्लिम परिवार के घर में किसी न किसी अपने की कब्र बनी हुई है। हम बात कर रहे हैं आगरा से करीब 30 किलोमीटर दूर किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित छह पोखर गांव की। बाहर से यह गांव किसी आम गांव जैसा ही नजर आता है, लेकिन जैसे ही इसकी गलियों में कदम रखते हैं, हकीकत भीतर तक झकझोर देती है।
कब्र के पास जलता है चूल्हा
बता दें कि गांव में रहने वाले करीब 15 मुस्लिम परिवारों के घरों में कब्रें बनी हैं। कहीं रसोई के पास तो कहीं आंगन में, कब्र के सामने ही चूल्हा जलता है और रोजमर्रा की जिंदगी चलती है। जहां बच्चे खेलते हैं, वहीं किसी मां, पिता या मासूम की आखिरी आरामगाह बनी हुई है।
मजबूरी बनी परंपरा
बता दें कि ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई धार्मिक परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है। गांव में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं है। अधिकांश लोग जमीन के मालिक नहीं हैं, ऐसे में जब किसी की मौत हो जाती है तो मजबूरन अपने ही घर में गड्ढा खोदकर शव को सुपुर्द-ए-खाक करना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके घर में पत्नी और मासूम बच्ची की कब्र है। बात करते समय उनकी आंखें भर आती हैं। उनका कहना है,जब दफनाने की कोई जगह ही नहीं थी, तो इंसान क्या करता?
कब्रों के बीच पलते बच्चे
बता दें कि गांव में बच्चे कब्रों के ऊपर खेलते नजर आते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी मौत की खामोश मौजूदगी के बीच चल रही है। रात के वक्त कई परिवारों को डर और खौफ के साए में रहना पड़ता है, लेकिन मजबूरी के आगे सब खामोश हैं।
2 गज जमीन का सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन गरीब मुस्लिम परिवारों को इंसान की आखिरी जरूरत 2 गज जमीन भी नसीब नहीं होगी? छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।












