बिना नींव के खड़ा है यह विश्व प्रसिद्ध महल, जानें इंजीनियरिंग का राज

हवा महल का निर्माण सन् 1799 में जयपुर के शासक महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। प्रसिद्ध वास्तुकार लाल चंद उस्ताद ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। राजस्थानी और मुगल स्थापत्य शैली के सुंदर मिश्रण से बना यह महल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों से निर्मित है।

World famous palace
बिना नींव के खड़ी इमारत की दास्तां (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar25 Feb 2026 04:17 PM
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World Famous Palace India : भारत अपने इतिहास, संस्कृति और कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में एक ऐसी इमारत स्थित है, जो अपनी अनोखी बनावट के कारण पूरी दुनिया में चर्चा में रहती है। हम बात कर रहे हैं जयपुर के बीचों-बीच खड़े ‘हवा महल’ की, जिसे दुनिया की सबसे अनोखी इमारतों में गिना जाता है। इस महल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पारंपरिक गहरी नींव के बिना बनाया गया है, फिर भी यह सदियों से दृढ़ता से खड़ा है।

1799 में हुआ था निर्माण

हवा महल का निर्माण सन् 1799 में जयपुर के शासक महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। प्रसिद्ध वास्तुकार लाल चंद उस्ताद ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। राजस्थानी और मुगल स्थापत्य शैली के सुंदर मिश्रण से बना यह महल लाल और गुलाबी बलुआ पत्थरों से निर्मित है। बाहर से देखने पर यह महल एक विशाल मधुमक्खी के छत्ते जैसा प्रतीत होता है।

पर्दा प्रथा के कारण बनाया गया था महल

कई लोगों को लगता है कि हवा महल का निर्माण शाही निवास के रूप में हुआ था, लेकिन ऐसा नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार, उस दौरान राजघराने की महिलाएं कठोर पर्दा प्रथा का पालन करती थीं। वे सार्वजनिक समारोहों या बाजारों में सीधे तौर पर नहीं जा सकती थीं। इसलिए इस महल का निर्माण विशेष रूप से रानियों और उनकी दासियों के लिए कराया गया, ताकि वे झरोखों के माध्यम से बिना किसी की नजर में आए नीचे चल रहे जुलूस, त्योहार और शहर का नजारा देख सकें।

953 झरोखों का विशेष वास्तुकला

हवा महल में कुल 953 छोटे-छोटे झरोखे (खिड़कियां) हैं, जो इसकी खूबसूरती को चार चाँद लगाते हैं। इन झरोखों का निर्माण सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि वातावरण को ठंडा रखने के लिए किया गया था। वास्तुकला के ‘वेंचुरी प्रभाव’ (Venturi Effect) के आधार पर, जब हवा इन संकरे झरोखों से गुजरती है, तो उसकी गति बढ़ जाती है और महल के अंदर ठंडक बनी रहती है। इसी कारण इसे ‘पैलेस ऑफ विंड्स’ यानी हवाओं का महल भी कहा जाता है।

सीढ़ियों के बजाय बने रैंप

यह पांच मंजिला इमारत कई मायनों में अनूठी है। यहां ऊपर जाने के लिए सामान्य सीढ़ियां नहीं हैं, बल्कि ढलान वाले रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं। माना जाता है कि रानियां भारी घाघरा पहनती थीं, ऐसे में सीढ़ियों से चलना मुश्किल था, इसलिए रैंप का निर्माण किया गया। महल के अंदर गोवर्धन मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर सहित तीन मंदिर भी स्थित हैं।

कैसे खड़ी है बिना नींव के इमारत?

हवा महल की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसकी संरचनात्मक मजबूती है। इंजीनियरिंग के नजरिए से इसकी बनावट पिरामिड जैसी है। ऊपर की मंजिलें धीरे-धीरे पतली होती जाती हैं, जिससे पूरे भार का बोझ नीचे बराबर बंट जाता है। महल लगभग 87 डिग्री के झुकाव पर बना है, लेकिन घनी दीवारों और खंभों के कारण इसका संतुलन बना रहता है। 18वीं सदी में बिना आधुनिक मशीनों के इतनी बड़ी इमारत को गहरी नींव के बिना खड़ा करना वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है।

पर्यटन का प्रमुख केंद्र

बहुत कम लोगों को पता है कि हवा महल असल में ‘सिटी पैलेस’ का ही एक हिस्सा है और पहले इसका प्रवेश द्वार अलग से नहीं था। आज यह महल जयपुर की पहचान बन चुका है। अपनी अनोखी कहानी और शानदार वास्तुकला के कारण देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं। World Famous Palace India

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विजिलेंस की टीम ने खनन अधिकारी के ठिकानों पर की छापेमारी, 4 करोड़ से अधिक कीं नकदी बरामद

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस की टीम ने एक वरिष्ठ खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में की गई।

not baramad
खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar25 Feb 2026 01:30 PM
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Vigilance Raid : ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस की टीम ने एक वरिष्ठ खनन अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। यह कार्रवाई राज्य की राजधानी भुवनेश्वर में की गई। जानकारी के मुताबिक, माइंस विभाग के डिप्टी डायरेक्टर देबब्रत मोहंती को कथित तौर पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और अधिकारी को हिरासत में ले लिया।

फ्लैट और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई

गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनके फ्लैट और अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रॉली बैग, सूटकेस और अलमारियों में छिपाकर रखी गई करीब 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई। इसके अलावा कुछ सोना और अन्य संपत्तियों के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इतनी बड़ी मात्रा में कैश की बरामदगी राज्य में अब तक की सबसे बड़ी जब्ती में से एक है।

संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही

पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही है। विजिलेंस विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि अधिकारी ने यह धन किस तरह अर्जित किया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। यह कार्रवाई ओडिशा में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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सस्ती हुई Triber पर टूट पड़े खरीदार, 2 लाख गाड़ियां बिकीं

ट्राइबर पिछले साढ़े छह साल से रेनो इंडिया के लिए सबसे बेहतरीन परफॉर्मर साबित हो रही है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के अंत तक भारत में ट्राइबर की कुल 2,00,253 यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है।

Renault Triber
यह सस्ती कार बनी 'बेस्ट सेलर' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar25 Feb 2026 12:20 PM
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Renault Triber : भारतीय कार बाजार में अपनी वापसी की रणनीति पर काम कर रही फ्रांसीसी कार कंपनी रेनो (Renault) के लिए यह समय बेहद उत्साहवर्धक है। एक तरफ कंपनी अपनी नई डस्टर एसयूवी को लेकर चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर उसकी लोकप्रिय एमपीवी 'ट्राइबर' (Triber) ने बिक्री के मोर्चे पर एक बड़ी मील का पत्थर पार कर लिया है। किफायती दाम, फैमिली फ्रेंडली डिजाइन और 7 सीटों का मिलना इस कार को भारतीय ग्राहकों की पसंद बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

GST 2.0 का फायदा, घटी कीमतें

रेनो ने पिछले साल जुलाई में ट्राइबर के फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च किया था, जिसकी शुरुआती कीमत 6.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) थी। हालांकि, जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद कंपनी ने इसकी कीमतों में भारी कटौती की। इसकी शुरुआती कीमत घटाकर 5.76 लाख रुपये कर दी गई, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा। इस कदम ने खरीदारों को लुभाया और नतीजा यह रहा कि अब तक इस 7-सीटर कार की कुल 2 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी हैं।

2 लाख से ज्यादा यूनिट्स की बिक्री

अगस्त 2019 में अपनी शुरुआत करने वाली ट्राइबर पिछले साढ़े छह साल से रेनो इंडिया के लिए सबसे बेहतरीन परफॉर्मर साबित हो रही है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 के अंत तक भारत में ट्राइबर की कुल 2,00,253 यूनिट्स की बिक्री हो चुकी है। वहीं, घरेलू मांग के अलावा इस कार की दुनियाभर में भी अच्छी पकड़ है। दिसंबर 2025 तक इसकी 34,238 यूनिट्स का निर्यात भी किया जा चुका है। यह कार हैचबैक जैसी कीमत पर एमपीवी की सुविधा देती है, जिसके चलते फैमिली खरीदारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

6 साल बाद मिला शक्तिशाली अपडेट

ट्राइबर की मांग में हाल ही में आई तेजी का सबसे बड़ा कारण 23 जुलाई 2025 को लॉन्च किया गया नया मॉडल है। छह साल बाद मिले इस पहले बड़े अपडेट में कार का लुक पूरी तरह बदल दिया गया है। नए मॉडल में नए हेडलैंप, एलईडी डीआरएल, स्लिम ग्लॉस ब्लैक ग्रिल और नया डायमंड लोगो दिया गया है, जो इसे पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और आकर्षक बनाता है।

शक्तिशाली इंजन और बेहतर माइलेज

नई रेनो ट्राइबर में 1.0 लीटर, तीन सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 72 बीएचपी की पावर और 96 न्यूटन मीटर का टॉर्क उत्पन्न करता है। इसे मैनुअल और एएमटी दोनों तरह के गियरबॉक्स के विकल्पों के साथ खरीदा जा सकता है। माइलेज के मामले में भी यह कार बेहतर प्रदर्शन करती है और 19.59 से 19.76 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है। इसके अलावा, खरीदारों को डीलर लेवल पर सीएनजी किट फिट करवाने का भी विकल्प मिलता है, जिस पर फैक्ट्री वारंटी भी मिलती है।

फीचर्स से लैस, सेफ्टी का ख्याल रखा गया

अंदरूनी हिस्से में भी इस कार को काफी आधुनिक बनाया गया है। इसमें नए लोगो वाला स्टीयरिंग व्हील, ब्लैक और ग्रे कलर की अपहोल्स्ट्री और 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम (ऐप्पल कारप्ले और एंड्रॉएड ऑटो सपोर्ट) दिया गया है। फीचर्स के तौर पर इसमें क्रूज़ कंट्रोल, ऑटो वाइपर, ऑटो हेडलैंप और ऑटो फोल्ड आउट साइड रियर व्यू मिरर (ORVMs) जैसी सुविधाएं हैं।

सुरक्षा के मामले में कंपनी ने कोई कोताही नहीं बरती है। स्टैंडर्ड के तौर पर इसमें 6 एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) के साथ इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकिंग डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) और फ्रंट पार्किंग सेंसर जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कम कीमत में इतने सारे फीचर्स और 7 सीटों का विकल्प मिलने के कारण रेनो ट्राइबर भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। Renault Triber 

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