मुंबई की सत्ता पर सियासी गणित, शिंदे सेना की भाजपा से बड़ी मांग

बीएमसी में सत्ता गठन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव में दूसरे स्थान पर रही एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने अब मेयर पद को लेकर भाजपा के सामने 50-50 पावर शेयरिंग का प्रस्ताव रखा है। इस फॉर्मूले के तहत मुंबई के मेयर का कार्यकाल ढाई-ढाई साल के लिए दोनों दलों में बांटने की मांग की गई है।

Coalition government in BMC
बीएमसी में गठबंधन की सरकार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar17 Jan 2026 04:51 PM
bookmark

शिंदे गुट के नेताओं और नवनिर्वाचित पार्षदों का कहना है कि बीएमसी में एक स्थिर और मजबूत सरकार बनाने के लिए यह सबसे व्यावहारिक रास्ता है। पार्टी का तर्क है कि सत्ता गठन में उसकी निर्णायक भूमिका है, ऐसे में मेयर पद पर भागीदारी उसका हक बनता है। शिंदे सेना इस मांग को भावनात्मक मुद्दे से भी जोड़ रही है। पार्टी चाहती है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती वर्ष में मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से हो। नेताओं का कहना है कि शिवसेना की पहचान और मुंबई से उसका ऐतिहासिक रिश्ता मेयर पद से गहराई से जुड़ा रहा है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का पूरा राजनीतिक जीवन मुंबई और बीएमसी से जुड़ा रहा है। ऐसे में जन्मशती वर्ष में मेयर पद पर शिवसेना का प्रतिनिधि होना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए बेहद अहम है।

भाजपा–शिंदे गुट के बीच बातचीत जारी

सूत्रों के मुताबिक, 50-50 फॉर्मूले को लेकर भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। दोनों पक्ष सीटों के गणित और भविष्य की राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकल्पों पर मंथन कर रहे हैं।भाजपा के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय है और यहां सत्ता का असर सीधे तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ता है।

फैसला भाजपा हाईकमान के हाथ में

शिंदे गुट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मसले पर अंतिम निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को लेना है। अब सभी की निगाहें भाजपा हाईकमान पर टिकी हैं कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार कर बीएमसी में मजबूत गठबंधन बनाता है या किसी वैकल्पिक रास्ते की ओर बढ़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 50-50 फॉर्मूले पर सहमति बन जाती है तो बीएमसी में सत्ता संघर्ष थम सकता है, लेकिन मांग ठुकराए जाने की स्थिति में गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ सकता है।

बीएमसी चुनाव के नतीजे में चुनावी गणित

मुंबई नगर निगम के 227 सीटों वाले सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है। चुनाव परिणामों में बीजेपी–शिंदे गुट गठबंधन को कुल 118 सीटें मिली हैं। इसमें बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) को 65, कांग्रेस को 24, AIMIM को 8, मनसे को 6 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिली हैं।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

जिबरेलिक एसिड से खेती में बढ़ी उत्पादकता, किसानों को मिला नया समाधान

खेती में उत्पादकता बढ़ाने और पौधों के समग्र विकास को बेहतर बनाने के लिए जिबरेलिक एसिड (Gibberellic Acid – GA) एक प्रभावी पौध वृद्धि नियामक के रूप में तेजी से किसानों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह एक प्राकृतिक पौध हार्मोन है, जो गिबरेलिन समूह का सबसे आम और उपयोगी रूप माना जाता है।

Farming with gibberellic acid
जिबरेलिक एसिड से खेती (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar17 Jan 2026 03:15 PM
bookmark

विशेषज्ञों के अनुसार, जिबरेलिक एसिड का उपयोग “हरित क्रांति” के दौरान भी अहम भूमिका निभा चुका है। इसके प्रयोग से गेहूं और चावल जैसी फसलों में पैदावार बढ़ी, जबकि अत्यधिक तना बढ़ने की समस्या पर भी नियंत्रण रहा। इससे किसान नाइट्रोजन उर्वरकों का बेहतर उपयोग कर सके।

पौधों के विकास में कैसे करता है मदद

जिबरेलिक एसिड पौधों के विकास और वृद्धि को कई तरीकों से प्रभावित करता है। यह बीजों के अंकुरण को तेज करता है, बीज की कठोर परत को कमजोर कर कोशिकाओं के विस्तार में मदद करता है। इसके अलावा, यह पौधों में तना और जड़ की लंबाई बढ़ाने, पत्तियों को बड़ा करने तथा कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है।

फलों और फूलों वाली फसलों में GA का उपयोग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। कम उपज वाली फसलों में यह नर और मादा फूलों के संतुलन को सुधार सकता है, जिससे परागण बेहतर होता है और फल-सेट में वृद्धि होती है। कई मामलों में इसके प्रयोग से आंशिक या पूर्ण रूप से बीजरहित फल भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

सर्दियों में भी विकास संभव

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिबरेलिक एसिड पौधों की शीत निष्क्रियता (विंटर डॉर्मेंसी) को तोड़ने में भी सहायक है। इससे ठंड के मौसम में भी बीज अंकुरण और पौध विकास को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे साल भर खेती की संभावनाएं बढ़ती हैं।

उपयोग में सावधानी जरूरी

हालांकि जिबरेलिक एसिड प्राकृतिक रूप से पौधों में पाया जाता है, लेकिन इसका प्रयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में उपयोग करने से पौधों में हार्मोन के प्रति सहिष्णुता विकसित हो सकती है, जिससे इसका असर कम हो जाता है। इसे आमतौर पर पाउडर रूप में उपलब्ध कराया जाता है, जिसे रबिंग अल्कोहल और पानी में घोलकर पीपीएम (Parts Per Million) के अनुसार प्रयोग किया जाता है। समाधान को सुबह के समय, तेज धूप से पहले छिड़कना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्धारित निर्देशों का पालन करने पर जिबरेलिक एसिड का उपयोग सुरक्षित है। इसे आंखों में जाने से बचाना चाहिए और सीधे सांस के जरिए लेने या निगलने से भी परहेज करना चाहिए।

कृषि क्षेत्र में बढ़ती मांग

चीन की झेंग्झौ डेलॉन्ग केमिकल कंपनी लिमिटेड जैसी कई कंपनियां उच्च शुद्धता वाले पौध वृद्धि नियामकों का उत्पादन कर रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही मार्गदर्शन और संतुलित उपयोग के साथ जिबरेलिक एसिड आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कुल मिलाकर, जिबरेलिक एसिड आधुनिक खेती में एक प्रभावशाली साधन बनकर उभरा है, जो फसल उत्पादन, गुणवत्ता और खेती की निरंतरता – तीनों को मजबूती प्रदान कर रहा है।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन का पूरा रोडमैप: बीजेपी में कैसे तय होता है नाम?

पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 02:03 PM
bookmark

BJP National President Election 2026 : भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह चुनाव पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान संगठन पर्व-2024 के तहत कराया जा रहा है। शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित कर दिया। पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

चरण 1: इलेक्टोरल कॉलेज की सूची जारी (16 जनवरी 2026)

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को हुई। दोपहर 12 बजे इलेक्टोरल कॉलेज की सूची प्रकाशित की गई।बीजेपी के संविधान के अनुसार, इलेक्टोरल कॉलेज में राष्ट्रीय परिषद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य और राज्य परिषदों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वोट देने का अधिकार इन्हीं सदस्यों को होता है।

चरण 2: नामांकन दाखिल (19 जनवरी 2026)

19 जनवरी 2026 को इस चुनावी प्रक्रिया का सबसे अहम मोड़ आएगा—जब नई दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय में दोपहर 2 से 4 बजे के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए जाएंगे। लेकिन यह सिर्फ फॉर्म जमा करने की औपचारिकता नहीं है; पार्टी के संविधान ने उम्मीदवार के लिए कड़ी योग्यता और मजबूत संगठनात्मक समर्थन की शर्तें तय कर रखी हैं। दावेदार को या तो पार्टी में कम से कम चार कार्यकाल पूरे करने होंगे, या फिर 15 वर्षों तक सक्रिय सदस्य के तौर पर निरंतर भूमिका निभाई होनी चाहिए। वहीं नामांकन तभी वैध माना जाएगा जब किसी एक राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्य प्रस्तावक बनें और साथ ही कम से कम 5 राज्यों से समर्थन मिले

चरण 3: नामांकन जांच और नाम वापसी (19 जनवरी 2026)

नामांकन की घड़ी जैसे ही खत्म होगी, उसी दिन पार्टी मुख्यालय में चुनावी प्रक्रिया तेज रफ्तार में अगले चरण में प्रवेश कर जाएगी। शाम 4 से 5 बजे तक दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच होगी। इसके बाद शाम 5 से 6 बजे का समय उम्मीदवारों के लिए रणनीतिक फैसला लेने का होगा यहीं नाम वापस लेने की अंतिम खिड़की खुलेगी। फिर शाम 6:30 बजे राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति से तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि पार्टी में अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से तय हुआ है या फिर 20 जनवरी को वोटिंग की औपचारिक लड़ाई तक मामला पहुंचने वाला है।

चरण 4: मतदान और परिणाम (20 जनवरी 2026)

नाम वापसी के बाद तस्वीर अगर साफ नहीं होती और मैदान में एक से ज्यादा वैध दावेदार बने रहते हैं, तो मुकाबला 20 जनवरी 2026 को सीधे वोटिंग तक पहुंच जाएगा। उस दिन सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य मतदान करेंगे और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार बचता है, तो पार्टी की परंपरा और नियमों के मुताबिक उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा

संभावित उम्मीदवार के प्रस्तावक कौन हो सकते हैं?

सूत्रों की मानें तो बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन को इस बार संगठन बहु-स्तरीय समर्थन के साथ मजबूत दिखाने की तैयारी में है। चर्चा है कि वे तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं, ताकि संदेश सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि नेतृत्व से लेकर संगठन के हर स्तर की सहमति का जाए। पहले सेट में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के प्रस्तावक बनने की संभावना जताई जा रही है। दूसरे सेट में 20 से अधिक निर्वाचित प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर शामिल हो सकते हैं, जो देशभर में संगठनात्मक स्वीकार्यता का संकेत देंगे। वहीं तीसरे सेट में नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन जोड़कर नामांकन को व्यापक वैधता देने की रणनीति बताई जा रही है।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में नई कमान का औपचारिक हस्तांतरण

यदि नितिन नबीन पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो बीजेपी मुख्यालय में नेतृत्व परिवर्तन का औपचारिक मंचन किया जाएगा। पार्टी परंपरा के मुताबिक उन्हें दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय तक प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में ले जाया जाएगा। इसी के साथ पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व का औपचारिक बदलाव पूरा हो जाएगा। बीजेपी के लिए यह प्रक्रिया ‘संगठन पर्व-2024’ के समापन की तरह भी देखी जा रही है और साथ ही आने वाले महीनों में संगठन को चुनावी मोड में शिफ्ट करने वाले नए चरण की शुरुआत भी। इसलिए नए अध्यक्ष का चयन केवल एक पद की घोषणा नहीं, बल्कि अगले वर्षों की राजनीतिक दिशा, रणनीति और चुनावी तैयारी का रोडमैप तय करने वाला फैसला माना जा रहा है। BJP National President Election 2026

संबंधित खबरें