मेडागास्कर की अनोखी परंपरा, संगीत और नृत्य के बीच होती है आत्माओं की श्रद्धांजलि

दुनिया को दिखाती है कि कैसे विभिन्न संस्कृतियों में मौत को देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। मेडागास्कर के मालगासी लोग मौत को एक अंतिम यात्रा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा मानते हैं।

The cultural diversity of Madagascar
मेडागास्कर की सांस्कृतिक विविधता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 09:27 PM
bookmark

मेडागास्कर के मालगासी समुदाय की एक रहस्यमयी और अनोखी परंपरा, जिसे 'फामादीहाना' कहा जाता है, दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है। इस खास रस्म में परिवार वाले अपने पूर्वजों की कब्र खोलते हैं, उनके अवशेषों को नए कपड़ों में लपेटते हैं और संगीत के संग नाचते-गाते हैं। इसे मौत का अंत नहीं बल्कि जीवन का एक हिस्सा माना जाता है, जिसमें आत्माओं का घर में रहना और समय-समय पर धरती पर लौटना विश्वास किया जाता है।

रहस्यमयी परंपरा: शवों के साथ नाच-गाना और श्रद्धांजलि

फामादीहाना का अर्थ है 'रहना' या 'वापस आना', और यह परंपरा सदियों पुरानी है। मालगासी परिवार अपने पूर्वजों की कब्रें खोलते हैं, उनके अवशेषों को नए रेशमी कफन में लपेटते हैं और फिर संगीत और नृत्य के साथ इस आयोजन का आनंद लेते हैं। माना जाता है कि इस दौरान मृतकों की आत्माएं उनके साथ रहती हैं और परिवार का हिस्सा होती हैं। पर्यटकों के लिए यह नजारा बेहद चौंकाने वाला हो सकता है, जिसमें उंगली से इशारा करना भी वर्जित माना जाता है, क्योंकि इससे आत्माएं नाराज हो सकती हैं।

कोरोना महामारी का असर: नियमों में बदलाव

2017 में मेडागास्कर में प्लेग महामारी फैलने के बाद सरकार ने इस परंपरा पर कुछ प्रतिबंध लगाए। खासकर, संक्रामक बीमारी से मरने वालों की कब्रें खोलने पर रोक लगा दी गई। बावजूद इसके, कई परिवार अभी भी अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए यह परंपरा निभाते हैं, यह कहते हुए कि यह मोहब्बत और यादों का प्रतीक है, डर नहीं।

मौत का नया नजरिया: संस्कृति और मानवता का अनोखा रंग

यह खबर दुनिया को दिखाती है कि कैसे विभिन्न संस्कृतियों में मौत को देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। मेडागास्कर के मालगासी लोग मौत को एक अंतिम यात्रा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा मानते हैं। फामादीहाना उनके लिए यादों, सम्मान और मोहब्बत का त्योहार है, जो सदियों से जीवित है।

यह परंपरा हमें सिखाती है कि इंसानी रिश्तों की गहराई और विविधता कितनी विशाल है। चाहे डरावनी लगे या अनोखी, यह रस्म मालगासी समुदाय के लिए जीवन और मृत्यु का अनोखा मेल है, जो सदियों से कायम है।

अगली खबर पढ़ें

अमित शाह ने किया पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन

पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल योग, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Patanjali Integrated Medicine System
गृह मंत्री ने अस्पताल का निरीक्षण कर की सराहना (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 05:53 PM
bookmark

पतंजलि योगपीठ द्वारा संचालित पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का लोकार्पण केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण किया और योग, आयुर्वेद व आधुनिक चिकित्सा के समन्वय पर आधारित इंटीग्रेटेड मेडिसिन सिस्टम की सराहना करते हुए इसे विश्व का प्रथम हाइब्रिड हॉस्पिटल बताया। गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय पतंजलि प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने योग, आयुर्वेद और सनातन जीवन पद्धति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने तथा रोगमुक्त विश्व के निर्माण को लेकर स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने पतंजलि योगपीठ परिसर में रात्रि विश्राम भी किया।

पतंजलि परिवार के लिए गौरव का क्षण

पतंजलि योगपीठ के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामदेव ने कहा कि यह पूरे पतंजलि परिवार के लिए गर्व का विषय है कि विश्व के पहले इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल का उद्घाटन ऐसे नेता के करकमलों से हुआ, जो योग-आयुर्वेद और सनातन मूल्यों को सर्वोपरि मानते हैं। उन्होंने कहा कि यहां 90 से 99 प्रतिशत रोगियों का उपचार योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, पंचकर्म, षट्कर्म, उपवास और जीवनशैली सुधार से किया जाएगा। स्वामी रामदेव ने बताया कि बीमारियों के मुख्य कारण तनाव, सूजन और शरीर में अशुद्धि हैं, जिनका उपचार प्राकृतिक विधियों से संभव है। उन्होंने दावा किया कि पतंजलि में हृदय रोग, डायबिटीज, बीपी, थायराइड, किडनी व लिवर रोगों पर प्रभावी कार्य किया जा रहा है और गैर-जरूरी दवाओं, ऑपरेशनों व जांचों से बचने पर जोर दिया जाता है।

रिसर्च और आधुनिक सुविधाओं का संगम

स्वामी रामदेव ने बताया कि पतंजलि देश के लगभग 10 एम्स सहित ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका के 25 बड़े मेडिकल संस्थानों के साथ संयुक्त रिसर्च कर रहा है। एनिमल ट्रायल, ह्यूमन ट्रायल और ड्रग डिस्कवरी के वैज्ञानिक मानक अपनाए जा रहे हैं। 1.38 करोड़ रोगियों का क्लिनिकल डेटा पतंजलि के पास उपलब्ध है।

सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं

पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि 250 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल में 24×7 इमरजेंसी और ट्रॉमा सेवाएं, हाई-एंड आईसीयू, वेंटिलेटर सपोर्ट और क्रिटिकल केयर एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। यहां कार्डियोलॉजी विभाग में कैथ लैब, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर और स्टेंट की सुविधा है, जबकि न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेन व स्पाइन सर्जरी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ऑर्थोपेडिक, जनरल सर्जरी, स्त्री रोग, नेफ्रोलॉजी और डायलिसिस यूनिट सहित अत्याधुनिक इमेजिंग एवं डायग्नोस्टिक सेंटर भी स्थापित किया गया है, जहां एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।

आर्थिक रूप से कमजोरों को राहत

स्वामी रामदेव ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को विशेष सुविधा दी जाएगी, जबकि सामान्य रोगियों के लिए न्यूनतम शुल्क पर विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध होगा। भविष्य में इस इंटीग्रेटेड हाइब्रिड हॉस्पिटल मॉडल का विस्तार देश और दुनिया के अन्य हिस्सों में किया जाएगा।

अगली खबर पढ़ें

मुंबई बीएमसी में लॉटरी ने बदला खेल, अब महिला चेहरों पर होगा सियासी दांव

बहुमत जिस गठबंधन के पास होगा, वही तय करेगा कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा। महिला आरक्षण के चलते अब इन महानगरों की सियासत में नए चेहरे और नई रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं।

Lottery Brihanmumbai Municipal Corporation
लॉटरी ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 03:58 PM
bookmark

महाराष्ट्र की राजनीति में गुरुवार का दिन अहम रहा। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य की प्रमुख महानगरपालिकाओं में मेयर पद के आरक्षण को लेकर निकाली गई लॉटरी में बड़ा फैसला हुआ। लॉटरी के अनुसार मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक नगर निगमों में मेयर पद सामान्य श्रेणी (महिला) के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसके साथ ही इन सभी महानगरपालिकाओं की कमान अब महिला मेयर के हाथों में होगी।

मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। दरअसल, मेयर पद का आरक्षण चक्रानुक्रम पद्धति से तय होता है, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग शामिल होते हैं। इस बार भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर 118 सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन उनके खेमे से कोई भी एससी वर्ग का पार्षद निर्वाचित नहीं हुआ। ऐसे में अगर मेयर पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित होता, तो स्थिति जटिल हो सकती थी। हालांकि लॉटरी में सामान्य श्रेणी (महिला) निकलने से यह विवाद समाप्त हो गया।

सियासी मायने लोकप्रिय महिला पार्षद को मैदान में उतर सकती है

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाने वाली BMC का मेयर पद सामान्य श्रेणी (महिला) में जाने को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। ओपन कैटेगरी होने से जातिगत बाध्यता समाप्त हो गई है और अब सभी पार्टियां अपनी सबसे मजबूत और लोकप्रिय महिला पार्षद को मैदान में उतार सकती हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने आरोप लगाया है कि आरक्षण और रोटेशन की प्रक्रिया को सत्ता के फायदे के अनुसार मोड़ा गया है, ताकि कुछ खास चेहरों के लिए रास्ता साफ किया जा सके।

शिवसेना का गढ़ रही है बीएमसी

पिछले करीब 30 वर्षों से बीएमसी शिवसेना का अभेद्य किला रही है। ऐसे में खुले वर्ग में महिला आरक्षण आने से भाजपा और शिंदे गुट अब ऐसे महिला चेहरे की तलाश में हैं, जिसकी मुंबई की जनता में मजबूत पकड़ हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब मुकाबला पूरी तरह फेस वैल्यू और रणनीतिक मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा।

लॉटरी के बाद तय कार्यक्रम

लॉटरी के बाद तय कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे। मेयर का चुनाव सीधे जनता नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए पार्षद करेंगे। नगर निगम की विशेष बैठक में पीठासीन अधिकारी की मौजूदगी में मतदान होगा। चुनाव से पहले सभी पार्टियां व्हिप जारी करेंगी और व्हिप का उल्लंघन करने पर पार्षद की सदस्यता भी रद्द हो सकती है।

बहुमत जिस गठबंधन के पास होगा, वही तय करेगा कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा। महिला आरक्षण के चलते अब इन महानगरों की सियासत में नए चेहरे और नई रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं।