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बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने मेहनत और लगन की नई मिसाल कायम की है।

Sachin's Record : बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने मेहनत और लगन की नई मिसाल कायम की है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र खैरा प्रखंड के मिलनीटांड़ गांव के रहने वाले 28 वर्षीय सचिन दास देवगर ने एक के बाद एक 7 सरकारी नौकरियां हासिल कर इतिहास रच दिया है। अब उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बनने का सपना भी पूरा कर लिया है।
Sachin's Record
सचिन का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता मटन शॉप चलाते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी और सचिन की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार के संघर्ष और समर्थन के बीच सचिन ने अपने लक्ष्य की ओर लगातार कदम बढ़ाए और आज वह कई सरकारी नौकरियों के बाद प्रशासनिक सेवा तक पहुंच चुके हैं। सचिन की शुरुआती शिक्षा आसान नहीं थी। वे रोजाना लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव के पास ही पूरी की, जबकि आगे की पढ़ाई जमुई और नवादा में की। यही संघर्ष उनकी मेहनत की नींव बना, जिसने आगे चलकर उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
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सचिन दास ने अलग-अलग समय पर कई सरकारी परीक्षाएं पास कीं और विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं:
* भारतीय नौसेना नेवी में चयन
* रेलवे ग्रुप डी में चयन
* रेलवे टेक्नीशियन पद
* एसएससी परीक्षा के माध्यम से सेक्शन आॅफिसर
* 69वीं बीपीएससी में रेवेन्यू आफिसर
* और अब 70वीं बीपीएससी में 104वीं रैंक के साथ एसडीएम बना।
उनकी यह उपलब्धि उन्हें देश के उन चुनिंदा युवाओं में शामिल करती है जिन्होंने इतनी विविध सरकारी सेवाओं में सफलता हासिल की है।
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फिलहाल सचिन बेगूसराय में रेवेन्यू आफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उनका अगला लक्ष्य यूपीएससी परीक्षा पास करना है। वे कहते हैं कि लगातार मेहनत, अनुशासन और परिवार के समर्थन ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है। सचिन की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत और निरंतरता से सफलता हासिल की जा सकती है।
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