Shaheed Udham Singh : लंदन जा कर जनरल डायर को गोली मारी और लिया था जालियाँवाला बाग़ का बदला, आज मनाई जा रही है जयंती
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:58 PM
जालियाँवाला हत्याकांड जैसी नृशन्स घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे Shaheed Udham Singh ने इस घटना का बदला लंदन जा कर लिया था। उनके अंदर देश सेवा का इतना अधिक जूनून था कि वे लगभग 20 वर्ष की आयु में ही अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिल कर आजादी की लड़ाई में कूद गए और 31 जुलाई 1940 को उन्हें इस लड़ाई में अपने जीवन का बलिदान देना पड़ा। माइकल ओ डायर को गोली मारने के कारण उन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी थी।
बताया जाता है कि Shaheed Udham Singh के बचपन में ही उनके माता एवं पिता का निधन हो गया था और इस वजह से उन्हें अपने भाई के साथ एक अनाथालय में रहना पड़ा। हालांकि 1919 में ही उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए।
नाम बदल कर विदेश में रहते थे Shaheed Udham Singh
देश में धर्मनिरपेक्षता को व्यापक रूप से फैलाने के लिए Shaheed Udham Singh अपने नाम को बदल कर हर जगह मोहम्मद सिंह आजाद लिखते थे। कुछ इतिहासकारों का यह भी मानना है कि वे ब्रिटिशर्स से अपनी पहचान को छुपाने के लिए ऐसा करते थे। उन्होंने अपने आखिरी पत्र जो उन्होंने फांसी से ठीक पहले लिखा में भी अपना नाम मोहम्मद सिंह आजाद ही लिखा। इस नाम के जरिये वे हिंदु, मुस्लिम और सिख़ तीनों धर्मों को मिलाकर चलने का संदेश दे रहे थे। वहीं विदेशों में वे फ्रैंक ब्राजील और बावा सिंह के नाम से रहा करते थे। ग़दरी इंकलाबी Shaheed Udham Singh नामक पुस्तक में भी इस बात का जिक्र किया गया है।
वर्ष 1919 में जब वे अनाथालय से निकले तब उनकी आँखों के सामने ही जालियाँवाला बाग़ काण्ड हुआ जिसकी ज्वाला उनके हृदय में धधक रही थी। इसका बदला लेने के लिए वे लंदन पहुंचे और एक मोटी पुस्तक में बंदूक को छिपा कर उसी सभा में बैठ गए जहाँ माइकल ओ डायर उपस्थित था। मौका देख कर उन्होंने माइकल पर दो गोलियां चलाईं। इसके बाद वे वहाँ से भागे भी नहीं और उन्होंने खुद की गिरफ्तारी दे दी। उनका बलिदान हमेशा यह सन्देश देता रहेगा कि भारत के खिलाफ आंख उठाने वाले को कभी भी बख्शा नहीं जाएगा।