आखिर अदालत ने केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर किसी विशेष पिछड़े समुदाय का सदस्य मानने पर आपत्ति क्यों जताई ? इस फैस का तमिलनाडु की BC मुस्लिम आरक्षण व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा ? जानिए पूरे मामले की पृष्ठभूमि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दायरा और आरक्षण की पात्रता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू।
.webp?v=1792045082917)
National News : धर्म परिवर्तन के बाद पिछड़ा वर्ग (BC) आरक्षण का लाभ लेने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर पिछड़ा वर्ग मुस्लिम (BC Muslim) श्रेणी में आरक्षण देने की व्यवस्था को खारिज कर दिया गया था। इस फैसले से तमिलनाडु सरकार को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने स्पष्ट किया कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में जाने मात्र से किसी व्यक्ति को किसी विशेष अधिसूचित पिछड़े समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर BC मुस्लिम आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता। National News
यह भी पढ़ें : रेलवे के लाखों कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, 78 दिन के बोनस को मंजूरी
यह विवाद तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के सरकारी आदेश से जुड़ा है। सरकार ने इस आदेश के माध्यम से पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC), विमुक्त समुदायों (DNC) और अनुसूचित जाति (SC) से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को निर्धारित शर्तों के तहत BC मुस्लिम श्रेणी में शामिल कर आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था की थी। सरकार का उद्देश्य धर्म परिवर्तन के बाद भी पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ उपलब्ध कराना था। हालांकि, इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई। National News
इसे भी पढ़ें : भारत में थोक महंगाई का बड़ा झटका, सितंबर में 11.39% पर पहुंची दर; ईंधन और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े
25 जून 2026 को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार के आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि इस्लाम अपनाने से कोई व्यक्ति अपने आप राज्य के सात अधिसूचित पिछड़ा वर्ग मुस्लिम समुदायों में शामिल नहीं हो जाता। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब शीर्ष अदालत ने सरकार की चुनौती खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। National News
जरूर पढ़ें : CEC के इस्तीफे की मांग के बीच बड़ा एक्शन, CJP के दो नेता तिहाड़ भेजे गए
अवश्य पढ़ें : CEC विवाद पर पीयूष गोयल का पलटवार, कांग्रेस के पुराने फैसलों पर उठाए सवाल
इसे भी अवश्य पढ़ें : उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाला पर एक साल की पाबंदी, सरकार ने जारी किया आदेश
तमिलनाडु में पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी के अंतर्गत अंसार, डेक्कनी मुस्लिम, डुबेकुला, लब्बाई, मापिल्ला, शेख और सैयद जैसे अधिसूचित समुदाय शामिल हैं। लब्बाई समुदाय में राउथर और मरक्कायर का भी उल्लेख है। मामले का मुख्य प्रश्न यह था कि क्या किसी दूसरे समुदाय से इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर इन अधिसूचित समुदायों में शामिल होकर आरक्षण का लाभ ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्पष्ट किया है कि केवल धर्म परिवर्तन से किसी विशेष पिछड़े समुदाय की सदस्यता स्वतः हासिल नहीं होती। National News
विज्ञापन