Dashrath Manjhi: एक ऐसा शख्स जिसने तोड़ा पहाड़ का गुरूर, कॉमन मैन से बने माउंटेन मैन

Dashrath Manjhi: आज दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता। हर मेहनती स्टूडेंट के दिल में दशरथ मांझी बसे हुए हैं। माउंटेन मैन कहे जाने वाले दशरथ मांझी ने अपनी जिद और मेहनत से बिहार के गेहलौर गांव के बीच पहाड़ काटकर रास्ता बनाया। चलिए जानते हैं उनकी अनसुनी कहानी।

Mountain Man Dashrath Manjhi
दशरथ मांझी की कहानी
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 12:53 PM
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हर किसी की जिंदगी में ऐसी घटनाएं जरूर होती है जो पूरी दिशा बदल देती हैं। कुछ लोग मुश्किलों के सामने हार मान लेते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो संघर्ष को चुनौती समझकर अपने रास्ते खुद बनाते हैं। दशरथ मांझी ऐसे ही इंसान थे। बिहार के गया जिले के छोटे से गांव गेहलौर में जन्मे यह साधारण मजदूर अपनी जिंदगी में कभी भी असंभव को स्वीकार नहीं कर सके और बन गए माउंटेन मैन।

कौन थे दशरथ मांझी?

“माउंटेन मैन” के नाम से मशहूर दशरथ मांझी बिहार के गया जिले के छोटे से गांव गेहलौर के एक साधारण मजदूर थे। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी कठिनाई उसे रोक नहीं सकती। उन्होंने 22 साल की कड़ी मेहनत के बाद अपने गांव के लिए पहाड़ को काटकर एक रास्ता बनाया जिससे गांव और अस्पताल की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 15 किलोमीटर हो गई।

पत्नी से थी बेइंतहा मोहब्बत

दशरथ मांझी का जन्म 14 जनवरी 1934 को हुआ था। 1959 में उनकी पत्नी फल्गुनी देवी खाना लेकर जा रही थीं लेकिन रास्ते में उनका पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में गिर गईं। अस्पताल तक पहुंचने में समय ज्यादा लगने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने दशरथ को ठान लिया कि वह अपने गांव के लोगों के लिए इस पहाड़ को काटकर रास्ता बनाएंगे।

शुरूआत में लोग कहते थे पागल

1960 में दशरथ मांझी ने काम शुरू किया। लोग उन्हें पागल कहने लगे क्योंकि यह काम बहुत मुश्किल था। 1600 साल पुरानी चट्टानों को केवल हथौड़ा और छेनी से काटना आसान नहीं था। उन्होंने दिन भर खेतों में काम किया और शाम से रात तक पहाड़ काटते रहे। कभी-कभी चट्टानें बहुत सख्त होने पर उन्होंने उन्हें गर्म करके फोड़ते। उनके हाथ छिलते और पैर जख्मी होते रहे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

22 साल बाद मिली सफलता

1982 तक दशरथ मांझी ने अकेले ही 360 फीट लंबा, 30 फीट चौड़ा और 25 फीट ऊंचा रास्ता बना दिया। इस रास्ते से गांव के लोगों को अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में आसानी हुई। उनका यह काम दिखाता है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती।

दशरथ मांझी की कहानी हमें यह सिखाती है कि कड़ी मेहनत, जिद और धैर्य से किसी भी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। उनके प्रयास ने न केवल अपने गांव के लोगों की जिंदगी बदली बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

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महाराष्ट्र चुनाव से पहले नितेश राणे का विवादित बयान

महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। इसी बीच राज्य के मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर विवादित और भड़काऊ बयान दिया है। सभी 29 महानगरपालिकाओं में वही मेयर चुने जाएंगे जो ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते होंगे और हर जगह ‘भगवामय’ माहौल दिखाई देगा।

Nitesh Ranes controversial statement
नितेश राणे का विवादित बयान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Jan 2026 08:05 PM
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नितेश राणे ने मकर संक्रांति के अवसर का जिक्र करते हुए गुजराती और मारवाड़ी समाज से मुंबई और ठाणे में ही रहकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने गांव चले जाते हैं, लेकिन इस बार हिंदू समाज के लिए मुंबई और ठाणे में रहकर वोटिंग करना बेहद जरूरी है। सनातन और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए यहीं रहकर मतदान करें।

‘वोट जिहाद’ के बयान से फिर विवाद

मंत्री राणे ने आगे कहा कि अगर हिंदू समाज को सुरक्षित भविष्य चाहिए तो इस बार बड़े पैमाने पर मतदान करना होगा। उन्होंने कहा कि जो सामने से वोट जिहाद हो रहा है, मस्जिद और अजान के नाम पर डराया जा रहा है, उसका जवाब हिंदू समाज को मतदान के जरिए देना होगा। वोट जिहाद को जवाब सनातन धर्म के माध्यम से मिलेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

‘दो परिवारों ने मुंबई को लूटा’–मिलिंद देवड़ा

वहीं, शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने मुंबई महानगरपालिका को लेकर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में दो परिवारों ने मुंबई म्युनिसिपैलिटी को प्राइवेट एटीएम की तरह इस्तेमाल किया है। मिलिंद देवड़ा ने कहा कि “मुंबई एशिया की सबसे बड़ी म्युनिसिपैलिटी है, लेकिन इसे प्राइवेट ठेकेदारों और कुछ परिवारों के फायदे के लिए चलाया गया। हमारा एटीएम ‘एनी टाइम मनी’ नहीं बल्कि ‘Accountable to Mumbaikars’ होगा।

‘महायुति की होगी शानदार जीत’

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में महायुति की शानदार जीत होगी। लोग बदलाव चाहते हैं, विकास और नागरिक सुविधाओं पर काम चाहते हैं। राज्य और केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में मुंबई और मुंबईकरों के लिए जिस तरह काम किया है, उसे जनता ने देखा है।

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बीएमसी चुनाव 2026 से पहले मुंबई में हिंसा, आधी रात पैसे बांटने को लेकर बवाल

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।

BMC Elections 2026
राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Jan 2026 03:02 PM
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महाराष्ट्र में आगामी बीएमसी चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले ही मुंबई और नवी मुंबई में हिंसक घटनाएं सामने आने लगी हैं। पैसे बांटने के आरोपों को लेकर अलग–अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों ने कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

वार्ड 124 में आधी रात हिंसा, दो कार्यकर्ता गंभीर घायल

मुंबई के वार्ड नंबर 124 में रविवार देर रात उस वक्त तनाव फैल गया, जब शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। झड़प इतनी बढ़ गई कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस हिंसा में ठाकरे गुट के दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया। ठाकरे गुट का आरोप है कि उनकी उम्मीदवार सकीना शेख के समर्थकों पर शिंदे गुट के उम्मीदवार हारून खान के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पैसे बांटने के आरोपों से भड़की झड़प

ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का दावा है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ता मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांट रहे थे। जब उनके कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो पहले बहस हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने ठाकरे गुट के लोगों पर हमला किया, जिससे वे घायल हो गए।

नवी मुंबई में भाजपा और शिंदे गुट के बीच मारपीट

चुनावी हिंसा सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रही। नवी मुंबई के कोपरखैरने इलाके में भी सोमवार को भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार झड़प हुई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि वीडियो में देखा जा सकता है कि भाजपा कार्यकर्ता शिंदे गुट के एक कार्यकर्ता की पिटाई कर रहे हैं। आरोप है कि वह व्यक्ति मतदाताओं को पैसे बांटते हुए पकड़ा गया था। गुस्साए भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसका गला दबाने के साथ-साथ मोबाइल फोन भी छीन लिया।

वर्ली में आदित्य ठाकरे के क्षेत्र से भी विवाद

बता दें कि राजनीतिक विवाद वर्ली विधानसभा क्षेत्र तक भी पहुंच गया है, जो कि आदित्य ठाकरे का इलाका माना जाता है। वार्ड नंबर 193 में ठाकरे गुट की उम्मीदवार हेमांगी वार्लिकर के पति हरीश वार्लिकर पर भी पैसे बांटने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिंदे गुट और निर्दलीय उम्मीदवारों का दावा है कि महिलाओं को मीटिंग के बहाने बुलाकर उन्हें पैसे दिए गए। इस मामले को और ज्यादा तूल तब मिला जब ठाकरे गुट के पूर्व पदाधिकारी सूर्यकांत कोली ने इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। कोली इस बार टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।

चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल

बता दें कि मुंबई और नवी मुंबई में सामने आई इन घटनाओं ने BMC चुनाव 2026 की पारदर्शिता और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे पैसे बांटने और हिंसा के आरोपों के बीच प्रशासन के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।