अहमदाबाद के 10 बड़े होटलों की खुली पोल, 170 किलोग्राम नकली पनीर जब्त

विभाग ने इस अभियान के तहत कुल 173 किलोग्राम नकली पनीर और अन्य अनुपयोगी खाद्य सामग्री को जब्त कर नष्ट कर दिया। इन 10 रेस्तरांओं पर कुल 97,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

Black marketing of cheese in Ahmedabad
अहमदाबाद में पनीर का काला कारोबार फैला (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar24 Feb 2026 05:50 PM
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Gujrat news : गुजरात के अहमदाबाद शहर से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के कुछ मशहूर होटलों और रेस्तरां में ग्राहकों को परोसे जा रहे पनीर के नकली होने का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के खाद्य विभाग ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और 10 प्रतिष्ठित होटलों से 170 किलोग्राम से अधिक नकली पनीर जब्त किया है।

कैसे हुआ खुलासा?

खाद्य विभाग की टीम ने पिछले कुछ दिनों में शहर के प्रमुख होटलों पर अचानक छापेमारी की। इस दौरान लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई, जिसमें पनीर की गुणवत्ता 'निम्न' पाई गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया खौफनाक सच यह था कि इन होटलों में शुद्ध दूध से बने पनीर के बजाय वनस्पति तेल और कम वसा वाले दूध के मिश्रण से बने नकली पनीर का इस्तेमाल किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वाद में यह पनीर असली जैसा लगता है, लेकिन सेहत के लिए यह काफी हानिकारक साबित हो सकता है।

बड़े नाम शामिल

इस छापेमारी में शहर के कई बड़े और चर्चित रेस्तरां शामिल पाए गए। इनमें बारबेक्यू नेशन, द लियो पिज्जा, रियल पप्रिका और पिज्जार्टे जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। विभाग ने इन रेस्तरांओं पर खाद्य सुरक्षा मानकों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है।

कार्रवाई और जुर्माना

विभाग ने इस अभियान के तहत कुल 173 किलोग्राम नकली पनीर और अन्य अनुपयोगी खाद्य सामग्री को जब्त कर नष्ट कर दिया। इन 10 रेस्तरांओं पर कुल 97,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान खाद्य विभाग की मॉनिटरिंग और कार्रवाई का विस्तार बढ़ा है। इस अवधि में कुल 6,72,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया है, जबकि 823 किलोग्राम और 878 लीटर अनुपयोगी सामग्री को नष्ट किया गया है। आगे की जांच के लिए दूध उत्पादों के 495 नमूने भी भेजे गए हैं।

विभाग का संदेश

खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि मिलावटखोरों के खिलाफ यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। विभाग ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे स्वाद के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति भी जागरूक रहें।

इस कार्रवाई के बाद अहमदाबाद में खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर लोगों में एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई है और फूड डिपार्टमेंट पहले से कहीं अधिक सतर्क दिख रहा है। Gujrat news

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मोदी सरकार का बड़ा फैसला, बदला जाएगा केरल का नाम

खास बात यह है कि अप्रैल-मई के बीच प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले आए इस निर्णय को राज्य की पहचान, प्रशासनिक प्रक्रिया और राजनीतिक संकेतों तीनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केरल नाम बदलाव अपडेट
केरल नाम बदलाव अपडेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Feb 2026 04:40 PM
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 Kerala Name Change : केरल को लेकर बड़ी और अहम अपडेट सामने आई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए केरल का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने पर सहमति जता दी है। इस फैसले की जानकारी मंगलवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। खास बात यह है कि अप्रैल-मई के बीच प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले आए इस निर्णय को राज्य की पहचान, प्रशासनिक प्रक्रिया और राजनीतिक संकेतों तीनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कब भेजा गया था नाम बदलने का प्रस्ताव?

यह फैसला अचानक नहीं आया है। केरल सरकार लंबे समय से राज्य के नाम को स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप आधिकारिक रूप देने की कोशिश कर रही थी। इसी क्रम में 24 जून 2024 को केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि राज्य का नाम औपचारिक तौर पर ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ किया जाए। अब मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसी प्रस्ताव पर मुहर लग गई है, जिससे नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

‘केरलम’ नाम के पीछे क्या है तर्क?

केरल विधानसभा ने यह प्रस्ताव दूसरी बार पारित किया था। इससे पहले अगस्त 2023 में भी विधानसभा ने सर्वसम्मति से नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। हालांकि, उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रस्ताव की समीक्षा के दौरान कुछ तकनीकी/प्रक्रियागत सुधार सुझाए थे। इसके बाद प्रस्ताव को आवश्यक बदलावों के साथ दोबारा आगे बढ़ाया गया। जानकारी के मुताबिक, यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में पेश किया था। उनकी मांग थी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ के रूप में दर्ज किया जाए, ताकि राज्य का आधिकारिक नाम स्थानीय भाषा के अनुरूप और पहचान के लिहाज से अधिक सटीक हो सके। Kerala Name Change

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15 मिनट की ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेरा

प्राकृतिक आपदा ने कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अधिकांश परिवार खेती पर ही निर्भर हैं और उनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। खेतों में गिरे हुए पौधे और बिखरी फसल देखकर किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ दिख रही है।

Hailstorm caused damage to farmers
ओलावृष्टि ने दिया बड़ा झटका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar24 Feb 2026 04:20 PM
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Shivpuri News: मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में प्रकृति ने किसानों पर अपना कहर बरपा दिया है। जिले के लालगढ़, पिपरसमा, रायश्री और आसपास के गांवों में अचानक आई ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत को पलभर में खत्म कर दिया। मात्र 15 से 20 मिनट तक चली इस ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को ध्वस्त कर दिया, जिससे किसान परिवारों में शोक का माहौल है।

दोपहर में बदला मौसम का मिजाज

जानकारी के अनुसार, दोपहर के बाद मौसम अचानक से बदल गया और तेज बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 50 ग्राम से अधिक वजन के ओले गिरे, जिसकी चपेट में आकर सरसों, गेहूं, प्याज और टमाटर जैसी फसलें भारी नुकसान से दो-चार हुईं। ओलावृष्टि का यह दौर 15-20 मिनट ही चला, लेकिन इस थोड़े से समय में ही खेतों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

फसलें जमीन पर बिखरीं, उत्पादन पर संकट

सबसे ज्यादा नुकसान सरसों और गेहूं की फसल को हुआ है, जो कटाई के करीब थीं। खेतों में पक्की सरसों की फसल जमीन पर बिछ गई। पौधों पर अब दानों की जगह पत्तियां ज्यादा दिख रही हैं, जो साफ करता है कि उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। वहीं, गेहूं की फसल भी ओलों की मार से झुक गई है, जिससे दाने भरने की प्रक्रिया रुक सकती है। इसके अलावा, जिन किसानों ने हाल ही में प्याज की रोपाई की थी, उनकी क्यारियां बर्बाद हो गईं और टमाटर की फसल भी काफी हद तक नष्ट हो गई।

कर्ज में डूबे किसान, आंखों में आंसू

इस प्राकृतिक आपदा ने कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अधिकांश परिवार खेती पर ही निर्भर हैं और उनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है। खेतों में गिरे हुए पौधे और बिखरी फसल देखकर किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ दिख रही है। कई किसानों की आंखों में आंसू हैं। वे चिंतित हैं कि अगर समय रहते सरकारी मदद नहीं मिली तो न केवल उनका कर्ज चुक पाना मुश्किल होगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च भी प्रभावित होगा।

सरकार से मुआवजे की गुहार

प्रभावित किसानों ने प्रशासन और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करे और उचित मुआवजा दें। साथ ही, फसल बीमा योजना के तहत भुगतान शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा उनके हाथ में नहीं है, लेकिन सरकार का सहारा मिले तो वे इस विपरीत परिस्थिति से दोबारा उभर सकेंगे। Shivpuri News

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