राम जन्मभूमि विवाद: गोपाल सिंह विशारद की कानूनी लड़ाई की पूरी कहानी

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने न केवल अयोध्या विवाद का अंत किया, बल्कि गोपाल सिंह विशारद के 69 साल पुराने दावे को भी मान्यता दी। यह निर्णय इस बात का उदाहरण है कि न्याय की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन अंततः न्याय होता है।

RamJanmabhoomi BabriMasjid012
राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 06:34 PM
bookmark

राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले के साथ एक नाम फिर से चर्चा में आया है—गोपाल सिंह विशारद। 69 साल पहले जिस व्यक्ति ने राम जन्मभूमि में पूजा के अधिकार के लिए मुक़दमा दायर किया था, उसे न्यायालय ने उनकी मृत्यु के 33 साल बाद वह अधिकार प्रदान किया। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि हिंदू पक्ष को सौंपते हुए राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है, वहीं सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को 5 एकड़ वैकल्पिक ज़मीन देने का भी आदेश दिया गया है।

 कौन थे गोपाल सिंह विशारद?

गोपाल सिंह विशारद अयोध्या विवाद से जुड़े प्रारंभिक चार सिविल मुक़दमों में से एक के याचिकाकर्ता थे। उन्होंने 16 जनवरी 1950 को सिविल जज की अदालत में मुक़दमा दायर कर यह मांग की थी कि राम जन्मभूमि पर स्थापित मूर्तियों को हटाया न जाए और उन्हें पूजा व दर्शन से रोका न जाए। राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में वे और एम. सिद्दीक दोनों ही मूल पक्षकार थे, जिनका बाद में निधन हो गया। उनके कानूनी वारिसों ने आगे मुक़दमे की पैरवी की।

1949 की रात और विवाद की शुरुआत

दावा किया जाता है कि 22–23 दिसंबर 1949 की रात अभय रामदास और उनके साथियों ने बाबरी मस्जिद की दीवार फांदकर भीतर राम, जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियाँ स्थापित कर दीं। इसके बाद यह प्रचार हुआ कि भगवान राम अपने जन्मस्थान पर स्वयं प्रकट हुए हैं। इस घटना के बाद प्रशासन ने परिसर को विवादित घोषित कर दिया।

अदालत का पहला आदेश

गोपाल सिंह विशारद की याचिका पर सिविल जज ने उसी दिन स्थगनादेश जारी किया, जिसमें मूर्तियाँ न हटाने और पूजा जारी रखने का निर्देश दिया गया। बाद में इस आदेश को जिला जज और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। हालांकि इस स्थगनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन फ़ाइल वर्षों तक लंबित रही।

प्रशासन का पक्ष

तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जे.एन. उग्रा ने अपने हलफनामे में कहा था कि विवादित स्थल को लंबे समय से मुसलमान नमाज़ के लिए इस्तेमाल करते आ रहे थे और मूर्तियाँ चोरी-छिपे रखी गई थीं।

अन्य मुक़दमे भी जुड़े

बता दें कि 1951 में निर्मोही अखाड़ा ने मंदिर के प्रबंधन और पूजा अधिकार को लेकर मुक़दमा दायर किया।

1961 में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड और नौ मुस्लिम पक्षकारों ने मस्जिद और क़ब्रिस्तान की ज़मीन पर स्वामित्व का दावा किया। 1989 में रिटायर्ड जज देवकी नंदन अग्रवाल ने भगवान राम को न्यायिक व्यक्ति घोषित करते हुए नया मुक़दमा दायर किया। इन सभी मामलों की सुनवाई एक साथ चलती रही।

मौत के बाद भी जारी रहा मुक़दमा

1986 में गोपाल सिंह विशारद का निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे राजेंद्र सिंह ने मुक़दमे की पैरवी जारी रखी। सुन्नी पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि विशारद का दावा व्यक्तिगत पूजा अधिकार तक सीमित था, जो उनकी मृत्यु के साथ समाप्त हो जाना चाहिए था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

यह नेता बनेगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष

अब यह पूरी तरह पक्का हो चुका है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा का कौन नेता बनने वाला है। हम आपको यह पुख्ता जानकारी दे रहे हैं कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा का कौन सा नेता बनेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव से पहले BJP में बड़ा संकेत
राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव से पहले BJP में बड़ा संकेत
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar14 Jan 2026 04:48 PM
bookmark

BJP Next National President : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर फाइनल मोहर लग गई है। कौन बनेगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष? इस बड़े सवाल का जवाब मिल गया है। अब यह पूरी तरह पक्का हो चुका है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा का कौन नेता बनने वाला है। हम आपको यह पुख्ता जानकारी दे रहे हैं कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा का कौन सा नेता बनेगा।

भाजपा के वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष को बनाया जाएगा पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष

आपको बता दें कि हाल ही में भाजपा ने बिहार के नेता नितिन नबीन को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। भाजपा में कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का यह प्रयोग बिल्कुल अनूठा प्रयोग था। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया है। नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए औपचारिक तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है।

निर्विरोध चुना जाएगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष

भाजपा के अंतरंग सूत्रों ने दावा किया है कि भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन को निर्विरोध चुन लिया जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नितिन नबीन जल्दी ही अपना नामांकन पत्र दाखिल कर देंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भरे जाने वाले नितिन नबीन के नामांकन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावक होंगे। सूत्रों की माने तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ नितिन नबीन ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे और उनके के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन नहीं भरेगा। ऐसे में नितिन नबीन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है। BJP Next National President

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

कुतुब मीनार से भी ऊंचा शिखर! बिहार के विराट रामायण मंदिर की ऊंचाई जानिए

योजना के अनुसार, मंदिर में कुल 12 भव्य शिखर होंगे। इनमें मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा प्रस्तावित है। इसके अलावा परिसर में 198, 180, 135 और 108 फीट ऊंचे अन्य शिखर भी बनाए जाने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि इसे स्थापत्य और आध्यात्मिक दृष्टि से एक “मेगा प्रोजेक्ट” के रूप में देखा जा रहा है।

विराट रामायण मंदिर
विराट रामायण मंदिर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Jan 2026 04:27 PM
bookmark

Bihar News : बिहार का पूर्वी चंपारण इन दिनों एक भव्य धार्मिक परियोजना के चलते देशभर में चर्चा के केंद्र में है। चकिया–केसरिया मार्ग पर प्रस्तावित विराट रामायण मंदिर परिसर अपने विशाल आकार के साथ-साथ ऊंचाई और आध्यात्मिक महत्व की वजह से भी सुर्खियां बटोर रहा है। दावा है कि निर्माण पूरा होने के बाद यह मंदिर ऊंचाई के पैमाने पर अयोध्या के राम मंदिर और दिल्ली की ऐतिहासिक कुतुब मीनार को भी पीछे छोड़ सकता है।

120 एकड़ में बनेगा विशाल धार्मिक परिसर

सूत्रों के मुताबिक, यह मंदिर परिसर करीब 120 एकड़ में फैला होगा। आकार के लिहाज से भी इसे देश के सबसे बड़े धार्मिक परिसरों में गिना जा रहा है। प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार मंदिर की कुल लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट बताई जा रही है, जिससे इसका स्वरूप दूर से ही भव्य नजर आएगा। योजना के अनुसार, मंदिर में कुल 12 भव्य शिखर होंगे। इनमें मुख्य शिखर 270 फीट ऊंचा प्रस्तावित है। इसके अलावा परिसर में 198, 180, 135 और 108 फीट ऊंचे अन्य शिखर भी बनाए जाने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि इसे स्थापत्य और आध्यात्मिक दृष्टि से एक “मेगा प्रोजेक्ट” के रूप में देखा जा रहा है।

17 जनवरी को शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन

विराट रामायण मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, 17 जनवरी को परिसर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना/प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस अवसर पर देशभर से संत-महात्माओं, विद्वान आचार्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसी दिन सहस्र शिवलिंग की पीठ-स्थापना भी शास्त्रीय विधि-विधान के साथ संपन्न कराए जाने की बात कही गई है।

राम मंदिर और कुतुब मीनार से कितना आगे?

अयोध्या में निर्मित राम मंदिर को भारतीय संस्कृति और श्रद्धा का बड़ा प्रतीक माना जाता है। जानकारी के मुताबिक, यह मंदिर लगभग 2.7 एकड़ क्षेत्र में बना है। इसकी लंबाई 360 फीट और चौड़ाई 235 फीट बताई जाती है। तीन मंजिला इस मंदिर में 366 खंभे, 5 मंडप और 12 भव्य द्वार हैं। नागर शैली में बना यह मंदिर आधुनिक तकनीक और प्राचीन स्थापत्य का मेल माना जाता है। दिल्ली के महरौली क्षेत्र में स्थित कुतुब मीनार यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसके निर्माण की शुरुआत 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक के समय मानी जाती है और बाद में इसे इल्तुतमिश के दौर में पूरा कराया गया। करीब 72.5 मीटर ऊंची इस मीनार में 379 घुमावदार सीढ़ियां हैं, जबकि सतह पर फारसी-अरबी शिलालेख और ज्यामितीय नक्काशी इसकी पहचान मानी जाती है। Bihar News

संबंधित खबरें