नोएडा के इन सेक्टरों में आएगी पजल पार्किंग, पार्किंग संकट पर लगेगी लगाम
अधिकारियों के मुताबिक अब इन एजेंसियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद तकनीकी-अंतिम प्रक्रिया पूरी कर प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा, जिससे नोएडा की पार्किंग व्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है।

Noida News : नोएडा में लगातार बढ़ते वाहनों और पार्किंग की कमी से पैदा हो रहे ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। नोएडा प्राधिकरण ने शहर के तीन नए सेक्टरों में भी ऑटोमेटेड पजल पार्किंग विकसित करने की तैयारियां तेज कर दी हैं, ताकि सीमित जगह में अधिक गाड़ियों की सुरक्षित और व्यवस्थित पार्किंग हो सके। इसी क्रम में सेक्टर-63 में प्रस्तावित नोएडा की पहली पजल पार्किंग के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में दो एजेंसियां सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब इन एजेंसियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद तकनीकी-अंतिम प्रक्रिया पूरी कर प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा, जिससे नोएडा की पार्किंग व्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है।
नोएडा में कहां-कहां बनेगी पजल पार्किंग?
नोएडा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में पार्किंग सिस्टम को ज्यादा स्मार्ट, ऑटोमेटेड और अनुशासित बनाने की कवायद अब तेज हो गई है। सेक्टर-63 के बाद प्राधिकरण ने सेक्टर-124, सेक्टर-15 (अलका सिनेमा के पास) और सेक्टर-62 की ओर नए स्थानों पर पजल पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
क्या है ऑटोमेटेड पजल पार्किंग?
नोएडा में जिस ऑटोमेटेड पजल पार्किंग सिस्टम की तैयारी है, वह पारंपरिक बहुमंजिला पार्किंग से बिल्कुल अलग और ज्यादा स्मार्ट होगा। इसे पजल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कारों के स्लॉट और प्लेटफॉर्म किसी गेम की तरह ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं मूव करते हैं। चालक सिर्फ वाहन तय पॉइंट पर खड़ा करता है, इसके बाद मशीन कार को खुद निर्धारित स्लॉट तक पहुंचा देती है और जरूरत पड़ने पर उसी तरह वापस निकाल भी देती है। अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक में 3 से 6 मिनट में कार पार्क हो जाती है, जबकि सामान्य बहुमंजिला पार्किंग में यही प्रक्रिया अक्सर 10 से 15 मिनट तक खिंच जाती है।
नोएडा में 4 से 6 फ्लोर तक बन सकती है व्यवस्था
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, नोएडा में प्रस्तावित पजल पार्किंग स्ट्रक्चर 4 से 6 फ्लोर तक विकसित किए जा सकते हैं। शुरुआती आकलन में हर फ्लोर पर लगभग 25 कारों की क्षमता मानी जा रही है, यानी एक यूनिट में कुल मिलाकर 100 से 150 कारों तक की पार्किंग संभव होगी। यही वजह है कि नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह मॉडल खास माना जा रहा है।
नोएडा के लिए क्यों जरूरी?
नोएडा के कई सेक्टरों में ऑफिस हब, बाजार, अस्पताल और मेट्रो कनेक्टिविटी के चलते वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। नतीजा यह कि सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग कई इलाकों में जाम की सबसे बड़ी वजह बन जाती है। ऐसे में पजल पार्किंग को नोएडा के लिए एक व्यावहारिक “स्मार्ट समाधान” माना जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि कम भूमि क्षेत्र में ही 5-6 फ्लोर तक पार्किंग क्षमता विकसित की जा सकती है, संचालन के लिए कम स्टाफ की जरूरत पड़ती है और पूरी व्यवस्था सेंसर-बेस्ड होने से सुरक्षा व मॉनिटरिंग भी ज्यादा मजबूत रहती है।
सेंसर सिस्टम से हादसे का जोखिम कम
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, यह पार्किंग पूरी तरह ऑटोमेटेड है, जहां कारें मशीन के जरिए एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर शिफ्ट होती हैं। सुरक्षा के लिए इसमें सेंसर लगाए जाते हैं। यदि कोई बच्चा या जानवर गलती से अंदर आ जाए, तो सेंसर अलर्ट होते ही सिस्टम तुरंत रुक जाता है और कार वहीं स्थिर हो जाती है, ताकि दुर्घटना की आशंका न रहे। पार्किंग एरिया की सीमा तय कर पीली लाइन से संकेत भी दिया जा सकता है।
नोएडा में आगे क्या होगा?
फिलहाल सेक्टर-63 की पजल पार्किंग के टेंडर में आई एजेंसियों के दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसके साथ ही सेक्टर-124, सेक्टर-15 और सेक्टर-62 की ओर प्रस्तावित लोकेशनों पर भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर तैयारी तेज होने के संकेत हैं। नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह पहल सिर्फ पार्किंग नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम कंट्रोल और स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। Noida News
Noida News : नोएडा में लगातार बढ़ते वाहनों और पार्किंग की कमी से पैदा हो रहे ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। नोएडा प्राधिकरण ने शहर के तीन नए सेक्टरों में भी ऑटोमेटेड पजल पार्किंग विकसित करने की तैयारियां तेज कर दी हैं, ताकि सीमित जगह में अधिक गाड़ियों की सुरक्षित और व्यवस्थित पार्किंग हो सके। इसी क्रम में सेक्टर-63 में प्रस्तावित नोएडा की पहली पजल पार्किंग के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में दो एजेंसियां सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब इन एजेंसियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद तकनीकी-अंतिम प्रक्रिया पूरी कर प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा, जिससे नोएडा की पार्किंग व्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है।
नोएडा में कहां-कहां बनेगी पजल पार्किंग?
नोएडा प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में पार्किंग सिस्टम को ज्यादा स्मार्ट, ऑटोमेटेड और अनुशासित बनाने की कवायद अब तेज हो गई है। सेक्टर-63 के बाद प्राधिकरण ने सेक्टर-124, सेक्टर-15 (अलका सिनेमा के पास) और सेक्टर-62 की ओर नए स्थानों पर पजल पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
क्या है ऑटोमेटेड पजल पार्किंग?
नोएडा में जिस ऑटोमेटेड पजल पार्किंग सिस्टम की तैयारी है, वह पारंपरिक बहुमंजिला पार्किंग से बिल्कुल अलग और ज्यादा स्मार्ट होगा। इसे पजल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कारों के स्लॉट और प्लेटफॉर्म किसी गेम की तरह ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं मूव करते हैं। चालक सिर्फ वाहन तय पॉइंट पर खड़ा करता है, इसके बाद मशीन कार को खुद निर्धारित स्लॉट तक पहुंचा देती है और जरूरत पड़ने पर उसी तरह वापस निकाल भी देती है। अधिकारियों के मुताबिक, इस तकनीक में 3 से 6 मिनट में कार पार्क हो जाती है, जबकि सामान्य बहुमंजिला पार्किंग में यही प्रक्रिया अक्सर 10 से 15 मिनट तक खिंच जाती है।
नोएडा में 4 से 6 फ्लोर तक बन सकती है व्यवस्था
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, नोएडा में प्रस्तावित पजल पार्किंग स्ट्रक्चर 4 से 6 फ्लोर तक विकसित किए जा सकते हैं। शुरुआती आकलन में हर फ्लोर पर लगभग 25 कारों की क्षमता मानी जा रही है, यानी एक यूनिट में कुल मिलाकर 100 से 150 कारों तक की पार्किंग संभव होगी। यही वजह है कि नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह मॉडल खास माना जा रहा है।
नोएडा के लिए क्यों जरूरी?
नोएडा के कई सेक्टरों में ऑफिस हब, बाजार, अस्पताल और मेट्रो कनेक्टिविटी के चलते वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। नतीजा यह कि सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग कई इलाकों में जाम की सबसे बड़ी वजह बन जाती है। ऐसे में पजल पार्किंग को नोएडा के लिए एक व्यावहारिक “स्मार्ट समाधान” माना जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि कम भूमि क्षेत्र में ही 5-6 फ्लोर तक पार्किंग क्षमता विकसित की जा सकती है, संचालन के लिए कम स्टाफ की जरूरत पड़ती है और पूरी व्यवस्था सेंसर-बेस्ड होने से सुरक्षा व मॉनिटरिंग भी ज्यादा मजबूत रहती है।
सेंसर सिस्टम से हादसे का जोखिम कम
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, यह पार्किंग पूरी तरह ऑटोमेटेड है, जहां कारें मशीन के जरिए एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर शिफ्ट होती हैं। सुरक्षा के लिए इसमें सेंसर लगाए जाते हैं। यदि कोई बच्चा या जानवर गलती से अंदर आ जाए, तो सेंसर अलर्ट होते ही सिस्टम तुरंत रुक जाता है और कार वहीं स्थिर हो जाती है, ताकि दुर्घटना की आशंका न रहे। पार्किंग एरिया की सीमा तय कर पीली लाइन से संकेत भी दिया जा सकता है।
नोएडा में आगे क्या होगा?
फिलहाल सेक्टर-63 की पजल पार्किंग के टेंडर में आई एजेंसियों के दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसके साथ ही सेक्टर-124, सेक्टर-15 और सेक्टर-62 की ओर प्रस्तावित लोकेशनों पर भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर तैयारी तेज होने के संकेत हैं। नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह पहल सिर्फ पार्किंग नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम कंट्रोल और स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। Noida News












