जानकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर एक बैठक पहले ही हो चुकी है और अब उसी के आधार पर अंतिम ढांचा तय करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि न्यू नोएडा की योजना कागजों से निकलकर तय समयरेखा में जमीन पर उतर सके।

Noida News : न्यू नोएडा को लेकर बड़ी और गेमचेंजर अपडेट सामने आ रही है। जिस ‘न्यू नोएडा’ को अब तक लोग सिर्फ प्लानिंग और फाइलों में देखते थे, वह अब निर्णायक फैसले की दहलीज पर पहुंच चुका है। नोएडा प्राधिकरण ने न्यू नोएडा को लेकर अहम जानकारी साझा की है। नोएडा प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण की रणनीति लगभग फाइनल कर ली है और संकेत हैं कि अगले एक से डेढ़ महीने में शासन स्तर से इस प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लग सकती है। शुरुआती रोडमैप के अनुसार, प्राधिकरण हाइब्रिड मॉडल को आगे बढ़ा रहा है। जिसमें एक तरफ किसानों से आपसी सहमति के आधार पर सीधी खरीद का विकल्प रहेगा, तो दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन के जरिए अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया भी अपनाई जा सकेगी। नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि यह ड्यूल-ट्रैक मॉडल न्यू नोएडा की टाइमलाइन को तेज करने के साथ-साथ नोएडा के विकास एजेंडे में पारदर्शिता और किसानों के हितों का संतुलन भी सुनिश्चित करेगा।
न्यू नोएडा की परिकल्पना दादरी और बुलंदशहर बेल्ट के करीब 80 गांवों की जमीन पर टिकी है, जिसे दस्तावेजों में डीएनजीआईआर (Dadri–Noida–Ghaziabad Investment Region) का नाम दिया गया है। नोएडा प्राधिकरण की कोशिश है कि जमीन लेने की प्रक्रिया “टकराव नहीं, संवाद” के सिद्धांत पर आगे बढ़े। मकसद साफ है: आज के नोएडा के अनुभवों से सीख लेते हुए भविष्य का नोएडा ऐसी योजना के साथ खड़ा हो, जहां कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल क्लस्टर, हाउसिंग और नागरिक सुविधाएं पहले से तय रोडमैप पर विकसित हों और शहर की ग्रोथ रफ्तार के साथ-साथ व्यवस्था भी मजबूत रहे।
अधिकारियों का कहना है कि न्यू नोएडा में जमीन लेने से पहले सबसे अहम कदम मुआवजा दरों का निर्धारण पूरा किया जाएगा। इसी कड़ी में जनवरी में एक निर्णायक बैठक प्रस्तावित है, जिसके लिए नोएडा प्राधिकरण अपना प्रस्ताव तैयार कर चुका है। उधर, जमीन अधिग्रहण किस “रूट” से आगे बढ़ेगा इस मॉडल को लेकर भी शासन स्तर पर मंथन तेज है। जानकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर एक बैठक पहले ही हो चुकी है और अब उसी के आधार पर अंतिम ढांचा तय करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि न्यू नोएडा की योजना कागजों से निकलकर तय समयरेखा में जमीन पर उतर सके।
हाइब्रिड मॉडल के तहत न्यू नोएडा में जमीन लेने की रणनीति दोहरी राह पर आगे बढ़ेगी। पहली राह में नोएडा प्राधिकरण या अधिकृत डेवलपर किसानों से आपसी सहमति के आधार पर सीधे खरीद कर सकता है, ताकि बातचीत के जरिए सौदा तय हो और प्रक्रिया विवाद-मुक्त रहे। दूसरी राह “बैकअप विकल्प” के तौर पर खुली रहेगी। यदि कहीं सहमति अटके या जरूरत बने, तो जिला प्रशासन के माध्यम से धारा 4 और 6 के तहत अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी। प्राधिकरण के अधिकारियों का मानना है कि न्यू नोएडा के लिए यही मॉडल सबसे व्यावहारिक है, क्योंकि इससे परियोजना को गति भी मिलेगी और जमीन अधिग्रहण का काम परिस्थितियों के मुताबिक लचीलेपन के साथ आगे बढ़ सकेगा।
न्यू नोएडा की जमीन पर पहली चाल रणनीतिक लोकेशन से चलने वाली है। शुरुआती चरण में अधिग्रहण की शुरुआत ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और जीटी रोड के जंक्शन के आसपास खासकर जोखाबाद और सांवली के नजदीकी इलाकों से करने की तैयारी है। नोएडा प्राधिकरण की योजना साफ है: शासन से हरी झंडी मिलते ही प्रक्रिया को फेज-वाइज आगे बढ़ाया जाए, ताकि कनेक्टिविटी वाले इस कॉरिडोर से न्यू नोएडा का विकास तेज़ रफ्तार पकड़ सके और आगे के चरणों के लिए एक मजबूत आधार तैयार हो।
गौरतलब है कि डीएनजीआईआर (DNGIR) मास्टर प्लान–2041 को उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2024 में मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से न्यू नोएडा की परिकल्पना फाइलों और नक्शों से निकलकर जमीन पर उतरने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ी है। अब असली परीक्षा इस बात की है कि जमीन अधिग्रहण का मॉडल, मुआवजा दरें और प्रशासनिक मशीनरी तीनों को एक ही फ्रेम में लाकर बिना अड़चन लागू किया जाए। इसी तैयारी के तहत नोएडा प्राधिकरण ने शासन से एक बार फिर अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है, जिसमें 3 तहसीलदार, 6 कानूनगो और लेखपाल शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ तहसीलदारों ने प्राधिकरण में तैनाती के लिए सहमति भी जता दी है।
नोएडा प्राधिकरण का कहना है कि न्यू नोएडा को “एक साथ नहीं, चरण-दर-चरण” विकसित किया जाएगा, ताकि शहर का विस्तार नियंत्रित रहे और इन्फ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार आबादी व निवेश के साथ संतुलन में चल सके। कुल मिलाकर करीब 21,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस मेगा-प्रोजेक्ट का फेज़-वाइज रोडमैप तैयार कर लिया गया है। योजना के मुताबिक, 2027 तक पहले चरण में 3,165 हेक्टेयर विकसित होगा। इसके बाद 2027 से 2032 के बीच 3,798 हेक्टेयर क्षेत्र में विकास कार्य होंगे। तीसरे चरण में 2032 से 2037 के दौरान 5,908 हेक्टेयर पर काम आगे बढ़ेगा, जबकि अंतिम और सबसे बड़े चरण में 2037 से 2041 के बीच 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। Noida News