नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एलपीजी संकट का असर, कई फैक्ट्रियों में उत्पादन हुआ धीमा
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों और व्यवसायों में उत्पादन धीमा हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निदेर्शों के तहत कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगाई गई है।

Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों और व्यवसायों में उत्पादन धीमा हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निदेर्शों के तहत कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इससे जिले की हजारों औद्योगिक इकाइयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाई है।
औद्योगिक इकाइयों पर प्रभाव
नोएडा में लगभग चार लाख कनेक्शन धारक हैं, जबकि 35 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां गैस पर निर्भर हैं। पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कई उद्योग उत्पादन के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं। गैस की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है और कुछ स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है।
होटल और कैटरिंग कारोबार में मुश्किलें
कॉमर्शियल एलपीजी की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग पर भी पड़ रहा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि गैस की कमी के कारण रसोई संचालन में कठिनाइयाँ हो रही हैं। कुछ प्रतिष्ठान अन्य स्रोतों से गैस खरीद कर काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
कालाबाजारी और प्रशासन की सतर्कता
बाजार में बढ़ती सिलेंडर कालाबाजारी के चलते जिला प्रशासन ने विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अऊट वित्त एवं राजस्व अतुल कुमार के नेतृत्व में चार टीमों का गठन किया गया है, जो गैस की आपूर्ति और कालाबाजारी पर नजर रख रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में सिलेंडर 3,500 से 5,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। फिलहाल प्रशासन ने केवल आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति की अनुमति दी है।
Noida News: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों और व्यवसायों में उत्पादन धीमा हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निदेर्शों के तहत कॉमर्शियल सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इससे जिले की हजारों औद्योगिक इकाइयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाई है।
औद्योगिक इकाइयों पर प्रभाव
नोएडा में लगभग चार लाख कनेक्शन धारक हैं, जबकि 35 हजार से अधिक एमएसएमई इकाइयां गैस पर निर्भर हैं। पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सिलिकॉन मैन्युफैक्चरिंग और अन्य कई उद्योग उत्पादन के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं। गैस की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है और कुछ स्थानों पर काम पूरी तरह रुक गया है।
होटल और कैटरिंग कारोबार में मुश्किलें
कॉमर्शियल एलपीजी की कमी का असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग पर भी पड़ रहा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों ने बताया कि गैस की कमी के कारण रसोई संचालन में कठिनाइयाँ हो रही हैं। कुछ प्रतिष्ठान अन्य स्रोतों से गैस खरीद कर काम चला रहे हैं, जबकि कुछ को ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
कालाबाजारी और प्रशासन की सतर्कता
बाजार में बढ़ती सिलेंडर कालाबाजारी के चलते जिला प्रशासन ने विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अऊट वित्त एवं राजस्व अतुल कुमार के नेतृत्व में चार टीमों का गठन किया गया है, जो गैस की आपूर्ति और कालाबाजारी पर नजर रख रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में सिलेंडर 3,500 से 5,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। फिलहाल प्रशासन ने केवल आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं जैसे अस्पताल, सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस आपूर्ति की अनुमति दी है।












