इस दौरान युवराज मेहता नोएडा के एक कवि के सपने में आया। युवराज मेहता ने नोएडा के कवि को अपनी मौत का पूरा सच बताया है। उसी सच के आधार पर युवराज मेहता की कविता प्रकाश में आई है।

Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 में हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत बहुत बड़ा विषय बन गई है। नोएडा के इस लाड़ले इंजीनियर की मौत सरकारी सिस्टम के पूरी तरह फेल हो जाने का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस दौरान युवराज मेहता नोएडा के एक कवि के सपने में आया। युवराज मेहता ने नोएडा के कवि को अपनी मौत का पूरा सच बताया है। उसी सच के आधार पर युवराज मेहता की कविता प्रकाश में आई है।
रात के उस पहर,
जब नींद भी सवाल पूछने लगे,
मैं आया था तुम्हारे सपने में—
मैं युवराज हूँ
हाँ, वही
जिसकी मौत अब
टीवी डिबेट और ब्रेकिंग न्यूज़ है।
कवि,
मेरी कहानी लिख देना,
क्योंकि मरने के बाद भी
मैं चुप नहीं रह सका।
मैं तो बस
एक इंजीनियर था—
जो सपनों की इमारत
ईंटों से नहीं,
उम्मीदों से खड़ी कर रहा था।
नोएडा के सेक्टर-150 में
एक गहरा गढ्डा था,
लोग कहते हैं
वहीं सब खत्म हो गया,
पर सच यह है—
मेरी जिदगी
अभी शुरू भी नहीं हुई थी।
दिन में काम,
रात में भविष्य की चिंता,
पिता के फोन पर
"सब ठीक है"
कहकर
मैं हर रोज़
खुद से झूठ बोलता रहा।
कवि,
कुछ दर्द ऐसे होते हैं
जो सोशल मीडिया पर नहीं लिखे जाते,
कुछ आँसू ऐसे होते हैं
जो प्रोफाइल फोटो में नहीं दिखते।
लोग पूछते हैं—
मेरी मौत कैसे हुई?
काश कोई यह पूछता—
"तू इतना अकेला कब हो गया?"
मैं गिरा नहीं था,
मुझे कोहरे ने गिराया —
अपेक्षाओं की ऊँचाई से
और उस सिस्टम से
जो इंसान को
परफॉर्मेंस मशीन बना देता है।
मेरी मौत पर
मोमबत्तियाँ जलीं,
हैशटैग चले,
बहसें हुईं—
पर कवि,
मेरी तरह
कितने युवराज
आज भी चुपचाप
सिस्टम से लड़ रहे हैं?
मेरे पिता को लिख देना—
मैं कमज़ोर नहीं था,
मैं बस
बहुत थक गया था।
और इस देश से कहना—
सिस्टम की सफलता पर
जनता की खामोशी को
कमज़ोरी मत समझना,
क्योंकि कई बार
खामोशी ही
आखिऱी चीख होती है।
इतना कहकर
मैं लौट गया,
पर मेरी आवाज़
तुम्हारे शब्दों में
जिंदा रहनी चाहिए—
क्योंकि
मैं युवराज हूँ,
और मेरी मौत
सिर्फ एक खबर नहीं,
एक चेतावनी है। Noida News