नोएडा सेक्टर-118 के ‘फुरसत के पल’ कैफे पर पुलिस की कार्रवाई के बाद भी कथित अवैध गतिविधियां जारी रहने के आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Noida News : नोएडा शहर के एक थाने की पुलिस ने 8 सितंबर 2026 की देर रात (बीती रात) ‘‘राम नाम की लूट’’ वाला पुलिस का असली चाल, चरित्र तथा चलन उजागर कर दिया है। यह भी कहा जा सकता है कि नोएडा पुलिस किसी इतने ‘‘बड़े’’ दबाव में थी कि चाहते हुए भी नोएडा पुलिस को रात के अंधेरे में घुटनों के बल बैठना पड़ा। नोएडा पुलिस की मजबूरी या ‘‘राम नाम की लूट’’ में हिस्सेदारी है इस विषय पर अगले समाचार में जानकारी दी जाएगी।
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आपको बता दें कि यहां हम जिस ‘‘राम नाम की लूट’’ की बात कर रहे हैं वह पूरा मामला नोएडा शहर के सेक्टर-118 में ‘‘फुरसत के पल’’ नामक कैफे वाले प्रकरण से जुड़ा हुआ है। चेतना मंच ने 8 सितंबर 2026 को इस मामले में स्टिंग ऑप्रेशन करके एक बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद सेक्टर-118 क्षेत्र के थाने वाली (थाना सेक्टर-113) पुलिस सक्रिय हुई। नोएडा के सेक्टर-113 थाने की पुलिस ने ‘‘फुरसत के पल’’ के नाम से चल रहे नशे के अवैध धंधे के अड्डे पर छापा मारा। छापेमारी से उस अड्डे पर हडक़ंप मच गया। इस बीच इस अवैध अड्डे के कर्ताधर्ता फरार हो गए। इस फरारी के बीच नोएडा के सेक्टर-113 थाने की पुलिस ने अड्डे को अंदर से पूरी तरह खाली कराकर यह ‘‘दिखावा’’ कर दिया कि इस अवैध अड्डे को बंद करा दिया गया है। चेतना मंच की टीम के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं कि नोएडा के सेक्टर-113 थाने की पुलिस जैसे ही उस अड्डे के पास से वापस आई तो अड्डे के संचालक महंगी-महंगी कारों से फिर अपने अड्डे पर पहुंच गए। अड्डे पर पहुंचकर संचालकों ने अपना अवैध कारोबार पूरी रात पहले की तरह से चलाया। Noida News :
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नोएडा के सेक्टर-118 के ‘फुरसत के पल’ कैफे को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच नोएडा पुलिस ने 8 सितंबर की देर रात में खुद कार्रवाई करते हुए बदनाम कैफे को खाली करा दिया। रात 12 बजे के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कैफे को बंद कराया। यानी जिन सवालों को लेकर लगातार हमारी टीम रिपोर्टिंग कर रही थी, उस पर अब पुलिस की कार्रवाई दिखाई दी है। लेकिन असली सवाल अभी बाकी है। क्योंकि पिछले कई दिनों से यही सामने आ रहा था कि पुलिस कैफे को बंद कराती है और उसके बाद दोबारा कैफे खुल जाता है। अब पांचवें दिन पुलिस ने खुद देर रात पहुंचकर कैफे बंद कराया है। तो क्या अब आगे भी पुलिस देर रात इस कैफे को खुलने नहीं देगी? क्या नियमों का लगातार पालन कराया जाएगा? या फिर यह कार्रवाई महज एक-दो दिन की खानापूर्ति बनकर रह जाएगी? ये इसलिए भी बड़ा सवाल है क्योंकि मामला सिर्फ एक रात कैफे बंद कराने का नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और कानून के पालन का है। नोएडा की पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह बेहतर कानून-व्यवस्था को लेकर हमेशा जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करती हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि कार्रवाई सिर्फ कैमरे या शिकायत तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई दे। फिलहाल पांचवें दिन पुलिस की कार्रवाई हुई है। अब देखना होगा कि आने वाली रातों में भी पुलिस इसी तरह सख्ती बरकरार रखती है या फिर कुछ दिनों बाद वही कैफे फिर देर रात तक खुलता नजर आएगा। खबर का असर हुआ हैज् लेकिन कार्रवाई कितनी टिकाऊ है, इसका असली इम्तिहान अब शुरू हुआ है। Noida News :
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