LIVE NEWS: युवराज की मौत के मामले में पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
यह एफआईआर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक मामला अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरणीय और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आ गया है।

Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। नोएडा पुलिस ने इस केस में दूसरी एफआईआर दर्ज करते हुए पांच लोगों को नामजद किया है। यह एफआईआर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक मामला अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरणीय और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आ गया है।
लंबे समय से भरा पड़ा था पानी
जांच में सामने आया है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां 2021 से खुदाई के बाद गड्ढा पानी से भरा पड़ा था। आरोप है कि बैरिकेडिंग नहीं थी, न ही कोई चेतावनी बोर्ड/सुरक्षा संकेत लगाए गए थे। निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और जल निकासी को लेकर की गई कथित लापरवाही को ही दूसरी एफआईआर का आधार बनाया गया है। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में ऐसे निर्माण स्थलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर अब सवाल तेज हो गए हैं।
दूसरी FIR में कौन-कौन नामजद?
नई एफआईआर में पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों(अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार) को सीधे तौर पर नामजद किया है। बताया जा रहा है कि ये सभी उसी प्लॉट/प्रोजेक्ट की गतिविधियों से जुड़े हैं, जहां यह हादसा हुआ। जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि मौके पर किसकी जिम्मेदारी क्या थी और सुरक्षा मानकों के पालन में किस स्तर पर चूक हुई। इस बीच, अभय कुमार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि बाकी नामजद आरोपियों की भूमिका और जवाबदेही तय करने के लिए आगे की पूछताछ और दस्तावेजी जांच तेज कर दी गई है।
सूरजपुर कोर्ट का सख्त संदेश
सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला न्यायालय का रुख बेहद सख्त दिखा। अदालत ने जांच एजेंसियों को स्पष्ट दिशा देते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ औपचारिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रह सकता जांच में जवाबदेही की सीधी पहचान जरूरी है। कोर्ट ने तीन बुनियादी सवालों को जांच का कोर प्वाइंट बताते हुए पूछा: टूटी नाली के लिए जिम्मेदार कौन, मौके पर बैरिकेडिंग/चेतावनी संकेत क्यों नहीं लगाए गए, और जब शिकायतें लंबे समय से सामने थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
गिरफ्तार बिल्डर कोर्ट में पेश
पुलिस ने युवराज मेहता की मौत के मामले में बिल्डर अभय कुमार को पहले गिरफ्तार किया था। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट ने पुलिस को छह दिन का वक्त देते हुए कहा है कि अगली सुनवाई में गिरफ्तारी और केस से जुड़े सबूत पेश किए जाएं। युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पहले दर्ज केस में एमजेड विजटाउन और लोटस ग्रीन से जुड़े पक्षों का नाम सामने आया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार लोटस ग्रीन से जुड़ा एक बिल्डर अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए नोएडा और आसपास के इलाकों में टीमों को लगाया गया है और लगातार छापेमारी की जा रही है।
नोएडा प्राधिकरण पर भी दबाव
इस पूरे मामले में SIT की जांच के बीच नोएडा प्राधिकरण भी सवालों के घेरे में है। अधिकारियों ने बुधवार को SIT द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब तैयार करने के लिए बैठकों का दौर चला। इस प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाया जा चुका है। संकेत हैं कि आने वाले दिनों में SIT रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों तक कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। Noida News
Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। नोएडा पुलिस ने इस केस में दूसरी एफआईआर दर्ज करते हुए पांच लोगों को नामजद किया है। यह एफआईआर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक मामला अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरणीय और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में भी आ गया है।
लंबे समय से भरा पड़ा था पानी
जांच में सामने आया है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां 2021 से खुदाई के बाद गड्ढा पानी से भरा पड़ा था। आरोप है कि बैरिकेडिंग नहीं थी, न ही कोई चेतावनी बोर्ड/सुरक्षा संकेत लगाए गए थे। निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और जल निकासी को लेकर की गई कथित लापरवाही को ही दूसरी एफआईआर का आधार बनाया गया है। नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में ऐसे निर्माण स्थलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर अब सवाल तेज हो गए हैं।
दूसरी FIR में कौन-कौन नामजद?
नई एफआईआर में पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों(अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार) को सीधे तौर पर नामजद किया है। बताया जा रहा है कि ये सभी उसी प्लॉट/प्रोजेक्ट की गतिविधियों से जुड़े हैं, जहां यह हादसा हुआ। जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि मौके पर किसकी जिम्मेदारी क्या थी और सुरक्षा मानकों के पालन में किस स्तर पर चूक हुई। इस बीच, अभय कुमार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि बाकी नामजद आरोपियों की भूमिका और जवाबदेही तय करने के लिए आगे की पूछताछ और दस्तावेजी जांच तेज कर दी गई है।
सूरजपुर कोर्ट का सख्त संदेश
सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला न्यायालय का रुख बेहद सख्त दिखा। अदालत ने जांच एजेंसियों को स्पष्ट दिशा देते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ औपचारिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रह सकता जांच में जवाबदेही की सीधी पहचान जरूरी है। कोर्ट ने तीन बुनियादी सवालों को जांच का कोर प्वाइंट बताते हुए पूछा: टूटी नाली के लिए जिम्मेदार कौन, मौके पर बैरिकेडिंग/चेतावनी संकेत क्यों नहीं लगाए गए, और जब शिकायतें लंबे समय से सामने थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
गिरफ्तार बिल्डर कोर्ट में पेश
पुलिस ने युवराज मेहता की मौत के मामले में बिल्डर अभय कुमार को पहले गिरफ्तार किया था। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट ने पुलिस को छह दिन का वक्त देते हुए कहा है कि अगली सुनवाई में गिरफ्तारी और केस से जुड़े सबूत पेश किए जाएं। युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पहले दर्ज केस में एमजेड विजटाउन और लोटस ग्रीन से जुड़े पक्षों का नाम सामने आया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार लोटस ग्रीन से जुड़ा एक बिल्डर अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए नोएडा और आसपास के इलाकों में टीमों को लगाया गया है और लगातार छापेमारी की जा रही है।
नोएडा प्राधिकरण पर भी दबाव
इस पूरे मामले में SIT की जांच के बीच नोएडा प्राधिकरण भी सवालों के घेरे में है। अधिकारियों ने बुधवार को SIT द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब तैयार करने के लिए बैठकों का दौर चला। इस प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाया जा चुका है। संकेत हैं कि आने वाले दिनों में SIT रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों तक कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। Noida News












