नोएडा के नागरिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के आंदोलन को देश के हित में बताते हुए नोएडा के नागरिकों की तरफ से समर्थन देने की घोषणा की है।

नोएडा शहर के बुद्धिजीवी समाज ने एक बहुत बड़ा फैसला किया है। नोएडा वालों ने बड़ा फैसला करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के द्वारा किए जा रहे आंदोलन का खुला समर्थन किया है। नोएडा के नागरिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के आंदोलन को देश के हित में बताते हुए नोएडा के नागरिकों की तरफ से समर्थन देने की घोषणा की है। नोएडा के बुद्धिजीवी वर्ग ने नोएडा शहर में एक बैठक करके CJP को समर्थन देने का बड़ा फैसला किया है।
नोएडा जन कल्याण समिति के प्रवक्तार आर.पी. सिंह ने CJP को समर्थन देने की जानकारी दी है। नोएडा जन कल्याण समिति के प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने चेतना मंच को बताया कि नोएडा में सक्रिय बुद्धिजीवी समाज के नागरिकों की एक बैठक नोएडा के सेक्टर-27 में हुई। इस बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा जंतर-मंतर पर दिए जा रहे धरने का समर्थन करने का फैसला लिया गया। बैठक के बाद नोएडा के नागरिक सीधे दिल्ली में जंतर-मंतर पर पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने नोएडा के नागरिकों के समर्थन का पत्र कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को सौंपा। इस पत्र में नोएडा की तरफ से पूरे समर्थन तथा सहयोग का वायदा किया गया है।
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आपको बता दें कि नोएडा के नागरिकों ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जिस आंदोलन को समर्थन दिया है वह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है। यहां यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। आंदोलन को देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे भारतीयों और समर्थकों का भी समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। आंदोलन का केंद्र बने जंतर-मंतर पर हर दिन नए समूह पहुंच रहे हैं और प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है। इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक हैं जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि उसका आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा है। पार्टी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परीक्षा संबंधी विवादों और कथित पेपर लीक के मामलों पर सरकार ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है। आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं। रिपोर्टों के अनुसार उनके वजन में कई किलोग्राम की कमी आई है तथा ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर में भी गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और समर्थकों ने सरकार से उनकी मांगों पर बातचीत शुरू करने की अपील की है।
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आंदोलन में दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, लद्दाख और अन्य राज्यों से छात्र, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक तथा विभिन्न संगठनों के लोग पहुंच रहे हैं। ष्टछ्वक्क का दावा है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से आंदोलन के समर्थन में अभियान चला रहे हैं। आंदोलन को कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी मिलने लगा है। कुछ विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जता चुके हैं। इस दौरान सरकार से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने और आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करने की मांग भी उठाई गई। जंतर-मंतर का यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। आंदोलन से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और हैशटैग तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े कुछ वीडियो और तस्वीरों को लेकर विवाद भी सामने आया जिन पर CJP नेतृत्व ने अपनी सफाई दी और कहा कि इससे आंदोलन के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
अब तक केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन की सभी मांगों पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। हालांकि आंदोलनकारी लगातार सरकार से औपचारिक वार्ता शुरू करने और अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उधर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और समर्थकों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन को इसी तरह देशभर और प्रवासी भारतीयों का समर्थन मिलता रहा तो आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव और बढ़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की अगली रणनीति और सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर टिकी हुई हैं।
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