लड़की को शिकायत करने पर नौकरी से निकाल दिया गया और बाद में जांच के दौरान कंपनी कार्यालय पहुंचने पर उनके साथ फिर से कथित बदसलूकी की गई।

Noida News: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले से एक निजी हेल्थकेयर कंपनी से जुड़ा कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनके साथ पहले अभद्र और अपमानजनक व्यवहार किया गया, शिकायत करने पर नौकरी से निकाल दिया गया और बाद में जांच के दौरान कंपनी कार्यालय पहुंचने पर उनके साथ फिर से कथित बदसलूकी की गई। इस मामले में सेक्टर-142 थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता (पहचान छिपाने के लिए नाम परिवर्तित, "स्वरा") के अनुसार वह अस्पतालों में स्टेंट सप्लाई करने वाली इन्वॉल्यूशन हेल्थकेयर कंपनी में रीजनल बिजनेस मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं।
उनका आरोप है कि मई 2025 में कंपनी के प्रबंध निदेशक ने फोन पर उनसे अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा उनके चरित्र पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद उन्होंने कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी।
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पीड़िता का कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय कंपनी के अधिकारियों ने उनसे इस्तीफा देने का दबाव बनाया। जब उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया तो कुछ समय बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
DM से शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पीड़िता ने मामले की शिकायत गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से की। शिकायत को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने इसे जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO) के पास भेज दिया, जहां कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH) अधिनियम के तहत जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान कंपनी कार्यालय में धक्का देने का आरोप
पीड़िता के अनुसार 29 जून 2026 को जिला प्रोबेशन अधिकारी जितेंद्र मौर्य और उनकी सहकर्मी उन्हें जांच के सिलसिले में कंपनी के कार्यालय लेकर पहुंचे।
आरोप है कि कार्यालय पहुंचते ही कंपनी के अधिकारी राजीव शर्मा ने उन्हें कार्यालय में प्रवेश करने से रोकते हुए उनकी छाती पर हाथ मारकर धक्का दिया और अंदर जाने से मना कर दिया।
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पीड़िता का कहना है कि इस घटना से वह स्तब्ध रह गईं और उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने हिरासत में लिया, बाद में छोड़ने का आरोप
पीड़िता के मुताबिक पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर सेक्टर-142 थाने ले गई। उनसे भी लिखित शिकायत ली गई।
हालांकि उनका आरोप है कि उसी रात प्रभावशाली लोगों के दबाव में आरोपी को छोड़ दिया गया। साथ ही, FIR दर्ज कराने के लिए भी उन्हें कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाने पड़े।
4 जुलाई को दर्ज हुई FIR
पीड़िता का कहना है कि लगातार प्रयासों के बाद 4 जुलाई 2026 को सेक्टर-142 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसके बावजूद आज तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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उनका आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उन्हें लगातार समझौता करने और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें यह भी कहा गया कि समझौता करना उनके भविष्य के लिए बेहतर होगा।
पीड़िता ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़िता का कहना है कि वह पिछले एक वर्ष से अधिक समय से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि शिकायत करने की कीमत उन्हें अपनी नौकरी खोकर चुकानी पड़ी और अब भी उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
पुलिस और कंपनी का पक्ष आना बाकी
इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है या नहीं तथा जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, इस संबंध में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। वहीं कंपनी की ओर से भी इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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