नोएडा के जीपीए फ्लैट विवाद पर बड़ा कदम, हजारों खरीदारों को राहत मिलने की संभावना
कई रेजिडेंशियल को-आॅपरेटिव सोसायटियों में मूल आवंटियों ने बिना लीज डीड कराए बिना ही अपने फ्लैट अन्य लोगों को जीपीए के माध्यम से बेच दिए। परिणामस्वरूप नए खरीदारों को न तो संपत्ति पर पूरा अधिकार मिल पाया और न ही वे बैंक लोन, बिक्री, ट्रांसफर या उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर सके।

Noida News : नोएडा में लंबे समय से जनरल पावर आॅफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए खरीदे गए फ्लैट्स को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। नोएडा के इन फ्लैट्स की लीज डीड अब तक निष्पादित न होने के कारण हजारों लोग कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। इस समस्या के समाधान के लिए नोएडा अथॉरिटी ने एक 8 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।
जीपीए फ्लैट्स क्यों बने परेशानी की वजह?
कई रेजिडेंशियल को-आॅपरेटिव सोसायटियों में मूल आवंटियों ने बिना लीज डीड कराए बिना ही अपने फ्लैट अन्य लोगों को जीपीए के माध्यम से बेच दिए। परिणामस्वरूप नए खरीदारों को न तो संपत्ति पर पूरा अधिकार मिल पाया और न ही वे बैंक लोन, बिक्री, ट्रांसफर या उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर सके। लीज डीड न होने से नोएडा अथॉरिटी को भी राजस्व हानि हो रही थी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सेक्टर-125 स्थित एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड द्वारा पहले से बेचे गए 729 फ्लैट्स की सूची प्राधिकरण को सौंपी गई।
221वीं बोर्ड बैठक में हुआ फैसला
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नियमों का पालन किए बिना फ्लैट्स की बिक्री की गई थी। इस मुद्दे पर नोएडा अथॉरिटी की 221वीं बोर्ड बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन और औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने जीपीए आधारित फ्लैट्स से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक विशेष समिति बनाने के निर्देश दिए।
समिति क्या करेगी?
नई गठित 8 सदस्यीय समिति में ग्रुप हाउसिंग विभाग, मुख्य विधि सलाहकार, वित्त नियंत्रक, विशेष ड्यूटी अधिकारी, योजना विभाग और सिविल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति का मुख्य काम होगा कि जीपीए के जरिए बेचे गए फ्लैट्स की लीज डीड निष्पादन की प्रक्रिया तय करना। अथॉरिटी, सोसायटी और फ्लैट खरीदारों के बीच त्रिपक्षीय समझौते की संभावनाओं पर विचार करना
तथा कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देना।
कब तक मिलेगा समाधान?
सूत्रों के अनुसार समिति को 2 से 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद प्राधिकरण बोर्ड और राज्य सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो 2026 के मध्य तक जीपीए मामलों के लिए स्पष्ट नीति सामने आ सकती है। इस पहल से नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों को न सिर्फ कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, बल्कि उन्हें अपने घरों का वैध मालिकाना हक भी मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मामला जटिल जरूर है, लेकिन समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
Noida News : नोएडा में लंबे समय से जनरल पावर आॅफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए खरीदे गए फ्लैट्स को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। नोएडा के इन फ्लैट्स की लीज डीड अब तक निष्पादित न होने के कारण हजारों लोग कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। इस समस्या के समाधान के लिए नोएडा अथॉरिटी ने एक 8 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।
जीपीए फ्लैट्स क्यों बने परेशानी की वजह?
कई रेजिडेंशियल को-आॅपरेटिव सोसायटियों में मूल आवंटियों ने बिना लीज डीड कराए बिना ही अपने फ्लैट अन्य लोगों को जीपीए के माध्यम से बेच दिए। परिणामस्वरूप नए खरीदारों को न तो संपत्ति पर पूरा अधिकार मिल पाया और न ही वे बैंक लोन, बिक्री, ट्रांसफर या उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर सके। लीज डीड न होने से नोएडा अथॉरिटी को भी राजस्व हानि हो रही थी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सेक्टर-125 स्थित एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड द्वारा पहले से बेचे गए 729 फ्लैट्स की सूची प्राधिकरण को सौंपी गई।
221वीं बोर्ड बैठक में हुआ फैसला
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नियमों का पालन किए बिना फ्लैट्स की बिक्री की गई थी। इस मुद्दे पर नोएडा अथॉरिटी की 221वीं बोर्ड बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन और औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने जीपीए आधारित फ्लैट्स से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक विशेष समिति बनाने के निर्देश दिए।
समिति क्या करेगी?
नई गठित 8 सदस्यीय समिति में ग्रुप हाउसिंग विभाग, मुख्य विधि सलाहकार, वित्त नियंत्रक, विशेष ड्यूटी अधिकारी, योजना विभाग और सिविल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति का मुख्य काम होगा कि जीपीए के जरिए बेचे गए फ्लैट्स की लीज डीड निष्पादन की प्रक्रिया तय करना। अथॉरिटी, सोसायटी और फ्लैट खरीदारों के बीच त्रिपक्षीय समझौते की संभावनाओं पर विचार करना
तथा कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देना।
कब तक मिलेगा समाधान?
सूत्रों के अनुसार समिति को 2 से 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद प्राधिकरण बोर्ड और राज्य सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो 2026 के मध्य तक जीपीए मामलों के लिए स्पष्ट नीति सामने आ सकती है। इस पहल से नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों को न सिर्फ कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, बल्कि उन्हें अपने घरों का वैध मालिकाना हक भी मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मामला जटिल जरूर है, लेकिन समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।












