नोएडा के जीपीए फ्लैट विवाद पर बड़ा कदम, हजारों खरीदारों को राहत मिलने की संभावना

कई रेजिडेंशियल को-आॅपरेटिव सोसायटियों में मूल आवंटियों ने बिना लीज डीड कराए बिना ही अपने फ्लैट अन्य लोगों को जीपीए के माध्यम से बेच दिए। परिणामस्वरूप नए खरीदारों को न तो संपत्ति पर पूरा अधिकार मिल पाया और न ही वे बैंक लोन, बिक्री, ट्रांसफर या उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर सके।

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बैठक करते अधिकारी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Jan 2026 07:03 PM
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Noida News : नोएडा में लंबे समय से जनरल पावर आॅफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए खरीदे गए फ्लैट्स को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। नोएडा के इन फ्लैट्स की लीज डीड अब तक निष्पादित न होने के कारण हजारों लोग कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। इस समस्या के समाधान के लिए नोएडा अथॉरिटी ने एक 8 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।

जीपीए फ्लैट्स क्यों बने परेशानी की वजह?

कई रेजिडेंशियल को-आॅपरेटिव सोसायटियों में मूल आवंटियों ने बिना लीज डीड कराए बिना ही अपने फ्लैट अन्य लोगों को जीपीए के माध्यम से बेच दिए। परिणामस्वरूप नए खरीदारों को न तो संपत्ति पर पूरा अधिकार मिल पाया और न ही वे बैंक लोन, बिक्री, ट्रांसफर या उत्तराधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी कर सके। लीज डीड न होने से नोएडा अथॉरिटी को भी राजस्व हानि हो रही थी। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सेक्टर-125 स्थित एयरफोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड द्वारा पहले से बेचे गए 729 फ्लैट्स की सूची प्राधिकरण को सौंपी गई।

221वीं बोर्ड बैठक में हुआ फैसला

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नियमों का पालन किए बिना फ्लैट्स की बिक्री की गई थी। इस मुद्दे पर नोएडा अथॉरिटी की 221वीं बोर्ड बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे चेयरमैन और औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने जीपीए आधारित फ्लैट्स से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक विशेष समिति बनाने के निर्देश दिए।

समिति क्या करेगी?

नई गठित 8 सदस्यीय समिति में ग्रुप हाउसिंग विभाग, मुख्य विधि सलाहकार, वित्त नियंत्रक, विशेष ड्यूटी अधिकारी, योजना विभाग और सिविल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति का मुख्य काम होगा कि जीपीए के जरिए बेचे गए फ्लैट्स की लीज डीड निष्पादन की प्रक्रिया तय करना। अथॉरिटी, सोसायटी और फ्लैट खरीदारों के बीच त्रिपक्षीय समझौते की संभावनाओं पर विचार करना

तथा कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देना।

कब तक मिलेगा समाधान?

सूत्रों के अनुसार समिति को 2 से 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद प्राधिकरण बोर्ड और राज्य सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो 2026 के मध्य तक जीपीए मामलों के लिए स्पष्ट नीति सामने आ सकती है। इस पहल से नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों को न सिर्फ कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, बल्कि उन्हें अपने घरों का वैध मालिकाना हक भी मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि मामला जटिल जरूर है, लेकिन समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

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नोएडा में 10 हजार फ्लैट खरीदारों को राहत, रजिस्ट्री की बाधा हुई समाप्त

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े भूखंडों पर लगी रोक हटाने को मंजूरी दे दी गई, जिससे लंबे समय से अटकी करीब 10 हजार आवासीय फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। प्राधिकरण के इस फैसले के बाद संबंधित बिल्डरों को अपने लेआउट और नक्शे स्वीकृत कराने की अनुमति मिल जाएगी।

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रियल स्टेट के फ्लैट
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Jan 2026 02:32 PM
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Noida News : नोएडा प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर रियल एस्टेट, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ेगा। बैठक में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े भूखंडों पर लगी रोक हटाने को मंजूरी दे दी गई, जिससे लंबे समय से अटकी करीब 10 हजार आवासीय फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। प्राधिकरण के इस फैसले के बाद संबंधित बिल्डरों को अपने लेआउट और नक्शे स्वीकृत कराने की अनुमति मिल जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय से उन हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो कई वर्षों से अपने फ्लैट की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों का पालन अनिवार्य

नोएडा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें पूरी तरह लागू रहेंगी। बिल्डरों को निर्माण सुरक्षा मानकों, खेल सुविधाओं के विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़ी 20 से अधिक शर्तों का पालन करना होगा। शेष धनराशि जमा करने और खेल सुविधाएं विकसित करने के बाद ही परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।

यूनिफाइड पॉलिसी में किया गया संशोधन

बोर्ड बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के लिए लागू यूनिफाइड पॉलिसी में बदलाव को भी मंजूरी दी गई। संशोधित नीति के तहत 800 वर्ग मीटर तक के छोटे भूखंडों और दुकानों के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब नए उद्यमियों को आवेदन के समय आयकर रिटर्न, पूंजी विवरण और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बाध्यता नहीं होगी। नई व्यवस्था के अनुसार अब दादा-दादी और नाना-नानी से प्राप्त संपत्तियों पर ट्रांसफर शुल्क नहीं देना होगा। इससे आम नागरिकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आसान होगी।

शहर की लॉजिस्टिक व्यवस्था पर फोकस

नोएडा में सिटी लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूत करने के लिए भी एक विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि भारी वाहनों को ट्रैफिक जाम में फंसे बिना औद्योगिक इकाइयों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। इस संबंध में स्कूल आॅफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी रुड़की द्वारा प्रेजेंटेशन दिया गया है, जिसके आधार पर एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन किया जाएगा। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों के तहत चिन्हित 57 परियोजनाओं में से अब तक 36 को राहत मिल चुकी है। प्राधिकरण अधिकारियों का मानना है कि इन सभी फैसलों से रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिलेगी, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और नोएडा में व्यापार व औद्योगिक विकास को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

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नोएडा बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष पर फर्जी डिग्री का आरोप, मुकदमा दर्ज

उन पर आरोप है कि उन्होंने जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को योग्य अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किया और इससे पेशेवर व सामाजिक लाभ प्राप्त किया। इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

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मनोज भाटी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar04 Jan 2026 01:41 PM
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Noida News : उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में बार एसोसिएशन के हाल ही में निर्वाचित अध्यक्ष मनोज भाटी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों का सहारा लेकर स्वयं को योग्य अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत किया और इससे पेशेवर व सामाजिक लाभ प्राप्त किया। पुलिस के अनुसार, इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जाली दस्तावेज तैयार करना और उनका उपयोग करना) सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला लगभग एक सप्ताह पहले दर्ज हुआ था, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।

अध्यक्ष चुने जाने के बाद सामने आया मामला

जानकारी के मुताबिक, मनोज भाटी के बार एसोसिएशन अध्यक्ष पद पर चुने जाने के कुछ ही समय बाद यह प्रकरण उजागर हुआ। इस घटनाक्रम के बाद अधिवक्ता समुदाय और प्रशासनिक हलकों में चचार्ओं का दौर शुरू हो गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पहले भी संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोपों को बताया साजिश

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज भाटी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह मुकदमा उनके खिलाफ राजनीतिक और व्यक्तिगत दुर्भावना के तहत दर्ज कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सामाजिक सक्रियता और पेशेवर प्रभाव से कुछ लोग असहज थे, जिसके चलते उन्हें फंसाने की कोशिश की गई। साथ ही उन्होंने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही है।

जमानत के लिए अदालत का रुख

इस मामले में गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अदालत में जमानत याचिका दायर की गई है। वहीं, बार एसोसिएशन के सचिव शोभाराम के नाम से जिला न्यायालय में अंतरिम जमानत हेतु प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला राजनीतिक विरोधियों के दबाव में दर्ज कराया गया और इससे मनोज भाटी को मानसिक व सामाजिक क्षति पहुंची है। यह प्रार्थनापत्र 3 जनवरी को न्यायालय में दाखिल किया गया। नॉलेज पार्क थाना पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि कराई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

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