कौन हैं IAS कृष्णा करुणेश, जिन्हें सौपीं गई है नोएडा प्राधिकरण की कमान

नोएडा प्राधिकरण ने IAS कृष्णा करुणेश (2011 बैच) को नोएडा अथॉरिटी का नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे।

IAS कृष्णा करुणेश
IAS कृष्णा करुणेश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Jan 2026 02:56 PM
bookmark

Noida News : नोएडा प्राधिकरण से पूर्व सीईओ डॉ लोकेश एम के तबादले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण की कमान 2011 बैच के IAS कृष्णा करुणेश को सौपीं है। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। युवराज मेहता मामले के बाद तत्कालीन CEO लोकेश एम को पद से हटाए जाने के बाद यह नियुक्ति नोएडा प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व परिवर्तन के तौर पर देखी जा रही है। नोएडा शहर में सड़क सुरक्षा, त्वरित रेस्क्यू और जवाबदेही तय करने को लेकर चल रही बहस के बीच नोएडा अथॉरिटी को नया चेहरा मिला है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह बदलाव?

नोएडा में युवराज मेहता की मौत के बाद से प्रशासनिक निर्णयों में देरी, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े हुए। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण के नेतृत्व में बदलाव को संदेश साफ माना जा रहा है कि प्राधिकरण अब फील्ड-लेवल पर सुधार और कड़ी मॉनिटरिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। नोएडा प्राधिकरण के नए CEO के तौर पर IAS कृष्णा करुणेश के सामने चुनौती होगी कि नोएडा में सड़क सुरक्षा, शिकायत निस्तारण और परियोजनाओं की निगरानी को लेकर प्राधिकरण की कार्यशैली में ठोस बदलाव दिखे।

नोएडा के भीतर से ही तैयार हुआ नया CEO

मूल रूप से बिहार के रहने वाले IAS कष्णा करुणेश का प्रशासनिक सफर उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों से होकर गुजरा है। यही वजह है कि नोएडा जैसे तेजी  से बढ़ते शहर में उनकी तैनाती को व्यवस्था सुधार, अनुशासन और तेज निर्णय क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। अब तक की तैनाती में वह गोरखपुर में जिलाधिकारी (DM), कुशीनगर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, गाजियाबाद में SDM और CDO जैसी जिम्मेदार भूमिकाओं में रहे हैं, जबकि हापुड़ और बलरामपुर में भी जिला स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। खास बात यह है कि नोएडा की कमान संभालने से पहले वह नोएडा प्राधिकरण में ACEO के तौर पर ही काम कर रहे थे।

कैसा है कृष्णा करुणेश का ट्रैक रिकॉर्ड?

IAS कृष्णा करुणेश की छवि एक ऐसे अफसर की रही है जो लापरवाही पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटते। 2022 में गोरखपुर के DM रहते हुए उन्होंने काम में ढिलाई बरतने वाले 9 लेखपालों को एक साथ निलंबित कर प्रशासनिक गलियारों में साफ संदेश दिया था कि जिम्मेदारी तय होगी और जवाब भी देना पड़ेगा। इसी वजह से उन्हें एक्शन-ओरिएंटेड, तेज-तर्रार और परिणाम देने वाले अधिकारियों की श्रेणी में रखा जाता है। शैक्षणिक स्तर पर भी उनका प्रोफाइल मजबूत माना जाता है। उन्होंने MA (पोस्ट ग्रेजुएशन) के साथ LLB की डिग्री भी हासिल की है। नोएडा जैसे शहर में, जहां शहरी विकास, नियम-कानून, परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही बड़े मुद्दे रहते हैं, यह बैकग्राउंड उनके फैसलों को प्रशासनिक मजबूती देने वाला माना जा रहा है। Noida News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

बड़ी खबर : कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया

निर्देशों के अनुसार IAS कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का कार्यभार सौंपा गया है। 2011 बैच के आइएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। वह गाजियाबाद में एसडीएम एवं मुख्य विकास अधिकारी के पद पर भी रहे हैं।

कृष्ण करुणेश
कृष्ण करुणेश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Jan 2026 01:41 PM
bookmark

Noida News : नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ए सीईओ कृष्ण करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीईओ बनाया गया है l लखनऊ से इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं l निर्देशों के अनुसार IAS कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का कार्यभार सौंपा गया है। 2011 बैच के आइएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। वह गाजियाबाद में एसडीएम एवं मुख्य विकास अधिकारी के पद पर भी रहे हैं।

हापुड़ व बलरामपुर में भी रह चुके हैं डीएम

हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। जनवरी 2021 से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

हापुड़ और बलरामपुर में डीएम के तौर पर निभाई बड़ी जिम्मेदारी

वह हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी रह चुके हैं। दोनों जिलों में उन्होंने कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। यही वजह है कि नोएडा-एनसीआर के प्रशासनिक ढांचे में भी उनके अनुभव को खास महत्व दिया जाता है।

शहरी विकास का लंबा अनुभव

जनवरी 2021 से कृष्णा करुणेश गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, परियोजनाओं की मॉनिटरिंग और नियोजन जैसे क्षेत्रों में उनकी कार्यशैली को प्रभावी माना जाता है जिसका असर नोएडा जैसे शहरों के विकास मॉडल से भी जोड़ा जा रहा है। Noida News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

90 मिनट की देरी पर नोएडा में घमासान, युवराज केस की SIT रिपोर्ट तैयार

सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए

इंजीनियर युवराज
इंजीनियर युवराज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Jan 2026 11:10 AM
bookmark

Noida News : नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत ने शहर की प्रशासनिक तत्परता और रेस्क्यू सिस्टम की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की परतें खोलने के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फैक्ट-फाइंडिंग लगभग पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक भेजने की तैयारी बताई जा रही है। SIT की जांच का केंद्र यही रहा लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई, निर्णय लेने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार कौन की जवाबदेही तय कैसे होगी।

नोएडा अथॉरिटी में देर रात तक चली पूछताछ

शुक्रवार को जांच की रफ्तार और सख्त हुई, जब SIT टीम दोपहर में नोएडा अथॉरिटी के मुख्यालय पहुंची और देर रात तक वहीं जमी रही। सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए। इसी दौरान SDRF के जवान और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ SIT के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि पूछताछ से एक दिन पहले टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया था और ग्राउंड रियलिटी समझने के बाद सीधे नोएडा अथॉरिटी में उन अधिकारियों से जवाब मांगा, जिनके कंधों पर रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक तालमेल की जिम्मेदारी थी।

90 मिनट की देरी पर SIT का फोकस

जांच के दौरान सबसे अहम बिंदु यही रहा कि मदद की गुहार के बावजूद करीब 90 मिनट तक युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका। SIT ने रेस्क्यू में इस्तेमाल किए गए उपकरणों की उपलब्धता, संसाधनों की तैनाती, मौके पर मौजूद टीम के प्रतिक्रिया समय और जवानों के समय पर पानी में न उतरने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई, या फिर निर्णय प्रक्रिया में देरी, गलत आकलन और समन्वय की कमी ने स्थिति को गंभीर बनाया। SIT ने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जवानों के बयान दर्ज किए हैं और उनसे स्पष्ट करने को कहा गया है कि मौके पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया गया, किसने निर्देश दिए और किस स्तर पर निर्णय लेने में देरी हुई। जांच का एक अहम पहलू यह भी रहा कि मौके पर मौजूद अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल में कमी तो नहीं थी और अगर थी, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।

रिपोर्ट सीएम को सौंपने की तैयारी

सूत्रों का दावा है कि SIT ने तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से जुड़े लगभग सभी तथ्य, दस्तावेज और बयान जांच में शामिल कर लिए हैं। अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की तैयारी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। नोएडा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अगर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभागों के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की आशंका भी जताई जा रही है। Noida News

संबंधित खबरें