'लाला पैड' कोयला घोटाला, 10 रुपये का 'जादुई' नोट, ED ने 100 करोड़ की संपत्ति जब्त की
सिंडिकेट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रहा था। इस सिंडिकेट ने 'लाला पैड' नाम का एक फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान सिस्टम बनाया था।

Coal scam :प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कोयला चोरी और अवैध खनन के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत चलाई गई कार्रवाई में एजेंसी ने 'लाला पैड' के नाम से कुख्यात इस घोटाले में 100.44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात इसका अनोखा और 'जादुई' तरीका रहा है, जिसमें एक मात्र 10 रुपये के नोट का इस्तेमाल पुलिस और प्रशासन को 'मैनेज' करने के लिए किया जाता था।
क्या है 'लाला पैड' का पूरा गेम?
जांच में सामने आया है कि अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला एक सिंडिकेट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रहा था। इस सिंडिकेट ने 'लाला पैड' नाम का एक फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान सिस्टम बनाया था। इसके तहत, ट्रक ड्राइवरों को फर्जी पर्चे के साथ 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था। ड्राइवर को इस नोट को ट्रक के नंबर प्लेट के साथ पकड़कर फोटो खींचनी होती थी और वह फोटो सिंडिकेट ऑपरेटर को भेजनी होती थी। इसके बाद वह फोटो व्हाट्सएप के जरिए रास्ते में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। यह फोटो एक 'पास' का काम करती थी, जिसे देखकर अवैध कोयला लदे ट्रकों को बिना रोके गुजरने दिया जाता था या रुकने पर तुरंत छोड़ दिया जाता था।
हवाला का अंडरग्राउंड नेटवर्क
इस रैकेट ने हवाला लेनदेन के लिए भी एक चौंकाने वाला तरीका अपनाया था। लेनदेन के लिए कोड वर्ड के तौर पर 10 रुपये के नोट का 'सीरियल नंबर' इस्तेमाल किया जाता था। पैसे लेने वाला व्यक्ति नोट का सीरियल नंबर भेजता था और दूसरे शहर में मौजूद व्यक्ति को यह नंबर दे दिया जाता था। पैसे लेने वाला व्यक्ति उसी सीरियल नंबर वाला नोट दिखाकर बिना किसी बैंक रिकॉर्ड के कैश ले लेता था।
2,742 करोड़ की अवैध कमाई
ED के अनुसार, सिंडिकेट के रिकॉर्ड और जब्त डिजिटल डेटा से पता चला है कि इस रैकेट ने करीब 2,742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इस पैसे को कई स्टील और आयरन कंपनियों ने अवैध कोयला खरीदने के लिए नकद भुगतान किया। जब्त की गई संपत्तियां शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड के नाम पर हैं, जिनमें जमीन, एफडी और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
एजेंसी ने साफ किया है कि यह मामला कई परतों वाला आर्थिक अपराध है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत का भी संदेह है। इससे पहले 8 जनवरी को कोलकाता और दिल्ली में छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब तक इस मामले में कुल 322.71 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है और आगे की जांच जारी है। Coal scam
Coal scam :प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में कोयला चोरी और अवैध खनन के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत चलाई गई कार्रवाई में एजेंसी ने 'लाला पैड' के नाम से कुख्यात इस घोटाले में 100.44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात इसका अनोखा और 'जादुई' तरीका रहा है, जिसमें एक मात्र 10 रुपये के नोट का इस्तेमाल पुलिस और प्रशासन को 'मैनेज' करने के लिए किया जाता था।
क्या है 'लाला पैड' का पूरा गेम?
जांच में सामने आया है कि अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला एक सिंडिकेट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर रहा था। इस सिंडिकेट ने 'लाला पैड' नाम का एक फर्जी ट्रांसपोर्ट चालान सिस्टम बनाया था। इसके तहत, ट्रक ड्राइवरों को फर्जी पर्चे के साथ 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था। ड्राइवर को इस नोट को ट्रक के नंबर प्लेट के साथ पकड़कर फोटो खींचनी होती थी और वह फोटो सिंडिकेट ऑपरेटर को भेजनी होती थी। इसके बाद वह फोटो व्हाट्सएप के जरिए रास्ते में तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। यह फोटो एक 'पास' का काम करती थी, जिसे देखकर अवैध कोयला लदे ट्रकों को बिना रोके गुजरने दिया जाता था या रुकने पर तुरंत छोड़ दिया जाता था।
हवाला का अंडरग्राउंड नेटवर्क
इस रैकेट ने हवाला लेनदेन के लिए भी एक चौंकाने वाला तरीका अपनाया था। लेनदेन के लिए कोड वर्ड के तौर पर 10 रुपये के नोट का 'सीरियल नंबर' इस्तेमाल किया जाता था। पैसे लेने वाला व्यक्ति नोट का सीरियल नंबर भेजता था और दूसरे शहर में मौजूद व्यक्ति को यह नंबर दे दिया जाता था। पैसे लेने वाला व्यक्ति उसी सीरियल नंबर वाला नोट दिखाकर बिना किसी बैंक रिकॉर्ड के कैश ले लेता था।
2,742 करोड़ की अवैध कमाई
ED के अनुसार, सिंडिकेट के रिकॉर्ड और जब्त डिजिटल डेटा से पता चला है कि इस रैकेट ने करीब 2,742 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इस पैसे को कई स्टील और आयरन कंपनियों ने अवैध कोयला खरीदने के लिए नकद भुगतान किया। जब्त की गई संपत्तियां शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड और गगन फेरोटेक लिमिटेड के नाम पर हैं, जिनमें जमीन, एफडी और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।
एजेंसी ने साफ किया है कि यह मामला कई परतों वाला आर्थिक अपराध है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत का भी संदेह है। इससे पहले 8 जनवरी को कोलकाता और दिल्ली में छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब तक इस मामले में कुल 322.71 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है और आगे की जांच जारी है। Coal scam












