आखिर राजभर ने अखिलेश यादव को चुनाव लड़ने की चुनौती क्यों दी ? उन्होंने सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए 'वो नेता ही क्या, जो चुनाव से भागे ?' जैसी टिप्पणी क्यों की? क्या अखिलेश यादव के चुनाव नहीं लड़ने के बयान से भाजपा और उसके सहयोगी दलों को विपक्ष पर हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है ?

UP News : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिया है। उनके इस संकेत के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर सपा प्रमुख को खुली चुनौती देते हुए कहा कि आखिर वह नेता ही क्या, जो चुनाव से भागे? आपतो बता दें कि , मंगलवार 3 नवंबर 2026 को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव से वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इसे टोटके से जोड़ते हुए कहा कि जब वह चुनाव नहीं लड़ते हैं, तभी मुख्यमंत्री बनते हैं। अखिलेश के इस बयान को लेकर अब सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
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अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया के जरिए उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि अखिलेश यादव अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। राजभर ने चुनौती देते हुए कहा, 'ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? आइये हो जाए दो-दो हाथ।'
राजभर ने अखिलेश यादव के टोटका वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि सपा अध्यक्ष इतना टोना-टोटका मानते हैं। राजभर ने दावा किया कि अखिलेश का बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनना किसी टोटके का परिणाम नहीं था, बल्कि उन्हें विरासत में मिली पार्टी के कारण यह मौका मिला था।
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कैबिनेट मंत्री राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव की राजनीतिक विरासत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब उन्हें लग रहा है कि चुनाव लड़ने पर हार का सामना करना पड़ सकता है, तो वह मैदान छोड़ने की बात कर रहे हैं। राजभर ने कहा कि यह लाल टोपी वालों की सरकार नहीं है, जहां टोना-टोटका के आधार पर प्रदेश चलाया जाता था। उन्होंने नोएडा से लेकर आगरा, अयोध्या और मथुरा का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने ऐसी सरकार को 10 साल पहले ही सत्ता से बाहर कर दिया था।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला जारी रखते हुए कहा कि उन्हें कम से कम किसी एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक हिम्मत दिखानी चाहिए थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनौती मिलने पर अखिलेश डर गए। अपने बयान के आखिर में राजभर ने धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल करते हुए अखिलेश यादव को बाबा विश्वनाथ और काल भैरव का आशीर्वाद लेने की सलाह भी दी। उन्होंने काशी यात्रा के दौरान अखिलेश के कार्यक्रम को लेकर भी कटाक्ष किया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दल लगातार समाजवादी पार्टी को निशाने पर ले रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव भी सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने का बयान राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। राजभर की चुनौती के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा प्रमुख इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और 2027 के चुनाव में उनकी भूमिका किस रूप में सामने आती है।
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