उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह बड़ा राजनीतिक धमाका किया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा की नीति का बड़ा विरोध करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अचानक महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने की घोषणा करके हर किसी को चौंका दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक बड़ा धमाका हुआ है। यह राजनीतिक धमाका महिला आरक्षण के मुद्दे पर हुआ है। उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह बड़ा राजनीतिक धमाका किया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा की नीति का बड़ा विरोध करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अचानक महिला आरक्षण बिल का समर्थन करने की घोषणा करके हर किसी को चौंका दिया है। राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश यादव की नई घोषणा को बड़ा राजनीतिक धमाका बता रहे हैं। विश्लेषकों का मत है कि अखिलेश यादव की ताजा घोषणा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा को बदल सकती है। UP News
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित बिल को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। जिस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी पहले आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाती रही, उसी पर अब अखिलेश यादव ने समर्थन का संकेत देते हुए तीन महत्वपूर्ण शर्तें रख दी हैं। उनके इस बदले रुख को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के विरोध में नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को शामिल करते हुए बिल में जरूरी संशोधन करती है तो सपा इसका समर्थन करेगी। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे सपा के रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। UP News
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महिला आरक्षण बिल पर समर्थन जताते हुए अखिलेश यादव ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। अखिलेश यादव की पहली शर्त है कि महिला आरक्षण में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं के लिए अलग हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की दूसरी शर्त है कि संशोधित आरक्षण व्यवस्था को 2027 के चुनाव से लागू किया जाए। उनकी तीसरी मांग है कि सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाले अन्य प्रावधान भी बिल में शामिल किए जाएं। अखिलेश यादव का कहना है कि केवल महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने की पक्षधर है, लेकिन यह भागीदारी सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए। UP News
अखिलेश यादव के इस बदले रुख पर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा का कहना है कि समाजवादी पार्टी पहले महिला आरक्षण को लेकर अलग रुख रखती थी और अब राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए समर्थन की बात कर रही है। वहीं सपा का दावा है कि उसका रुख नहीं बदला है, बल्कि वह शुरू से ही सामाजिक न्याय के साथ महिला आरक्षण की मांग करती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव का यह बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश है। सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अपने सामाजिक समीकरण को महिला राजनीति से जोडक़र नए वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर भाजपा महिला सशक्तिकरण को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में पेश कर रही है। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। UP News
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