उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में पार्टी एक बार फिर 2014 और 2017 के चुनावी फॉर्मूले को नए सिरे से सक्रिय करने की तैयारी में जुटी है।
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सक्रियता और पार्टी संगठन के साथ उनकी बैठकों को इसी तैयारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि भाजपा उत्तर प्रदेश में एक बार फिर 2014 से 2017 के बीच अपनाई गई चुनावी रणनीति को नए सिरे से सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। भाजपा की इस रणनीति के केंद्र में संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना, जातीय और सामाजिक समीकरणों को समझना तथा केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना शामिल है। अमित शाह को भाजपा की चुनावी रणनीति तैयार करने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने का लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी भूमिका को आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। UP News
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लखनऊ में 30 और 31 अक्टूबर को भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में करीब 2,850 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक के मुख्य वक्ता होंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समापन सत्र को संबोधित करेंगे। बैठक में प्रदेश और केंद्र सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसके अलावा 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों को भी बुलाया गया है। इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन की तैयारियों की समीक्षा करना और नई चुनावी कार्ययोजना तैयार करना है। UP News
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उत्तर प्रदेश में 2014 और 2017 के चुनावों में भाजपा की सफलता के पीछे अमित शाह की संगठनात्मक रणनीति को महत्वपूर्ण माना जाता है। उस समय उन्होंने प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार करने पर जोर दिया था। इस रणनीति के तहत भाजपा ने सवर्ण मतदाताओं के साथ गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समुदायों तक अपनी पहुंच बढ़ाई थी। कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद और राजभर जैसे पिछड़े वर्गों के साथ छोटे क्षेत्रीय दलों को भी संगठनात्मक और चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया गया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीती थीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल को दो सीटें मिली थीं। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीतकर प्रदेश में सरकार बनाई थी। एनडीए की कुल सीटें 325 थीं। UP News
अमित शाह की रणनीति में बूथ प्रबंधन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पन्ना प्रमुख व्यवस्था के जरिए मतदाता सूची के प्रत्येक पन्ने तक संगठन की पहुंच बनाने का प्रयास किया था। अब मिशन-2027 के तहत इसी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी है। बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र संयोजकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय करने के साथ संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा। पार्टी के सामने चुनौती यह भी है कि जिन कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में नाराजगी है, उन्हें फिर से संगठन की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। अमित शाह की बैठकों में स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं और संगठनात्मक कमजोरियों पर चर्चा होने की संभावना है। UP News
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के नतीजों ने भाजपा के सामने नए राजनीतिक समीकरणों की चुनौती खड़ी कर दी थी। समाजवादी पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA के नारे के जरिए अपना सामाजिक आधार बढ़ाने का प्रयास किया। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में भाजपा को 33 सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद भाजपा के लिए अपने पुराने सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक ताकत की समीक्षा करना महत्वपूर्ण हो गया है। यही वजह है कि भाजपा अब गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने पर नए सिरे से ध्यान दे रही है। UP News
भाजपा की चुनावी तैयारियां केवल लखनऊ की प्रदेश कार्यसमिति तक सीमित नहीं रहने वाली हैं। अमित शाह नवंबर में उत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा कर अलग-अलग समीक्षा बैठकें करेंगे। इन क्षेत्रों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, अवध, काशी, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड शामिल हैं। इन बैठकों में स्थानीय नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों से सीधा संवाद कर चुनावी तैयारियों का फीडबैक लेने की योजना है। इसके साथ ही सहयोगी दलों के साथ तालमेल, बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति और कार्यकर्ताओं की नाराजगी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। UP News
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भाजपा के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पार्टी लगातार तीसरी बार प्रदेश की सत्ता में वापसी करने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर विपक्षी दल भी अपने सामाजिक समीकरणों और संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। अमित शाह की चुनावी पाठशाला को इसी व्यापक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। 2014 और 2017 में अपनाई गई रणनीति के कई पुराने पहलुओं को दोबारा लागू करने की कोशिश होगी, लेकिन 2027 की राजनीतिक परिस्थितियां पहले से अलग हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा अपने पुराने संगठनात्मक मॉडल में क्या बदलाव करती है और 2024 के लोकसभा चुनाव में सामने आई चुनौतियों से निपटने के लिए कौन-सी नई रणनीति तैयार करती है। UP News
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