70वां जन्मदिन बना सियासी मंच, मायावती ने दिए बड़े संकेत
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों को सिर्फ चुनावी मौकों पर उठाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का आज 70 वां जन्मदिन है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकते हुए नया सियासी संकेत दिया है। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने पार्टी के पुराने नारे “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” को फिर से केंद्र में रखा और सीधे तौर पर ब्राह्मण व क्षत्रिय समाज को भरोसा दिलाने के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले यादव समाज तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समुदाय और गन्ना किसानों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। मायावती ने कहा कि यदि बसपा सत्ता में लौटती है तो 2007 की तरह हर वर्ग के हितों और अपेक्षाओं पर काम किया जाएगा।
ब्राह्मण-क्षत्रिय को दिया आश्वासन
उत्तर प्रदेश की बदलती चुनावी हवा के बीच मायावती ने इस बार अपनी बात का केंद्र ब्राह्मण समाज को बनाते हुए साफ संदेश दिया कि किसी भी दल के बहकावे में न आएं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों को सिर्फ चुनावी मौकों पर उठाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। बसपा प्रमुख ने भरोसा दिलाया कि अगर उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनती है, तो ब्राह्मणों की आकांक्षाओं को प्राथमिकता मिलेगी और उनके सम्मान-हित से जुड़े फैसले जमीन पर उतारे जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की नीति सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी क्षत्रिय और वैश्य समाज के कल्याण के लिए भी ठोस योजनाएं और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
कैडर को मिला दिशा-निर्देश
मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर अविश्वास जताया, हालांकि इसके साथ उन्होंने पार्टी कैडर से साफ कहा कि 2027 में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा/पार्टी दस्तावेज के नए संस्करण (ब्लू बुक) के विमोचन की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें पार्टी के संघर्ष, उतार-चढ़ाव और कार्यकर्ताओं के लिए दिशा-सूचक बातें दर्ज हैं।
सपा के ‘PDA’ पर तीखा हमला
उत्तर प्रदेश की सियासी जंग में मायावती ने इस बार समाजवादी पार्टी को सीधे निशाने पर लिया और सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) अभियान को महज राजनीतिक दिखावा करार दिया। बसपा प्रमुख ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस प्रकरण का हवाला देते हुए पुराने आरोपों को फिर दोहराया और कहा कि सपा शासनकाल में दलितों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आईं। मायावती का दावा रहा कि सपा की राजनीति वास्तविक सामाजिक न्याय के बजाय चुनिंदा वोट-बैंक के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए व्यापक समाजहित की उसकी बातें जमीन पर टिकती नहीं दिखतीं। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में जनता को नारे नहीं, बल्कि काम और नीयत का हिसाब देखना चाहिए।
जाट समुदाय और गन्ना किसानों के लिए भरोसा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को साधते हुए मायावती ने जाट समुदाय और गन्ना किसानों की तरफ भी साफ संदेश दिया। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा शासनकाल में शिक्षित जाट युवाओं को पुलिस भर्ती में बड़े पैमाने पर अवसर मिले थे और व्यवस्था में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी थी। बसपा प्रमुख ने संकेत दिया कि यदि पार्टी की सत्ता में वापसी होती है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ गन्ना किसानों की भुगतान, लाभकारी व्यवस्था और उनके हितों से जुड़े सवालों को फिर से प्राथमिक एजेंडा बनाया जाएगा। मायावती का कहना था कि बसपा की नीति सिर्फ वादों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाली होगी। खासकर उस क्षेत्र में, जहां किसान और जाट समाज की भूमिका चुनावी नतीजों की दिशा तय करती है।
अन्य बड़े दावे और संदेश
- योजनाओं की नकल का आरोप: मायावती ने कहा कि वर्तमान सरकारें बसपा की पुरानी योजनाओं को नाम बदलकर लागू कर रही हैं।
- अंतिम सांस तक संघर्ष का एलान: उन्होंने दोहराया कि जब तक वह स्वस्थ हैं, दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहेंगी और दबाव में नहीं झुकेंगी।
- स्मारक-प्रतिमाओं का बचाव: उन्होंने दावा किया कि दलित-पिछड़े महापुरुषों को सम्मान दिलाने का काम बसपा सरकारों ने बड़े स्तर पर किया है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का आज 70 वां जन्मदिन है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंकते हुए नया सियासी संकेत दिया है। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने पार्टी के पुराने नारे “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” को फिर से केंद्र में रखा और सीधे तौर पर ब्राह्मण व क्षत्रिय समाज को भरोसा दिलाने के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले यादव समाज तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट समुदाय और गन्ना किसानों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। मायावती ने कहा कि यदि बसपा सत्ता में लौटती है तो 2007 की तरह हर वर्ग के हितों और अपेक्षाओं पर काम किया जाएगा।
ब्राह्मण-क्षत्रिय को दिया आश्वासन
उत्तर प्रदेश की बदलती चुनावी हवा के बीच मायावती ने इस बार अपनी बात का केंद्र ब्राह्मण समाज को बनाते हुए साफ संदेश दिया कि किसी भी दल के बहकावे में न आएं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और उत्पीड़न की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन इन मुद्दों को सिर्फ चुनावी मौकों पर उठाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। बसपा प्रमुख ने भरोसा दिलाया कि अगर उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनती है, तो ब्राह्मणों की आकांक्षाओं को प्राथमिकता मिलेगी और उनके सम्मान-हित से जुड़े फैसले जमीन पर उतारे जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की नीति सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी क्षत्रिय और वैश्य समाज के कल्याण के लिए भी ठोस योजनाएं और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
कैडर को मिला दिशा-निर्देश
मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर अविश्वास जताया, हालांकि इसके साथ उन्होंने पार्टी कैडर से साफ कहा कि 2027 में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए। इसी दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा/पार्टी दस्तावेज के नए संस्करण (ब्लू बुक) के विमोचन की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें पार्टी के संघर्ष, उतार-चढ़ाव और कार्यकर्ताओं के लिए दिशा-सूचक बातें दर्ज हैं।
सपा के ‘PDA’ पर तीखा हमला
उत्तर प्रदेश की सियासी जंग में मायावती ने इस बार समाजवादी पार्टी को सीधे निशाने पर लिया और सपा के ‘PDA’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) अभियान को महज राजनीतिक दिखावा करार दिया। बसपा प्रमुख ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस प्रकरण का हवाला देते हुए पुराने आरोपों को फिर दोहराया और कहा कि सपा शासनकाल में दलितों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आईं। मायावती का दावा रहा कि सपा की राजनीति वास्तविक सामाजिक न्याय के बजाय चुनिंदा वोट-बैंक के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए व्यापक समाजहित की उसकी बातें जमीन पर टिकती नहीं दिखतीं। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में जनता को नारे नहीं, बल्कि काम और नीयत का हिसाब देखना चाहिए।
जाट समुदाय और गन्ना किसानों के लिए भरोसा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को साधते हुए मायावती ने जाट समुदाय और गन्ना किसानों की तरफ भी साफ संदेश दिया। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा शासनकाल में शिक्षित जाट युवाओं को पुलिस भर्ती में बड़े पैमाने पर अवसर मिले थे और व्यवस्था में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी थी। बसपा प्रमुख ने संकेत दिया कि यदि पार्टी की सत्ता में वापसी होती है, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ गन्ना किसानों की भुगतान, लाभकारी व्यवस्था और उनके हितों से जुड़े सवालों को फिर से प्राथमिक एजेंडा बनाया जाएगा। मायावती का कहना था कि बसपा की नीति सिर्फ वादों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाली होगी। खासकर उस क्षेत्र में, जहां किसान और जाट समाज की भूमिका चुनावी नतीजों की दिशा तय करती है।
अन्य बड़े दावे और संदेश
- योजनाओं की नकल का आरोप: मायावती ने कहा कि वर्तमान सरकारें बसपा की पुरानी योजनाओं को नाम बदलकर लागू कर रही हैं।
- अंतिम सांस तक संघर्ष का एलान: उन्होंने दोहराया कि जब तक वह स्वस्थ हैं, दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहेंगी और दबाव में नहीं झुकेंगी।
- स्मारक-प्रतिमाओं का बचाव: उन्होंने दावा किया कि दलित-पिछड़े महापुरुषों को सम्मान दिलाने का काम बसपा सरकारों ने बड़े स्तर पर किया है। UP News












