पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा प्लान, शुरू होगा विशेष अभियान

प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 04:32 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश सरकार गरीबी उन्मूलन के मोर्चे पर एक ठोस और व्यावहारिक पहल की तैयारी में है। सरकार प्रदेश को ‘जीरो पावर्टी’ के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए ऐसा अभियान शुरू करने जा रही है, जिसमें विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सीधे गांवों की जमीनी जरूरतों से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे और उन्हें 10 से 15 ग्राम पंचायतें गोद दी जाएंगी, ताकि चिन्हित निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास पर लगातार, संगठित और परिणाम-आधारित काम हो सके। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत होगी युवा भागीदारी एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र वालंटियर बनकर गांवों में पहुंचेंगे और परिवारों को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सशक्तिकरण से जोड़ने की जिम्मेदारी संभालेंगे। अभियान की शुरुआत लखनऊ से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी और सफल मॉडल सामने आने पर इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा।

निगरानी सिस्टम भी होगा मजबूत

प्रमुख सचिव (नियोजन) और जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में चिन्हित गरीब परिवारों का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। यह सर्वे सिर्फ सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार की जरूरत, क्षमता और उपलब्ध अवसरों का आकलन कर उनके लिए आजीविका बढ़ाने, स्किल ट्रेनिंग दिलाने, रोजगार के रास्ते खोलने और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली ठोस, परिणाम-आधारित कार्ययोजना बनाई जाएगी। अभियान को जमीन पर असरदार बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नोडल शिक्षक तैनात किए जाएंगे, जो कार्यक्रमों की निरंतर मॉनिटरिंग करेंगे और गांवों में चल रही गतिविधियों को दिशा व मार्गदर्शन देकर यह सुनिश्चित करेंगे कि योजनाओं का लाभ सही परिवारों तक पहुंचे और बदलाव साफ नजर आए।

युवाओं को मिलेगी आवेदन में सीधी मदद

उत्तर प्रदेश सरकार की रणनीति है कि जीरो पावर्टी परिवारों के लिए माइक्रो-प्लानिंग के जरिए मदद को टारगेटेड और परिणाम-आधारित बनाया जाए। यानी हर परिवार की आर्थिक स्थिति और जरूरतों के मुताबिक स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट लिंकेंज और रोजगार के ठोस अवसर तय किए जाएंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश के पात्र युवाओं को आवेदन प्रक्रिया में हर स्तर पर सहयोग मिलेगा, ताकि वे किसी भी सरकारी योजना के लाभ से कागजी उलझनों के कारण वंचित न रहें। सरकार नियमित मेंटोरिंग, प्रगति की ट्रैकिंग और फॉलो-अप पर भी खास जोर देगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी योग्य लाभार्थियों तक योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज पहुंचे और परिवार सचमुच गरीबी के दायरे से बाहर निकल सकें।

डीएम स्तर पर होगा एमओयू

उत्तर प्रदेश सरकार इस अभियान को कागजी औपचारिकता में सिमटने नहीं देना चाहती, इसलिए जिला प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत और जवाबदेह समन्वय तंत्र खड़ा किया जाएगा। योजना के तहत जिलाधिकारी स्तर पर एमओयू किए जाएंगे, ताकि जिम्मेदारियां तय हों और काम तय समयसीमा में जमीन पर उतर सके। इसके साथ ही हर तीन महीने त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित कर प्रगति की वास्तविक रिपोर्ट ली जाएगी। इन बैठकों में लक्ष्य बनाम उपलब्धि का आकलन होगा और जहां कमी दिखेगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम तय कर रणनीति को और प्रभावी बनाया जाएगा। UP News

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यूपी दिवस के मौके पर लखनऊ आ सकते हैं भाजपा के दिग्गज नेता, होगा बड़ा आयोजन

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यूपी दिवस उत्सव की अध्यक्षता कर सकते हैं और आयोजन स्थल नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण भी उनके संभावित कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है।

यूपी दिवस-2026 की तैयारी तेज
यूपी दिवस-2026 की तैयारी तेज
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 04:00 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को लेकर लखनऊ में सियासी हलचल के साथ तैयारियों की रफ्तार भी तेज हो गई है। 24 जनवरी को प्रस्तावित राज्य स्तरीय समारोह को इस बार खास बनाने की तैयारी है, क्योंकि कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यूपी दिवस उत्सव की अध्यक्षता कर सकते हैं और आयोजन स्थल नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण भी उनके संभावित कार्यक्रम में शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, दौरे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत शेड्यूल जारी नहीं हुआ है।

पहली बार राष्ट्र प्रेरणा स्थल बनेगा यूपी दिवस का मुख्य मंच

इस बार यूपी दिवस का मुख्य आयोजन पहली बार राष्ट्र प्रेरणा स्थल में प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थल का उद्घाटन किया था। अब उसी परिसर में 24 से 26 जनवरी तक उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के कार्यक्रमों को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है। आयोजन की थीम ‘विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश’ रखी गई है, जिसके तहत प्रदेश की विकास यात्रा, लोक-परंपराओं और नवाचार की झलक एक मंच पर दिखाई जाएगी। सरकार की योजना के अनुसार, कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि राज्यव्यापी सहभागिता सुनिश्चित हो सके। राज्य स्तरीय समारोह के साथ-साथ प्रदेश के सभी जिलों में भी विविध आयोजन होंगे। जिलों में उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा पर आधारित प्रदर्शनियां, सरकारी योजनाओं के स्टॉल, ODOP (एक जनपद-एक उत्पाद) के उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री, GI टैग उत्पादों के ट्रेड शो, और प्रस्तावित ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ की झलक दिखाने वाले फूड-आधारित प्रदर्शन शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा मिशन शक्ति, नवाचार और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने जैसे विषयों पर भी विशेष प्रदर्शनियों की तैयारी की जा रही है।

आयोजन को भव्य बनाने की रणनीति तैयार

प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जिलों के डीएम ने संबंधित विभागों के साथ बैठकें कर कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि यूपी दिवस के आयोजन में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, समय से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और योजनाओं की प्रदर्शनी के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भी प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा जाए, ताकि उत्तर प्रदेश की संस्कृति, क्षमता और विकास-गति की तस्वीर देश-दुनिया के सामने मजबूती से रखी जा सके। UP News

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मजरूह सुल्तानपुरी: उर्दू का कारवाँ, जिसकी गूंज आज भी ज़िंदा है

उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
बार-बार पढ़े जाने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के चुनिंदा शेर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 03:37 PM
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Majrooh Sultanpuri : मजरूह सुल्तानपुरी 20वीं सदी के उन चुनिंदा उर्दू शायरों में शुमार रहे, जिनकी शायरी ने साहित्य और समाज दोनों को नई संवेदना दी। 1 अक्टूबर 1919 को जन्मे और 24 मई 2000 को दुनिया से रुख़्सत हुए मजरूह न सिर्फ़ प्रगतिशील आंदोलन के मजबूत स्वर थे, बल्कि हिंदी सिनेमा में बतौर गीतकार भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में दौर की धड़कन, आम आदमी की पीड़ा और उम्मीद की रोशनी एक साथ दिखाई देती है यही वजह है कि उन्हें उर्दू साहित्य की सबसे असरदार आवाज़ों में गिना जाता है।

‘कारवाँ बनता गया’ वाली पंक्तियाँ बनीं चर्चा का केंद्र

मजरूह सुल्तानपुरी के साहित्यिक योगदान को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सहयोग से सुल्तानपुर के गनपत सहाय कॉलेज में “ग़ज़ल के आइने में मजरूह सुल्तानपुरी” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था । देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों से आए शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने इस आयोजन में भाग लिया और मजरूह के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मजरूह ने उर्दू शायरी को नई ऊँचाई दी और उसे जन-भावनाओं की भाषा बनाया। समिनार की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा रिज़वी ने की, जबकि आयोजन का संयोजन गनपत सहाय कॉलेज की उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. जेबा महमूद ने किया था । इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. अली अहमद फातिमी ने कहा कि मजरूह का जन्म सुल्तानपुर में हुआ था और उनकी शायरी में इस मिट्टी की झलक साफ दिखाई देती है। उन्होंने मजरूह को तरक्कीपसंद शायरी की ऐसी आवाज़ बताया, जिसने उर्दू को नया मुकाम दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मंच से उनकी चर्चित पंक्तियाँ “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया”का उल्लेख भी हुआ, जिसे मजरूह की लोकप्रियता और वैचारिक असर का प्रतीक माना गया।

मजरूह सुल्तानपुरी की टॉप 5 शायरी 

1 - मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,       

लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया। 

2 - कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा,

हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा। 

3 - बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए,

हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते। 

4 - अब सोचते हैं लाएँगे तुझ सा कहाँ से हम,

उठने को उठ तो आए तिरे आस्ताँ से हम।

5 - तिरे सिवा भी कहीं थी पनाह भूल गए,

निकल के हम तिरी महफ़िल से राह भूल गए। 


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