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ताजमहल को लेकर लंबे समय से चल रहे तेजो महालय विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

UP News : ताजमहल को लेकर लंबे समय से चल रहे तेजो महालय विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें आगरा की निचली अदालत द्वारा ताजमहल का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई है।
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याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान की ओर से उनके नेक्स्ट फ्रेंड अधिवक्ता हरि शंकर जैन और अन्य श्रद्धालुओं द्वारा दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर तेजो महालय है। याचिकाकतार्ओं ने अदालत से इसे हिंदू मंदिर घोषित करने और हिंदू श्रद्धालुओं को परिसर में दर्शन एवं पूजा की अनुमति देने की मांग की है।
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जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने याचिकाकतार्ओं की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है। अदालत ने इस चरण पर मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है, बल्कि संबंधित पक्षों का पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी किया है।
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आगरा की सिविल अदालत ने वर्ष 2019 में दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें ताजमहल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता आवश्यक राजस्व अभिलेख और संपत्ति संबंधी विवरण पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं कर सके। बाद में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
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याचिका में कहा गया है कि ताजमहल की वास्तुकला और कुछ संरचनात्मक विशेषताएं प्राचीन हिंदू मंदिर की ओर संकेत करती हैं। याचिकाकतार्ओं का कहना है कि इन दावों की पुष्टि के लिए न्यायालय की निगरानी में सर्वे, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आवश्यक है। हालांकि, ये सभी दावे याचिकाकतार्ओं के हैं और इन पर अभी अदालत की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
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अब केंद्र सरकार और एएसआई हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा जाए या सर्वे से संबंधित मांग पर आगे कोई निर्देश दिया जाए। फिलहाल हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी किया है, मामले के मूल दावों पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
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