उत्तर प्रदेश में बढ़ता ही जा रहा है UGC का विरोध

इस दौरान केन्द्र तथा उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर से भी UGC का तीखा विरोध बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के अनेक नेता यूजीसी (UGC) के विरोध में खड़े हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश में UGC के खिलाफ विरोध तेज
उत्तर प्रदेश में UGC के खिलाफ विरोध तेज
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 05:14 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में UGC का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। सवर्ण समाज से जुड़े हुए अनेक संगठन सडक़ से लेकर सोशल मीडिया तक UGC का तीखा विरोध कर रहे हैं। इस दौरान केन्द्र तथा उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अंदर से भी UGC का तीखा विरोध बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भाजपा के अनेक नेता यूजीसी (UGC) के विरोध में खड़े हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता भी उतरे UGC के विरोध में

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विशेष महत्व रखने वाले अनेक भाजपा नेता UGC के विरोध में सामने आए हैं। भाजपा  के बाहुबली नेता ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर UGC का विरोध किया है। प्रतीक भूषण उत्तर प्रदेश की गोंडा सदर सीट से भाजपा के विधायक हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतीक भूषण के परिवार का विशेष दखल रहता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा से विधायक प्रतीक भूषण का सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट तेजी के साथ वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता प्रतीक भूषण के पिता ब्रजभूषण शरण सिंह की कोई प्रतिक्रिया UGC के मुद्दे पर सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि प्रतीक भूषण ने अपने पिता की सहमति के बाद ही UGC का खुला विरोध किया है।

UGC के विरोध में क्या लिखा है प्रतीक भूषण ने?

उत्तर प्रदेश की गोंडा सदर विधानसभा सीट से विधायक प्रतीक भूषण ने फेसबुक पर एक ताजा पोस्ट लिखा है। उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक प्रतीक भूषण ने बिना किसी संगठन का नाम लिए फेसबुक पोस्ट में लिखा है... इतिहास के दोहरे मापदंडों पर गहन विवेचना होनी चाहिए, जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के अत्याचारों को भुला दिया जाता है, लेकिन भारतीय समाज के कुछ वर्गों को निरंतर ऐतिहासिक अपराधी के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है। वहीं पीलीभीत में बिलसंडा क्षेत्र के चपरौवा कुईया गाँव में भारतीय जनता पार्टी के बूथ अध्यक्ष ने कानून से असहमति जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। फिरोजाबाद में भाजपा महिला मोर्चा की जिला मंत्री शशि तोमर ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

उत्तर प्रदेश के छात्रों ने खून से लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर एक प्रसिद्ध शहर है। गोरखपुर शहर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कार्य क्षेत्र भी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में नए यूजीसी बिल के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र सुबह से ही विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले विश्वविद्यालय के द्वार पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने खून से लिखा हुआ एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम एडीएम सिटी व एसडीएम को सौंपा। इस बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय गेट के सामने मुख्य सडक़ पर जाम लगाने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री ने दे दी चुनौती

यूजीसी के नए नियम के विरोध में बीजेपी के पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ल ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं हुआ तो वह भाजपा से त्यागपत्र दे देंगे। भाजपा सरकार को विचार कर इस नियम को तत्काल वापस लेना चाहिए। पूर्व मंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यूजीसी के प्रावधानों का खुला विरोध करता हूं। UP News

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क्या है UGC का विवाद ? यहां समझें आसान भाषा में

उत्तर प्रदेश में वर्ष-2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस कारण उत्तर प्रदेश के तमाम राजनीतिक दल तथा अनेक सामाजिक संगठन UGC के मुद्दे को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं।

UGC नियमों पर उत्तर प्रदेश में टकराव
UGC नियमों पर उत्तर प्रदेश में टकराव
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 04:36 PM
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UP News : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर पूरे भारत में विवाद खड़ा हो गया है। UGC का यह विवाद भारत की सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित करने वाला साबित हो रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि UGC का यह विवाद वास्तव में है क्या? UGC के विवाद को यदि आपने अभी तक नहीं समझा है तो हम आसान भाषा में UGC का पूरा विवाद आपको यहां समझा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बवाल मचा है UGC को लेकर

UGC के ऊपर मचे हुए बवाल की जानकारी देने से पहले आपको बता दें कि UGC के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बवाल मचा हुआ है। वैसे तो UGC का मुद्दा पूरे भारत को प्रभावित कर रहा है किन्तु उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर बवाल का बड़ा कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति है। उत्तर प्रदेश में वर्ष-2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस कारण उत्तर प्रदेश के तमाम राजनीतिक दल तथा अनेक सामाजिक संगठन UGC के मुद्दे को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। ऊपर से उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्रिहोत्री ने UGC के मुद्दे पर सरकारी नौकरी से त्याग-पत्र देकर इस मुद्दे को बड़ी धार दे दी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में UGC का मुद्दा सर्वाधिक बड़ा मुद्दा बन गया है। अधिकतर राजनेता UGC के मुददे के द्वारा उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

वास्तव में क्या है UGC का विवाद?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है। इसी आयोग ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है। अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से SC तथा ST समुदाय तक सीमित मानी जाती थीं। नए रेगुलेशन के तहत OBC वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब OBC छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे। नए नियमों के अनुसार, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में अब एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना अनिवार्य होगा. यूनिवर्सिटी लेवल पर एक समानता समिति (Equality Committee) गठित की जाएगी। इस समिति में ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी होगी. समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार कर UGC को भेजेगी। UGC का कहना है कि इससे शिकायतों की निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।

UGC के नियमों का क्यों विरोध कर रहा है सवर्ण समाज?

रेगुलेशन लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला. विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4)’ बनाई है, ताकि इस नियम के खिलाफ संगठित आंदोलन किया जा सके।

उत्तर प्रदेश में हर तरफ हो रहा है UGC का विरोध

उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे ने खास तूल पकड़ लिया है। गाजियाबाद डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने खुले तौर पर UGC नियमों का विरोध शुरू कर दिया। वह जंतर-मंतर पर अनशन के लिए दिल्ली जा रहे थे, लेकिन गाजियाबाद में ही पुलिस ने उन्हें रोककर नजरबंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने योगी सरकार पर सवर्ण समाज की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जिससे मामला और गरमा गया। इस रेगुलेशन को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त बहस चल रही है। अगड़ी जातियों से जुड़े कई यूट्यूबर, इंफ्लुएंसर और एक्टिविस्ट इसे “सवर्ण विरोधी कानून” बता रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप के एक वीडियो में सवर्ण समाज से एकजुट होने की अपील के बाद बहस और तेज हो गई। वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय समर्थक इसे बराबरी और सम्मान की दिशा में जरूरी सुधार बता रहे हैं।

जातिगत भेदभाव बढ़ा है

UGC द्वारा संसद और सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118.4% की वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई। 704 विश्वविद्यालयों और 1553 कॉलेजों से कुल 1160 शिकायतें सामने आईं। इन आंकड़ों को UGC नए नियमों के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क के रूप में पेश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून सवर्ण समाज को निशाना बनाता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अब भी वंचित वर्गों की भागीदारी 15 प्रतिशत से कम है। SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम लागू हुए 36 साल बीत जाने के बावजूद उत्पीड़न की घटनाएं खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में UGC का यह कदम उन्हें जरूरी सुधार लगता है। UGC का नया रेगुलेशन सिर्फ एक शैक्षणिक सुधार नहीं, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक बहस बन चुका है। यूपी चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा और तेज हो सकता है। सवाल यही है कि क्या यह कानून वाकई समानता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा या फिर सामाजिक ध्रुवीकरण को और गहरा करेगा। आने वाले महीनों में इसका असर सिर्फ कैंपस तक नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति तक भी साफ दिख सकता है। UP News

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बड़ा सवाल : UGC विवाद में कितनी घिरी है सरकार ?

उत्तर प्रदेश में UGC विवाद को हवा देने का काम पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र ने किया है। UGC विवाद पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार पूरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है।

उत्तर प्रदेश बना UGC विवाद का सेंटर
उत्तर प्रदेश बना UGC विवाद का सेंटर
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 03:56 PM
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UP News : इन दिनों UGC के नए नियमों पर उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। UGC के मुद्दे पर मचे हुए बवाल का सर्वाधिक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में UGC विवाद को हवा देने का काम पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र ने किया है। UGC विवाद पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार पूरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है।

यूजीसी विवाद - सभी मोर्चों पर घिरती दिखाई दे रही है केंद्र सरकार, जनाक्रोश के सामने कितने टिकेंगे सरकारी दावे

UGC द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से पेश किया बिल अब जन आक्रोश का सबसे बड़ा मुददा बनता नजर आरहा है, जहां केंद्र इसे जातिय भेदभाव को समाप्त करने के लिए अच्छा कदम बता रहा है वही सर्वण समाज इसे अब अपने उपर गलत इरादों से थोपा हुआ बिल बता रहा है, यहां हम इस पूरे विवाद तथा UGC विवाद के पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास करते हैं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव (caste-based discrimination) को रोकने के लिए UGC Bill 2026 यानी Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है, यूजीसी के अनुसार यह नया नियम 2012 के पुराने इक्विटी नियमों की जगह लेगा जिसके बाद है, इसे 15 जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया, इस बिल को लागू करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों को अधिक समावेशी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना बताया जा रहा है, 

जातिय भेदभाव बनाम सर्वण समाज हित के बीच अटका यूजीसी बिल

यूजीसी बिल को लागू करते ही पूरे देश से इसके विरोध में प्रदर्शन आरम्भ हो गये, राजनेता, अधिकारियों एवं सामान्य जनमानस में इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है, इसी कड़ी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा त्यागपत्र देने से इस आंदोलन को जहां तेज धार मिलती दिखाई दे रही है वही कवि कुमार विश्वास द्वारा की गयी मार्मिक अपील भी लोगों को द्रवित करती दिखाई दे रही है, इसी कड़ी में पूर्व राज्य पाल कलराज मिश्र भी विरोध करते नजर आ रहे हैं, उनके द्वारा भी प्रेसवार्ता एवं अन्य माध्यमों से विरोध व्यक्त किया गया है, यूजीसी विवाद पर केंद्र सरकार अब अपने ही लोंगों द्वारा घिरती नजर आ रही है, विरोध का आलम यह है कि भाजपा समर्थकों को कुछ भी बोलते नही बन रहा है। कई लोगों द्वारा प्रधान मंत्री मोदी को रक्त से लिखे पत्र भी भेजे जाने की बात कही जा रही है, वहीं अनेक स्थानों पर बैनरों द्वारा भी लोग विरोध करते नजर आ रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है यूजीसी 2026

UGC के द्वारा 15 जनवरी को नयी गाइडलाइन जारी करते ही इसके विरोध में व्यापक स्तर पर विरोध देखा गया, सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा लिखे गये इसके विरोध में अनेक तरह के स्लोगन भी वॉयरल होते दिखाई दे रहे हैं, कई धर्मगुरुओं द्वारा भी इसका खुलेआम विरोध किया गया, ऐसे में सरकारी तंत्र की ओर से कोई भी ठोस कारण सामने नही रखने से विरोध को गति मिलती दिखाई दी। 

उत्तर प्रदेश में इस्तीफा बना बवाल

UGC के मुददे पर उत्तर प्रदेश में एक इस्तीफा बवाल बन गया। सोमवार को यूजीसी विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग पत्र ने सनसनी फैलादी, अलंकार अग्निहोत्री द्वारा सरकारी नीतियों, खासकर नए UGC नियमों से गहरे मतभेद का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। लगातार ब्राह्मण समाज का दमन किया जा रहा है, इसके चलते ही जेल में डिप्टी जेलर ने एक ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला, वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों को बुरी तरह पीटा गया।, उनके अनुसार दूसरा मुद्दा UGC 2026 का नया नियम को देखते हुए उन्होने त्यागपत्र दिया. आरोप ये भी है कि देर रात उन्हें डीएम आवास में बंधक बनाया गया।

सरकार की सफाई, नहीं होगा दुरुपयोग 

इस सारे विवाद और विरोध प्रदर्शन के मध्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा बयान जारी किया गया है, श्री प्रधान के अनुसार ये बिल केवल जातिय भेदभाव को खत्म करने के लिए लागू किया गया है. धर्मेंद्र प्रधान का यह आश्वासन तब आया जब देश में कई जगहों पर यूजीसी के नए नियमों का जबरदस्त विरोध हो रहा है, सोशल मीडिया पर यूजीसी का मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, इसके अलावा, हाल ही में जारी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखा गया है। UP News

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