उत्तर प्रदेश सरकार का कर्मचारियों के ई-आफिस सिस्टम का पालन न करने पर कड़ा फैसला
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार भी ई-आफिस सॉफ़्टवेयर में लॉग-इन नहीं किया। यह स्थिति उन विभागों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां कामकाजी दबाव और सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के ई-आॅफिस सिस्टम का पालन न करने पर कड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। प्रदेश के 44,694 अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे इस प्रणाली का नियमित रूप से उपयोग नहीं करते हैं, तो उनका वेतन अगले महीने रोका जा सकता है। सरकारी कार्यालयों में ई-आॅफिस प्रणाली को अनिवार्य किया गया था, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि कई अधिकारी और कर्मचारी इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं।
कई विभागों में सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार भी ई-आफिस सॉफ़्टवेयर में लॉग-इन नहीं किया। यह स्थिति उन विभागों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां कामकाजी दबाव और सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी। ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभागों में ई-आॅफिस का उपयोग बहुत कम पाया गया।
लापरवाही में जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे
विशेष रूप से ऊर्जा विभाग में जहां कुल 75 उपयोगकर्ता हैं, कोई भी एक महीने तक सिस्टम में लॉग-इन नहीं हुआ। इसी तरह लोक निर्माण विभाग में 10,895 उपयोगकतार्ओं में से सिर्फ 4,815 कर्मचारियों ने निर्धारित अवधि में लॉग-इन किया। सरकार का कहना है कि ई-आॅफिस के बिना फाइलों का निस्तारण और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से नहीं चल सकते, और अगर यह लापरवाही जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिनमें कर्मचारियों का वेतन रोकना भी शामिल हो सकता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी विभाग ई-आॅफिस प्रणाली का सही तरीके से पालन करें, ताकि कामकाजी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
क्या सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी
इस सख्त नीति के परिणामस्वरूप कई कर्मचारियों में असंतोष फैल सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि यदि इस पहलू में सुधार नहीं किया गया तो वेतन की रोकथाम जैसी कार्रवाई को बढ़ाया जा सकता है। अब यह देखना होगा कि क्या कर्मचारी इस चेतावनी के बाद अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हैं, या फिर सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। आप क्या सोचते हैं, क्या यह कदम पूरी तरह से सही है या कुछ लचीलापन दिखाना जरूरी था?
UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के ई-आॅफिस सिस्टम का पालन न करने पर कड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। प्रदेश के 44,694 अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे इस प्रणाली का नियमित रूप से उपयोग नहीं करते हैं, तो उनका वेतन अगले महीने रोका जा सकता है। सरकारी कार्यालयों में ई-आॅफिस प्रणाली को अनिवार्य किया गया था, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि कई अधिकारी और कर्मचारी इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं।
कई विभागों में सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार भी ई-आफिस सॉफ़्टवेयर में लॉग-इन नहीं किया। यह स्थिति उन विभागों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां कामकाजी दबाव और सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी। ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभागों में ई-आॅफिस का उपयोग बहुत कम पाया गया।
लापरवाही में जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे
विशेष रूप से ऊर्जा विभाग में जहां कुल 75 उपयोगकर्ता हैं, कोई भी एक महीने तक सिस्टम में लॉग-इन नहीं हुआ। इसी तरह लोक निर्माण विभाग में 10,895 उपयोगकतार्ओं में से सिर्फ 4,815 कर्मचारियों ने निर्धारित अवधि में लॉग-इन किया। सरकार का कहना है कि ई-आॅफिस के बिना फाइलों का निस्तारण और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से नहीं चल सकते, और अगर यह लापरवाही जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिनमें कर्मचारियों का वेतन रोकना भी शामिल हो सकता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी विभाग ई-आॅफिस प्रणाली का सही तरीके से पालन करें, ताकि कामकाजी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
क्या सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी
इस सख्त नीति के परिणामस्वरूप कई कर्मचारियों में असंतोष फैल सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि यदि इस पहलू में सुधार नहीं किया गया तो वेतन की रोकथाम जैसी कार्रवाई को बढ़ाया जा सकता है। अब यह देखना होगा कि क्या कर्मचारी इस चेतावनी के बाद अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हैं, या फिर सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। आप क्या सोचते हैं, क्या यह कदम पूरी तरह से सही है या कुछ लचीलापन दिखाना जरूरी था?












