अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच सीएम योगी का बड़ा बयान, किसे कहा कालनेमि
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए निजी संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है।

UP News : प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अहम बयान सामने आया है। हरियाणा के सोनीपत स्थित नागे बाबा मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उन्होंने धर्म और राष्ट्र को सर्वोच्च बताते हुए समाज को सतर्क रहने की अपील की।
धर्म की आड़ में साजिश रचने वालों पर हमला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए निजी संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ लोग धर्म का मुखौटा पहनकर सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं, ऐसे कालनेमियों से समाज को सावधान रहना होगा।
सनातन की मजबूती का प्रतीक बने तीर्थ स्थल
सीएम योगी ने कहा कि आज गुलामी की मानसिकता समाप्त हो चुकी है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और प्रयागराज में सामाजिक समरसता, संत समाज की शक्ति को दर्शाते हैं। यह परिवर्तन सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रमाण है।
प्रशासन और शंकराचार्य के बीच टकराव
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि पालकी से उतरने को लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच कहासुनी बढ़ी, जिसके बाद शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इससे नाराज होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।
नोटिस पर नोटिस, बढ़ता जा रहा टकराव
प्रशासन ने पहले नोटिस में शंकराचार्य पद को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे असंवैधानिक बताया। बाद में मेला क्षेत्र में एंट्री बैन और जमीन निरस्त करने का नोटिस भी भेजा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि पालकी परंपरा 2500 वर्ष पुरानी सनातन परंपरा है और इसका अपमान स्वीकार्य नहीं।
UP News : प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच जारी विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अहम बयान सामने आया है। हरियाणा के सोनीपत स्थित नागे बाबा मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उन्होंने धर्म और राष्ट्र को सर्वोच्च बताते हुए समाज को सतर्क रहने की अपील की।
धर्म की आड़ में साजिश रचने वालों पर हमला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि एक योगी, संत या सन्यासी के लिए निजी संपत्ति का कोई महत्व नहीं होता। धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ लोग धर्म का मुखौटा पहनकर सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं, ऐसे कालनेमियों से समाज को सावधान रहना होगा।
सनातन की मजबूती का प्रतीक बने तीर्थ स्थल
सीएम योगी ने कहा कि आज गुलामी की मानसिकता समाप्त हो चुकी है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और प्रयागराज में सामाजिक समरसता, संत समाज की शक्ति को दर्शाते हैं। यह परिवर्तन सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रमाण है।
प्रशासन और शंकराचार्य के बीच टकराव
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि पालकी से उतरने को लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच कहासुनी बढ़ी, जिसके बाद शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इससे नाराज होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।
नोटिस पर नोटिस, बढ़ता जा रहा टकराव
प्रशासन ने पहले नोटिस में शंकराचार्य पद को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे असंवैधानिक बताया। बाद में मेला क्षेत्र में एंट्री बैन और जमीन निरस्त करने का नोटिस भी भेजा गया। जवाब में उन्होंने कहा कि पालकी परंपरा 2500 वर्ष पुरानी सनातन परंपरा है और इसका अपमान स्वीकार्य नहीं।












