बरेली में बनेगा उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर, शहर को मिलेगी आधुनिक पहचान

बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।

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अत्याधुनिक मीडिया टावर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 07:11 PM
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UP News : बरेली शहर एक और बड़ी सौगात की ओर बढ़ रहा है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।

कोयंबटूर मॉडल पर होगा निर्माण

यह मीडिया टावर तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में बने आधुनिक मीडिया टावर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। लगभग 11 मीटर ऊंचे इस स्ट्रक्चर को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा। बीडीए अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि बरेली को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक और कदम आगे ले जाएगी।

2.5 करोड़ की लागत, हाईटेक एलईडी डिस्प्ले

करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस टावर में आठ मीटर का विशाल डिस्प्ले एरिया होगा। इसमें सिंगापुर के मशहूर गार्डन बाय द वे की तर्ज पर ढलान वाली एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। टावर में लगभग 5,000 मल्टी-कलर एलईडी लाइट्स होंगी, जो रात के समय झिलमिलाते हुए बेहद आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगी।

सूचना, विज्ञापन और योजनाओं का होगा प्रसारण

मीडिया टावर की स्क्रीन पर समाचार, सरकारी योजनाओं, जनहित संदेशों और व्यावसायिक विज्ञापनों का उच्च गुणवत्ता में प्रदर्शन किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आम जनता तक सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

इन्फोटेनमेंट हब के रूप में होगा विकसित

बीडीए इस मीडिया टावर को केवल डिस्प्ले यूनिट तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे इन्फोटेनमेंट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से कंटेंट, डिस्प्ले और मीडिया प्लेयर को नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही, विज्ञापनों के माध्यम से प्राधिकरण को राजस्व मिलने की भी संभावना है। बीडीए के मुख्य अभियंता एपीएन सिंह के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। निर्माण पूरा होने के बाद यह मीडिया टावर बरेली की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यही मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।

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उत्तर प्रदेश में पशुपालकों के लिए किफायती दवाइयों के केंद्र खोलने की योजना

हर जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड में पशुपालकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पशु औषधियां उपलब्ध कराने के लिए केंद्र खोले जाएंगे। यह पहल प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर की जा रही है।

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पशु औषधि केंद्र
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 04:33 PM
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UP News : अब उत्तर प्रदेश के हर जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड में पशुपालकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पशु औषधियां उपलब्ध कराने के लिए केंद्र खोले जाएंगे। यह पहल प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर की जा रही है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से पशुपालकों को अपने पशुओं के उपचार के लिए दवाइयां उचित मूल्य पर उपलब्ध होंगी, जिससे पशुधन स्वास्थ्य में सुधार होगा और पशुपालन अधिक लाभकारी बनेगा।

पशु औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन करते समय आवश्यक दस्तावेज

* फार्मासिस्ट का नाम और वैध पंजीकरण

* कम से कम 120 वर्ग फुट का दुकान स्थान प्रमाण पत्र

* ड्रग सेल लाइसेंस प्रमाण पत्र

आवेदन आनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से होगी

आवेदन आनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किए जाएंगे। इच्छुक व्यक्ति [http://pashuaushadhi.dahd.gov.in](http://pashuaushadhi.dahd.gov.in)  पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क 5000 है। डॉ. सुरेश कुमार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों से जुड़े योग्य आवेदकों को इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। यह पहल भारत सरकार के पशुधन स्वास्थ्य एवं बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित होगी।

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उत्तर प्रदेश में कारोबार को मिलेगी रफ्तार, जल्द लागू होगी नई व्यवस्था

प्रस्तावित व्यापार करने का अधिकार अधिनियम के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस पर है जहां हलफनामा और स्व-घोषणा के आधार पर पात्र इकाइयों को कुछ ही दिनों में वैध शुरुआती (प्रोविजनल) मंजूरी मिल सकेगी।

योगी सरकार का बड़ा कदम
योगी सरकार का बड़ा कदम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Feb 2026 03:14 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में उद्योग और व्यापार की राह अब पहले से कहीं ज्यादा सरल होने जा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें कारोबार शुरू करने के लिए दफ्तरों के चक्कर, लंबी फाइलें और महीनों की प्रतीक्षा धीरे-धीरे बीते कल की बात बन सकती है। प्रस्तावित व्यापार करने का अधिकार अधिनियम के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस ट्रस्ट-बेस्ड गवर्नेंस पर है जहां हलफनामा और स्व-घोषणा के आधार पर पात्र इकाइयों को कुछ ही दिनों में वैध शुरुआती (प्रोविजनल) मंजूरी मिल सकेगी।

फाइलों की दौड़ खत्म करने की तैयारी

अब तक नई इकाई खोलने या मौजूदा कारोबार का विस्तार करने के लिए फायर, प्रदूषण, श्रम, नगर निकाय समेत कई विभागों से अनुमति लेनी पड़ती थी। अलग-अलग स्तरों पर प्रक्रिया पूरी होते-होते महीनों निकल जाते थे। लेकिन नई व्यवस्था में पात्र कारोबारियों को नियमों के पालन का स्व-प्रमाण पत्र/हलफनामा देना होगा और इसी आधार पर शुरुआत की अनुमति मिल सकेगी। प्रस्तावित सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत रिस्क-बेस्ड और चयनित निरीक्षण है। यानी कारोबारी यह शपथ देगा कि वह सुरक्षा मानकों, पर्यावरण नियमों और श्रम कानूनों समेत सभी प्रावधानों का पालन करेगा। इसके बाद सरकार कारोबार शुरू होने में बाधा नहीं बनेगी। बाद में जोखिम के आधार पर निरीक्षण होगा। यदि किसी ने गलत जानकारी दी या नियमों का उल्लंघन किया, तो कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा। इससे ईमानदार उद्यमियों को राहत मिलेगी और नियम तोड़ने वालों पर नियंत्रण भी मजबूत होगा।

एमएसएमई और स्टार्टअप को सबसे बड़ा फायदा

उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन की बड़ी रीढ़ एमएसएमई सेक्टर है, लेकिन जटिल अनुमतियों का बोझ अक्सर इसी वर्ग पर सबसे ज्यादा पड़ता है। छोटे कारोबारी न तो महंगे कंसल्टेंट रख पाते हैं, न ही लंबे इंतजार का खर्च उठा पाते हैं। हलफनामे पर शुरुआती मंजूरी मिलने से दुकान, वर्कशॉप, यूनिट, सर्विस स्टार्टअप जैसी इकाइयां तेज़ी से शुरू हो सकेंगी। इससे पूंजी की बचत होगी और रोजगार जल्दी पैदा होने की संभावना बढ़ेगी। सरकार के स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि इस कदम से उत्तर प्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निवेश-छवि को सीधा लाभ मिलेगा। बाहरी निवेशकों को यह संदेश जाएगा कि राज्य प्रक्रियाओं को सरल बनाकर उद्योग के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। ऑनलाइन और समयबद्ध सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रक्रिया में अनावश्यक अटकाव घटेंगे। हलफनामे/स्व-घोषणा आधारित मंजूरी को भ्रष्टाचार कम करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। जब शुरुआती अनुमति में अफसर के हस्ताक्षर और विवेकाधीन देरी की भूमिका घटेगी, तो अवैध वसूली और “काम लटकाने” जैसी शिकायतें भी कम हो सकती हैं।

दो महीने में लागू करने का दावा

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधारों के चलते उत्तर प्रदेश को देश में शीर्ष रैंक मिलने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि अब दूसरे चरण के सुधारों के लिए प्रस्ताव तैयार है और इसे करीब दो महीने में लागू करने की तैयारी है। उनका कहना है कि आने वाले समय में प्रदेश में बिजनेस करना और इंडस्ट्री लगाना और अधिक आसान होगा। UP News

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