बरेली में बनेगा उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर, शहर को मिलेगी आधुनिक पहचान
बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।

UP News : बरेली शहर एक और बड़ी सौगात की ओर बढ़ रहा है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।
कोयंबटूर मॉडल पर होगा निर्माण
यह मीडिया टावर तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में बने आधुनिक मीडिया टावर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। लगभग 11 मीटर ऊंचे इस स्ट्रक्चर को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा। बीडीए अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि बरेली को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक और कदम आगे ले जाएगी।
2.5 करोड़ की लागत, हाईटेक एलईडी डिस्प्ले
करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस टावर में आठ मीटर का विशाल डिस्प्ले एरिया होगा। इसमें सिंगापुर के मशहूर गार्डन बाय द वे की तर्ज पर ढलान वाली एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। टावर में लगभग 5,000 मल्टी-कलर एलईडी लाइट्स होंगी, जो रात के समय झिलमिलाते हुए बेहद आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगी।
सूचना, विज्ञापन और योजनाओं का होगा प्रसारण
मीडिया टावर की स्क्रीन पर समाचार, सरकारी योजनाओं, जनहित संदेशों और व्यावसायिक विज्ञापनों का उच्च गुणवत्ता में प्रदर्शन किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आम जनता तक सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।
इन्फोटेनमेंट हब के रूप में होगा विकसित
बीडीए इस मीडिया टावर को केवल डिस्प्ले यूनिट तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे इन्फोटेनमेंट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से कंटेंट, डिस्प्ले और मीडिया प्लेयर को नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही, विज्ञापनों के माध्यम से प्राधिकरण को राजस्व मिलने की भी संभावना है। बीडीए के मुख्य अभियंता एपीएन सिंह के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। निर्माण पूरा होने के बाद यह मीडिया टावर बरेली की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यही मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।
UP News : बरेली शहर एक और बड़ी सौगात की ओर बढ़ रहा है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।
कोयंबटूर मॉडल पर होगा निर्माण
यह मीडिया टावर तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में बने आधुनिक मीडिया टावर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। लगभग 11 मीटर ऊंचे इस स्ट्रक्चर को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा। बीडीए अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि बरेली को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक और कदम आगे ले जाएगी।
2.5 करोड़ की लागत, हाईटेक एलईडी डिस्प्ले
करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस टावर में आठ मीटर का विशाल डिस्प्ले एरिया होगा। इसमें सिंगापुर के मशहूर गार्डन बाय द वे की तर्ज पर ढलान वाली एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। टावर में लगभग 5,000 मल्टी-कलर एलईडी लाइट्स होंगी, जो रात के समय झिलमिलाते हुए बेहद आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगी।
सूचना, विज्ञापन और योजनाओं का होगा प्रसारण
मीडिया टावर की स्क्रीन पर समाचार, सरकारी योजनाओं, जनहित संदेशों और व्यावसायिक विज्ञापनों का उच्च गुणवत्ता में प्रदर्शन किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आम जनता तक सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।
इन्फोटेनमेंट हब के रूप में होगा विकसित
बीडीए इस मीडिया टावर को केवल डिस्प्ले यूनिट तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे इन्फोटेनमेंट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से कंटेंट, डिस्प्ले और मीडिया प्लेयर को नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही, विज्ञापनों के माध्यम से प्राधिकरण को राजस्व मिलने की भी संभावना है। बीडीए के मुख्य अभियंता एपीएन सिंह के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। निर्माण पूरा होने के बाद यह मीडिया टावर बरेली की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यही मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।












