शामली से गोरखपुर तक बनेगा विकास का हाई-स्पीड कॉरिडोर, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया हुई तेज
परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होते ही शामली जिले के प्रस्तावित मार्ग पर स्थित जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

UP News : पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच वर्षों से प्रतीक्षित सीधा सड़क संपर्क अब हकीकत बनने की ओर है। शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होते ही शामली जिले के प्रस्तावित मार्ग पर स्थित जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
भूमि अधिग्रहण के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त
शामली जिला प्रशासन ने एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3-ए के तहत अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों की जमीनों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।
शामली के किन गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित मार्ग में शामिल प्रमुख गांव हैं गोगवान जलालपुर, भैंसानी इस्लामपुर। इन गांवों में सबसे पहले भूमि लेन-देन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन केंद्र सरकार के स्वामित्व में चली जाएगी।
50 से अधिक गांवों को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ
करीब 35,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे से पश्चिमी यूपी के 50 से ज्यादा गांव प्रभावित होंगे, जिनमें शामली, मुजफ्फरनगर (लगभग 35 गांव)सहारनपुर (9 गांव) शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जमीन के दाम, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
पूर्व से पश्चिम तक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से न सिर्फ यात्रा समय कम होगा, बल्कि औद्योगिक निवेश, ग्रामीण विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली, देहरादून और आसपास के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
UP News : पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच वर्षों से प्रतीक्षित सीधा सड़क संपर्क अब हकीकत बनने की ओर है। शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। लगभग 750 किलोमीटर लंबे इस आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होते ही शामली जिले के प्रस्तावित मार्ग पर स्थित जमीनों की रजिस्ट्री और लेन-देन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
भूमि अधिग्रहण के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त
शामली जिला प्रशासन ने एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3-ए के तहत अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों की जमीनों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।
शामली के किन गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित मार्ग में शामिल प्रमुख गांव हैं गोगवान जलालपुर, भैंसानी इस्लामपुर। इन गांवों में सबसे पहले भूमि लेन-देन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन केंद्र सरकार के स्वामित्व में चली जाएगी।
50 से अधिक गांवों को मिलेगा सीधा आर्थिक लाभ
करीब 35,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना का क्रियान्वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे से पश्चिमी यूपी के 50 से ज्यादा गांव प्रभावित होंगे, जिनमें शामली, मुजफ्फरनगर (लगभग 35 गांव)सहारनपुर (9 गांव) शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जमीन के दाम, व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
पूर्व से पश्चिम तक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से न सिर्फ यात्रा समय कम होगा, बल्कि औद्योगिक निवेश, ग्रामीण विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली, देहरादून और आसपास के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।












