मस्जिद परिसर के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ, विहार या अन्य पुरातात्विक संरचनाएं होने का दावा किया गया है। इस दावे के आधार पर मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक परीक्षण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराने की मांग उठाई गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के मेरठ में ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मस्जिद परिसर के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ, विहार या अन्य पुरातात्विक संरचनाएं होने का दावा किया गया है। इस दावे के आधार पर मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक परीक्षण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वे कराने की मांग उठाई गई है। यह मांग मेरठ जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता राम कुमार शर्मा की ओर से उठाई गई है। उन्होंने मेरठ मंडल के कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामले की जांच कराने की मांग की है। कमिश्नर ने ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए डीएम मेरठ को मामले की जांच और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। UP News
वरिष्ठ अधिवक्ता राम कुमार शर्मा ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद के नीचे प्राचीन बौद्ध मठ, विहार अथवा अन्य पुरातात्विक अवशेष मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने इस दावे की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। अधिवक्ता ने अपने दावे के समर्थन में कई ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने विवरणों का हवाला दिया है। हालांकि, अभी तक मस्जिद के नीचे किसी बौद्ध संरचना की मौजूदगी की कोई आधिकारिक पुरातात्विक पुष्टि नहीं हुई है। UP News
ज्ञापन में मेरठ जिला गजेटियर-1904 में दर्ज विवरणों का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही चीन के प्रसिद्ध यात्री ह्वेनसांग के भारत यात्रा संबंधी विवरणों में मिले ऐतिहासिक संकेतों को भी आधार बनाया गया है। दावा करने वाले पक्ष की ओर से मेरठ क्षेत्र में मौर्य और बौद्ध काल से जुड़े संभावित पुरातात्विक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की गई है। वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर केडी शर्मा द्वारा बताए गए कथित प्राचीन अलंकृत प्रस्तर स्तंभों और अन्य अवशेषों का भी उल्लेख किया गया है। UP News
मामले में मेरठ मंडल के कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी ने ज्ञापन का संज्ञान लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी मेरठ को पूरे मामले की जांच कराने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासन उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों, रिकॉर्ड और मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
राम कुमार शर्मा का कहना है कि उनकी मांग किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य केवल ऐतिहासिक दावों का वैज्ञानिक तरीके से सत्यापन कराना और यदि कोई पुरातात्विक धरोहर मौजूद हो तो उसका संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने जांच को संवैधानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने आ सके। UP News
मेरठ की शाही जामा मस्जिद के नीचे बौद्ध मठ या अन्य प्राचीन संरचना होने का दावा फिलहाल जांच का विषय है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी ASI की ओर से ऐसी किसी संरचना की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में इस मामले में अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। UP News
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