उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी में तैयार यह परिसर केवल स्मारक नहीं, बल्कि विचारों की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला केंद्र है जहां राष्ट्रनायकों के संघर्ष, योगदान और दर्शन को समेटता अत्याधुनिक संग्रहालय भी विकसित किया गया है, जिसका प्रधानमंत्री स्वयं निरीक्षण करेंगे।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज एक ऐसे ऐतिहासिक क्षण की दहलीज पर खड़ी है, जो विकास और विरासत दोनों का संदेश देता है। जिस जगह कभी दुर्गंध, गंदगी और कूड़े के ढेर के कारण लोग रास्ता बदल लेते थे, वही भूमि अब राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा का नया प्रतीक बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंचकर भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर भव्य ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर वे अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की कांस्य प्रतिमाओं का अनावरण भी करेंगे। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी में तैयार यह परिसर केवल स्मारक नहीं, बल्कि विचारों की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला केंद्र है जहां राष्ट्रनायकों के संघर्ष, योगदान और दर्शन को समेटता अत्याधुनिक संग्रहालय भी विकसित किया गया है, जिसका प्रधानमंत्री स्वयं निरीक्षण करेंगे।
करीब 65 एकड़ में फैला यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल लगभग 230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। स्थापत्य, संस्कृति और विचारधारा का यह संगम उत्तर प्रदेश को देश के वैचारिक मानचित्र पर एक नई पहचान देता है। यह स्थल केवल स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव की पाठशाला के रूप में विकसित किया गया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईआईएम रोड स्थित घैला क्षेत्र कभी शहर का सबसे बदनाम डंपिंग ग्राउंड माना जाता था। चारों तरफ कूड़े के पहाड़, तेज दुर्गंध और जहरीली मिट्टी इसका असर सिर्फ आसपास के मोहल्लों तक सीमित नहीं था। यह इलाका गोमती नदी के प्रदूषण का कारण बन रहा था और आसपास की उपजाऊ जमीन भी लगातार बर्बाद हो रही थी। मगर नगर निगम ने इस बदनुमा दाग को इतिहास बनाने का फैसला किया। साढ़े छह लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा हटाना आसान नहीं था—यह एक बड़ा ऑपरेशन था, जिसे करीब छह साल की सतत मेहनत और लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत के साथ अंजाम दिया गया। कचरे को मोहान रोड स्थित शिवरी में शिफ्ट करने के बाद लिगेसी वेस्ट को खत्म करने की प्रक्रिया चली, जिसमें करीब डेढ़ साल लगे। जमीन जब दोबारा “सांस लेने” लगी, तो उसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंप दिया गया और फिर अगले तीन वर्षों में वही बदनाम डंपिंग ग्राउंड बदलकर भव्य ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के रूप में सामने आ गया।
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास का पूरा इलाका अभेद सुरक्षा व्यवस्था में तब्दील कर दिया गया है। एसपीजी, खुफिया एजेंसियों और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी बीते कई दिनों से सुरक्षा इंतजामों की हर परत पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी का मजबूत घेरा तैयार किया गया है, ताकि किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश न रहे। प्रधानमंत्री विशेष सैन्य हेलीकॉप्टर से सीधे कार्यक्रम स्थल पर उतरेंगे। उनके मूवमेंट को देखते हुए सभी प्रमुख मार्गों को पूरी तरह बाधा-मुक्त किया गया है। सड़कों की मरम्मत, रोशनी, साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन पर खास ध्यान दिया गया है।
लोकार्पण समारोह को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तैयारियां चरम पर हैं। आयोजन स्थल पर करीब 1.25 लाख कुर्सियां लगाई गई हैं, ताकि भारी संख्या में लोग प्रधानमंत्री के संबोधन के साक्षी बन सकें। कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग 1 घंटा 55 मिनट तक परिसर में रहेंगे,लोकार्पण और प्रतिमाओं के अनावरण के बाद वे जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी भी कार्यक्रम को खास महत्व दे रही है। लखनऊ रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि देश की महान विभूतियों की विरासत का सम्मान और संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने इस पहल को राष्ट्रनिर्माण की दिशा में एक अहम कदम बताते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बताया। UP News