लखनऊ पहुंचे चर्चित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, आज से शुरू होगा बड़ा अभियान

लखनऊ पहुंचते ही शंकराचार्य ने हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया और इसके बाद वह कार्यक्रम से जुड़े आयोजन स्थल की ओर रवाना हो गए, जहां शीतला अष्टमी के अवसर पर इस बड़े अभियान का औपचारिक शंखनाद होना है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 10:16 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़ी यह बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के साथ साथ देशभर में अपने बयानों और अभियानों को लेकर चर्चा में रहने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मंगलवार को अचानक धार्मिक, सामाजिक और वैचारिक हलचल का केंद्र बन गई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद यहां पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही प्रदेश में गौ-सम्मान और गौ-संरक्षण को लेकर शुरू हो रहे तीन दिवसीय ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ ने जोर पकड़ लिया। राजधानी में इस अभियान को लेकर तैयारियां तेज रहीं। लखनऊ पहुंचते ही शंकराचार्य ने हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया और इसके बाद वह कार्यक्रम से जुड़े आयोजन स्थल की ओर रवाना हो गए, जहां शीतला अष्टमी के अवसर पर इस बड़े अभियान का औपचारिक शंखनाद होना है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी में धार्मिक-सामाजिक अभियान का आगाज

उत्तर प्रदेश में इस अभियान को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे गौ-सम्मान के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में पेश किया जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग उनके इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। इसके साथ ही देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बड़ी संख्या में इस आयोजन से जुड़ें और गौ-संरक्षण के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करें। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भी श्रद्धालु, संत और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

कांशीराम स्मृति उपवन में होगी मुख्य सभा

आयोजकों के मुताबिक 11 मार्च को लखनऊ के आशियाना क्षेत्र स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन, पासी किला चौराहा के निकट मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह सभा दोपहर 2:15 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। इसी मंच से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का औपचारिक शंखनाद करेंगे और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में संत समाज, गौसेवा से जुड़े संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रहेगी। उत्तर प्रदेश की राजधानी में हो रहा यह आयोजन राज्य की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट

लखनऊ में संभावित भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है। आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थानों की पुलिस को सतर्क मोड पर रखा गया है, जबकि कार्यक्रम स्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस का फोकस इस बात पर है कि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और यातायात व कानून-व्यवस्था पर कोई असर न पड़े। श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी अलग से योजना बनाई गई है।

26 शर्तों के साथ प्रशासन ने दी अनुमति

जिला प्रशासन ने इस आयोजन को अनुमति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ 26 शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार का भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक नारेबाजी या घातक वस्तुओं का उपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। इन शर्तों का उद्देश्य साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में होने वाला यह बड़ा आयोजन पूरी तरह नियंत्रित, अनुशासित और कानूनसम्मत तरीके से संपन्न हो। प्रशासन नहीं चाहता कि धार्मिक सभा के दौरान कोई ऐसी स्थिति बने, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हो। सूत्रों के अनुसार, तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए आयोजकों की ओर से स्मारक समिति में करीब 4.5 लाख रुपये शुल्क के तौर पर जमा कराए गए हैं। इससे साफ है कि कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर आयोजित करने की तैयारी की गई है। मंच व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन को लेकर भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। UP News

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गैस किल्लत का खौफ : सिलेंडरों से भरा ट्रक चोरी, हाईवे पर मिला खाली वाहन

झांसी से एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्रक में करीब 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लदे थे, जिनकी कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है।

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एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 06:42 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के झांसी से एलपीजी गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ट्रक में करीब 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लदे थे, जिनकी कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है। कुछ दिनों बाद यह ट्रक हाईवे किनारे खाली हालत में मिला, जबकि सभी सिलेंडर गायब थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

करारी प्लांट से लोड हुआ था सिलेंडरों से भरा ट्रक

जानकारी के मुताबिक यह ट्रक भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन के करारी स्थित प्लांट से जुड़ा था। 2 मार्च को ट्रक में 524 भरे हुए एलपीजी सिलेंडर लोड किए गए थे, जिन्हें कानपुर देहात के गजनेर इलाके में पहुंचाया जाना था। ट्रक चालक ने सिलेंडर लोड होने के बाद वाहन को प्लांट के बाहर खड़ा कर दिया और होली के त्योहार के कारण घर चला गया। इसी दौरान अज्ञात बदमाश ट्रक लेकर फरार हो गए। 

पारीछा के पास हाईवे किनारे मिला खाली ट्रक

कुछ दिनों बाद जीपीएस लोकेशन के आधार पर ट्रक की जानकारी मिली। जब ट्रक मालिक मौके पर पहुंचे तो पाया कि ट्रक परीछा थर्मल पावर प्लांट के पास हाईवे किनारे खड़ा था, लेकिन उसमें रखे सभी गैस सिलेंडर गायब थे। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने ट्रक में लगा डिवाइस भी तोड़ दिया, जिससे वाहन की लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया। 

पुलिस ने दर्ज किया चोरी का मामला

इस मामले में ट्रक मालिक की शिकायत पर सिपरी बाजार पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ चोरी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना का समय भी काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत जैसे देशों में भी गैस की उपलब्धता और कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे समय में इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों की चोरी ने स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।


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उत्तर प्रदेश में जामा मस्जिद के इमाम और उनके भाई पर 7 करोड़ का जुर्माना

सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जामा मस्जिद संभल के शाही इमाम मौलाना अफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन पर करीब सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन का आरोप है कि दोनों भाइयों ने ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण करा लिया था।

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ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Mar 2026 06:13 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जामा मस्जिद संभल के शाही इमाम मौलाना अफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन पर करीब सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन का आरोप है कि दोनों भाइयों ने ग्राम समाज की जमीन पर मस्जिद, दरगाह और मकान का निर्माण करा लिया था। तहसीलदार अदालत ने अब इस परिसर को खाली कराने का आदेश जारी किया है।

सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप

प्रशासन के अनुसार सैफखान सराय, संभल क्षेत्र में गाटा संख्या 452 की करीब दो बीघा जमीन ग्राम समाज की बताई गई है। आरोप है कि इस जमीन पर मस्जिद, दो मजारें और एक मकान बना लिया गया। फिलहाल इसी मकान में इमाम मौलाना आफताब हुसैन वारसी अपने परिवार के साथ रहते हैं। इसी परिसर में उनके पिता मौलाना खुर्शीद मियां की मजार भी बनी हुई है, जहां हर साल उर्स का आयोजन किया जाता है। प्रशासन का कहना है कि यह पूरा निर्माण ग्राम समाज की भूमि पर किया गया है, इसलिए इसे अवैध कब्जा माना गया है।

तहसीलदार न्यायालय का बेदखली आदेश

मामले की सुनवाई के बाद तहसीलदार अदालत ने संबंधित भूमि को कब्जामुक्त कराने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार इमाम और उनके भाई को 30 दिन के भीतर जमीन खाली करनी होगी। इसके साथ ही दोनों पर लगभग सात करोड़ रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के भीतर जमीन खाली नहीं करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया भी शामिल हो सकती है।

1972 में ही रद हो चुका था जमीन का पट्टा

राजस्व अभिलेखों के मुताबिक वर्ष 1972 में तत्कालीन तहसील प्रशासन ने इस जमीन के पट्टों को निरस्त कर इसे ग्राम समाज की संपत्ति घोषित कर दिया था। इसके बावजूद बाद के वर्षों में यहां निर्माण कर लिया गया। प्रशासन का कहना है कि जमीन के स्वामित्व को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई थीं। राजस्व विभाग की जांच में भी जमीन को सरकारी बताया गया है। बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की। इसके बाद राजस्व कानून की धारा 67 के तहत कब्जा हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सूत्रों के अनुसार 2016 और 2017 में भी इस जमीन को लेकर शिकायतें दर्ज हुई थीं। मामला बाद में अदालतों तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही।

इमाम पक्ष ने रखा अपना तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान इमाम पक्ष की ओर से कहा गया कि यह स्थान एक धार्मिक स्थल है और मस्जिद व मजार का निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था। उनका यह भी कहना है कि यह परिसर वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रम प्रशासन की जानकारी में आयोजित होते रहे हैं। हालांकि राजस्व विभाग का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर जमीन ग्राम समाज की है और उस पर किए गए निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता। प्रशासन के अनुसार आदेश के बाद संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में जमीन खाली नहीं की जाती है तो राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन कब्जा हटाने के लिए आगे की कार्रवाई करेगा। यह मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर प्रशासन की सख्ती भी चर्चा का विषय बन गई है। कई अन्य स्थानों पर भी राजस्व विभाग द्वारा जमीनों की जांच की जा रही है।