क्या श्रद्धा दुबे और शिवा शर्मा से जुड़े मामले में सामने आए कथित व्यवहार के पीछे सिर्फ यौन सनक थी या किसी दूसरे व्यक्ति को अपमानित करके उस पर नियंत्रण पाने की मानसिकता ? क्या ऐसे मामलों में मनोवैज्ञानिक पहलुओं की जांच भी जरूरी है ?

UP News : क़ातिल हसीना के नाम से फ़ेमस हो रही श्रद्धा दुबे के द्वारा अपने पार्टनर शिवा शर्मा को निर्वस्त्र करना, शरीर पर लिपस्टिक पोतना और नंगा करके नचाना। क्या यह सिर्फ अश्लीलता थी या किसी को अपमानित करके SEX का मजा लेने का गन्दा खेल था।कुछ भी हो समाज में श्रद्धा दुबे के कारनामों को खूब मजे ले लेकर पढ़ा और सुना जा रहा है ।
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श्रद्धा दुबे और शिवा शर्मा की कहानी में लिपस्टिक तो सुर्खियों में आ गई, लेकिन असली सवाल अब भी उसके पीछे छिपा है। आखिर किसी महिला को किसी पुरुष को निर्वस्त्र करके, उसके शरीर पर लिपस्टिक पोतकर और दूसरों के सामने नचाने में क्या आनंद मिल सकता है? यह कैसी सनक हो सकती है, जिसमें सामने वाले की शर्म, बेबसी और अपमान ही तमाशे का हिस्सा बन जाए? आजकल इस मामले को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल हैं। कोई इसे SEX से जोड़कर देख रहा है, कोई विकृत मानसिकता कह रहा है और कोई इसे किसी पर पूरी तरह हावी हो जाने की सनक मान रहा है। लेकिन एक सवाल सबसे ज्यादा चौंकाता है—क्या कुछ लोगों को SEX से ज्यादा मजा दूसरे इंसान को अपमानित करने में आता है?
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मनोविज्ञान में दूसरे की पीड़ा और अपमान से आनंद लेने की प्रवृत्ति को सैडिज्म कहा जाता है। जब इस आनंद मेंSEX की उत्तेजना या संतुष्टि भी शामिल हो, तो इसे SEX SADISMके संदर्भ में समझा जाता है। ऐसे व्यवहार में किसी को बेबस देखना, उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे कुछ करने पर मजबूर करना और उस पर अपना नियंत्रण महसूस करना उत्तेजना का कारण हो सकता है।अब जरा इस मामले में सामने आए आरोपों पर गौर कीजिए। प्रसिद्ध मॉडल श्रद्धा दुबे के द्वाराअपनी पार्टनर को निर्वस्त्र करना, उसके शरीर पर लिपस्टिक पोतना, उसे नचाना और निजी तस्वीरों या वीडियो के जरिए दबाव बनाना यह महज अश्लील हरकतों का मामला नहीं है ।इसके पीछे अपमान, नियंत्रण और संभावित SEX का गंदा आनंद बहुत ही घटिया संस्कारों वाली लड़की होने का प्रमाण है। आखिर लिपस्टिक लगाने में क्या रोमांच था? किसी को नचाने में कैसी खुशी थी ?
ज्यादातर समाजशास्त्रियों का मत है कि इस प्रकार की घटिया हरकत करके किसी भी व्यक्ति को उस व्यक्ति की खुद की नज़रों में गिरा देने की स्थिति में ले जा कर उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा सकता है। इस प्रकार की घटिया हरकत करने वाली लड़कियों के कारण बहुत से लोग आत्महत्या कर लेते हैं ।उत्तर प्रदेश ही नही पूरे देश में समाजशास्त्रियों की आम राय है कि इस प्रकार की संस्कार हीन तथा मानसिक रूप से बीमार लड़कियों को समाज से पूरी तरह बेदख़ल करके कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए ।उत्तर प्रदेश ही नहीं देश भर के समाज शास्त्री एक सुर में यह माँग कर रहे हैं कि श्रद्धा दुबे को शिवा शर्मा की हत्या के आरोप में सीधे सीधे दोषी मानते हुए फाँसी की सजा दी जानी चाहिए।
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