69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 2फरवरी से लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में पर्याप्त पहल नहीं कर रही, जिसके कारण मामला लटकता जा रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 2फरवरी से लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने जा रहे हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में पर्याप्त पहल नहीं कर रही, जिसके कारण मामला लटकता जा रहा है। आंदोलन के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश विधान सभा का घेराव करने की भी चेतावनी दी है।
आंदोलन के प्रमुख संगठकों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण प्रभावित समूहों के साथ अन्याय हुआ है और समस्या का समाधान नहीं निकला है, इसलिए इसे लेकर सरकार को एक ठोस कदम उठाना चाहिए। अभ्यर्थियों की मांग है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इस भर्ती मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी, जिसके बाद लगातार नई तारीख दी जा रही है। अगली सुनवाई 4 फरवरी को तय है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार समय पर कोर्ट में पोजीशन पेश नहीं कर रही, जिससे मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
आंदोलन के नेतृत्व में रहे अमरेन्द्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने कहा है कि सभी जिला और ब्लॉक स्तर के सहयोगियों से संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सूची तैयार की जा रही है। आंदोलन की शुरुआत में ही यह निर्णायक कदम उठाने की योजना बनाई गई है।
आंदोलन के एक हिस्से के तौर पर 31 जनवरी को विधानसभा घेराव का आह्वान किया गया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। अभ्यर्थी इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि वे मांगों के पूरा होने तक संघर्ष जारी रखेंगे। आंदोलन के दावों के मुताबिक, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, मुख्यमंत्री जांच समिति की रिपोर्ट और हाईकोर्ट डबल बेंच का निर्णय उनके पक्ष में है, लेकिन फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला। पिछले लगभग छह वर्षों से अभ्यर्थी इसी मुद्दे पर संघर्षरत हैं।