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उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव इसी साल 2026 के दिसंबर में हो जाएं। दोनों ही स्थिति में उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच में एक बड़ा मुकाबला जरूर होगा।

UP News : उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव वर्ष-2027 में होंगे। जनगणना के काम को देखते हुए यह भी संभावना है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव इसी साल 2026 के दिसंबर में हो जाएं। दोनों ही स्थिति में उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच में एक बड़ा मुकाबला जरूर होगा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा तथा सपा के बीच होने वाले इस बड़े मुकाबले को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो चुका है। UP News
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर नवंबर 2026 में वर्तमान सांसदों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इसका सीधा सा अर्थ है कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीट खाली हो जाएंगी। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की इन 10 सीटों पर विधानसभा के अगले चुनाव से पहले ही चुनाव कराए जाएंगे। राज्यसभा के इस चुनाव में सीधा मुकाबला भाजपा गठबंधन तथा सपा गठबंधन के बीच में होगा। भाजपा तथा सपा दोनों का यह प्रयास होगा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की अधिक से अधिक सीट जीत ली जाएं। नवंबर-2026 में उत्तर प्रदेश के जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें 8 सदस्य भाजपा के एक सदस्य सपा का तथा एक सदस्य बसपा का है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा की स्थिति नगण्य है। इस कारण राज्यसभा के चुनाव में भाजपा तथा बसपा का सीधा मुकाबला होगा। UP News
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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के कुल 20 सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो जाएगा। इनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरूण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा तथा दिनेश शर्मा के नाम शामिल हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तथा सपा मुखिया अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव का कार्यकाल भी नवंबर 2026 में पूरा हो जाएगा। बसपा के कोटे से राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल भी पूरा होगा। इस प्रकार उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर नवंबर-2026 में चुनाव होंगे। UP News
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव विधायकों की वोट से होता है। वर्तमान में विधायकों की संख्या के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोट चाहिए। भाजपा तथा सपा के विधायकों की संख्या की बात करें तो भाजपा के पास सहयोगी दलों के विधायकों को मिलाकर 294 वोट हैं। इन वोटों के दम पर भाजपा राज्यसभा की 7 सीट आसानी से जीत जाएगी। भाजपा का प्रयास यह होगा कि वह सपा में भीतरघात करके 8वीं सीट भी जीत जाए। वहीं सपा के पास सहयोगियों के साथ 105 सीट हैं। इन सीटों के बल पर वह राज्यसभा की दो सीट प्रथम वरीयता से तथा एक सीट द्वितीय वरीयता से जीत सकती है। सपा का पूरा फोकस हर हाल में तीन सीट जीतने पर होगा। वहीं भाजपा 8 या 9 सीट जीतने का प्रयास कर सकती है। इस टकराव में राज्यसभा के इस चुनाव में बहुत ही दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। UP News
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्यसभा के चुनाव में टिकट पाने की जोड़-तोड़ शुरू हो चुकी है। भाजपा के अंतरंग सूत्रों का दावा है कि पार्टी राजयसभा के टिकट उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर देगी। इस कारण भाजपा के अनेक युवा चेहरे राज्यसभा की टिकट पर दावेदारी जताने में जुट गए हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने कोर ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए किसी बड़े अति-पिछड़े या दलित चेहरे को उच्च सदन भेज सकते हैं। यह भी बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राज्यसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है। जो भी पार्टी उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होगी, वह राज्य में यह नैरेटिव बनाने में सफल रहेगी कि ‘हवा’ उसके पक्ष में बह रही है। बगावत या क्रॉस वोटिंग के जरिए यदि किसी दल ने दूसरे को पटखनी दी, तो विरोधी खेमे के कैडर का मनोबल टूट जाएगा। UP News
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