उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से जुड़ी तारीख, अधिकारियों के तबादलों संबंधी निर्देश और आगे की प्रक्रिया की जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें। जानिए अंतिम वोटर लिस्ट कब जारी होगी, चुनाव आयोग ने DM-SDM के तबादलों को लेकर क्या निर्देश दिए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग की अनुमति के बिना मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन के काम से जुड़े अधिकारियों का तबादला नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी, DM-SDM सहित निर्वाचन कार्य से जुड़े अन्य अधिकारी भी आएंगे। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और निर्बाध बनाए रखना है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार का सामान्य प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों से जुड़ा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 21 अक्टूबर को इस संबंध में जानकारी दी। आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूची के प्रारूप के प्रकाशन से लेकर अंतिम सूची जारी होने तक संबंधित अधिकारियों को बिना पूर्व अनुमति स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा। UP News
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा किया जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने अलग-अलग चरणों की समयसीमा तय की है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण का पूरा कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाएगा, ताकि पात्र नागरिकों के नाम शामिल किए जा सकें और मौजूदा प्रविष्टियों में आवश्यक सुधार हो सकें। UP News
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निर्वाचन आयोग का मानना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान अधिकारियों की निरंतरता जरूरी है। यदि इस प्रक्रिया के बीच जिम्मेदार अधिकारियों को बदल दिया जाता है, तो कामकाज प्रभावित होने और निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई आने की आशंका रहती है। इसी वजह से आयोग ने निर्देश दिया है कि पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारियों के पद खाली नहीं रखे जाएंगे और उन्हें स्थानांतरित करने से पहले आयोग की अनुमति लेनी होगी। इस व्यवस्था में जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) तथा पुनरीक्षण कार्य में लगे अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं। UP News
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने और पुनरीक्षण से संबंधित कार्यों में लगाए गए अधिकारी निर्धारित अवधि में निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन कार्य करते हैं। इसी कानूनी व्यवस्था के आधार पर पुनरीक्षण की अवधि में संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए आयोग की पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है। UP News
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का पुनरीक्षण आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान पात्र नागरिक अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिन मतदाताओं के नाम, पते या अन्य विवरणों में त्रुटियां हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक जनवरी 2027 को पात्रता तिथि मानकर होने वाले इस पुनरीक्षण में नए पात्र मतदाताओं को भी सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसलिए मतदाताओं को प्रारूप सूची जारी होने के बाद अपने विवरण की जांच करनी चाहिए और किसी भी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा या आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। UP News
निर्वाचन आयोग का यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया की अहमियत को दर्शाता है। आयोग चाहता है कि पुनरीक्षण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की उपलब्धता बनी रहे और दावे-आपत्तियों के निस्तारण से लेकर अंतिम सूची के प्रकाशन तक काम तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा हो। अब उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची जारी होना इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। UP News
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