UP News : उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर आ रही है। खबर यह है कि उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक ठग ने ठगी करने की सारी हदें पार कर डाली हैं। उद्योगपति के वेश में सक्रिय ठग ने उत्तर प्रदेश की सरकार तक को ठग लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार को ठगने वाला शातिर ठग दुनिया के चर्चित ठग नटवरलाल से भी बड़ा ठग साबित हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार तथा सैकड़ों निवेशकों को ठग कर विदेश भागने का प्रयास कर रहे नटवरलाल से भी बड़े ठग को उत्तर प्रदेश पुलिस की FIR के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार तथा निवेशकों से ठगी करने वाले शातिर ठग को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया है। शातिर ठग ने फर्जी कंपनी के दम पर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 13500 करोड रुपए का MOU किया था।
उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 13500 करोड़ का करार कर लिया था शातिर ठग ने
आपको बता दें कि, सोमवार को ED की टीम ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक ठग को पकड़ा है। यह ठग कोई साधारण ठग नहीं है। इस ठग ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी ठग लिया है। यह ठगी इतने शातिर अंदाज में की गई कि उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े से बड़े अधिकारी भी गच्चा खा गए। दरअसल ठग ने उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश नीति का फायदा उठाकर फर्जी कंपनी के दम पर 13 हजार 500 करोड़ के करार (MOU) कर डाले। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ किए गए MOU के दम पर ठग ने बाजार में सक्रिय निवेशकों से 3 हजार 558 करोड़ रुपये एकत्र कर लिये। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ MOU के दम पर ठगे गए सारे पैसे ठग ने विदेशों में भेज दिए। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ठगी करने के बाद यह ठग विदेश भाग रहा था। विदेश भागते समय ED की टीम ने उसे इंदिरा गांधी इंटनेशनल एयरपोर्ट से गिफ्तार कर लिया।
उत्तर प्रदेश सरकार से MOU करने वाली कंपनी निकली फर्जी
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश नीति के तहत व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लिमिटेड ने सरकार के साथ MOU किए थे। अब पता चला है कि वह कंपनी पूरी तरह फर्जी थी। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 750 डाटा सेंटर बनाने का जिम्मा लेने के लिए आगे आई कंपनी व्यूनाउ मार्केटिंग सर्विसेज लि. और व्यूनाउ इंफ्राटेक फर्जी निकली। कंपनी के प्रबंध निदेशक सुखविंदर सिंह खरोर ने फर्जीवाड़ा कर अफसरों की आंखों में धूल झोंक 13,500 करोड़ रुपये का एमओयू करा लिया। एमओयू की आड़ में मास्टरमाइंड 7 निवेशकों से 3,558 करोड़ रुपये बटोरकर विदेश भागने की फिराक में था। इससे पहले ईडी ने उसे पत्नी सहित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया। निवेश के मामले में भी सरकार ने गलतियां रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की है। उच्चस्तर से वैश्विक निवेशक सम्मेलन में निवेश का समझौता करने वाली कंपनियों का इतिहास जांचने के निर्देश हैं। परीक्षण में संदिग्ध मिलने पर कंपनियों के एमओयू को रोकने या रद्द करने के भी निर्देश हैं। लेकिन, डाटा सेंटर के एमओयू में अधिकारी गच्चा खा गए। उन्होंने कंपनी की कुंडली नहीं खंगाली। 20 नवंबर, 2022 को तत्कालीन मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र की मौजूदगी में व्यूनाउ के एमडी और मास्टरमाइंड सुखविंदर ने एमओयू किया। 13,500 करोड़ के एमओयू के तहत व्यूनाउ इंफोटेक को सभी जनपदों में डाटा सेंटर स्थापित करना था। मिश्र ने कहा था, एमओयू के बाद प्रदेश में एज सेंटर का दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क बनेगा। इन्हीं की मदद से भविष्य में 5जी नेटवर्क, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डाटा टेक्नोलाजी के उपयोग की तैयारी थी।
शातिर अंदाज में ठगा ढ़ेर सारे निवेशकों को
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार के साथ किए एमओयू को सुखविंदर ने जमकर भुनाया। निवेशकों को फर्जी सेल एंड लीज-बैक मॉडल के जरिए फंसाया गया। डाटा सेंटर की स्टोरेज क्षमता को छोटे-छोटे हिस्सों में लीज पर देने का ऑफर दिया। दांव काम आ गया और बाजार से हजारों करोड़ रुपये निवेश आ गया। सुखविंदर ने उस रकम से डाटा सेंटर में लगाने के बजाय विदेशों में भेजा। प्रवर्तन निदेशालय ने नोएडा पुलिस की एफआईआर के बाद जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि सुखविंदर ने क्लाउड पार्टिकल तकनीक के नाम पर निवेशकों से भारी रकम जुटाई। फिर निवेशकों को गुमराह करने के लिए कागजों में बढ़ा-चढ़ा कर कंपनी की फर्जी सूचनाएं दीं और 3,558 करोड़ रुपये की रकम निवेशकों से ऐंठ ली।
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