Saturday, 15 June 2024

उत्तर प्रदेश में फैल रहा है खतरनाक रोग एचआईवी एड्स, बजी चिंता वाली घंटी

UP News : भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश से चिंता बढ़ाने वाली खबर आ रही है। खबर यह…

उत्तर प्रदेश में फैल रहा है खतरनाक रोग एचआईवी एड्स, बजी चिंता वाली घंटी

UP News : भारत के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश से चिंता बढ़ाने वाली खबर आ रही है। खबर यह है कि उत्तर प्रदेश में दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली बीमारी एचआईवी एडस तेजी से फैल रही है। उत्तर प्रदेश में एचआईवी के मामले लगातार बढऩे से पूरे सरकारी सिस्टम के बीच खतरे की घंटी बज गई है। आशंका जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में तेजी से फैल रही एचआईवी की बीमारी विकरात रूप धारण ना कर ले।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक चिंता

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के पश्चिमी उत्तर प्रदेश वाले भाग में मौजूद मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, हापुड़ तथा मथुरा जिलों से एचआईवी रोगियों की संख्या बढऩे की खबरें आती रही हैं। अबकी बार खबर उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग से आ रही है। उत्तर प्रदेश के इस पूर्ण भाग को पूर्वांचल भी कहा जाता है। खबर है कि पूर्वांचल के तीन मंडलों में 27 हजार से भी अधिक एचआईवी एडस के मरीज पाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में एचआईवी एडस के मामले सामने आने से उत्तर प्रदेश सरकार के साथ ही साथ पूरे पूर्वांचल में खतरे की घंटी बज रही है। सरकारी अधिकारी बहाना बना रहे हैं कि एचआईवी का संक्रमण टैटू गुदवाने के कारण बढ़ रहा है।

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क्या है ताजा मामला ?

सोमवार को एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र में पूर्वांचल में एचआईवी फैलने की रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, मिर्जापुर और वाराणसी मंडल के दस जिलों में 26,890 एचआईवी संक्रमित हैं। इनमें 50 फीसदी की उम्र 20 से 45 वर्ष के बीच है। 40 लोग ऐसे मिले हैं, जो टैटू बनवाने के बाद संक्रमित हो गए।

डॉक्टरों के मुताबिक, टैटू बनाने वाले गलत सुई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिस सुई से टैटू बनता है, उसके प्रति सुई की कीमत 1200 रुपये होती है। इसके बावजूद चौक-चौराहों पर 200 रुपये में टैटू बना दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा। एक सुई का बार-बार इस्तेमाल भी संक्रमण की बड़ी वजह है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग हर जिले के सरकारी अस्पतालों में एआरटी सेंटर का संचालन करता है। यहां एचआईवी संक्रमितों का पंजीकरण होता है, फिर जरूरी जांच और इलाज की व्यवस्था की जाती है। दस जिले के एआरटी सेंटर की पड़ताल से पता चला कि संक्रमितों की संख्या बढ़ी है।

इस रिपोर्ट को पढऩे से यह तो साफ जाहिर हो रहा है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी तेजी के साथ एचआईवी फैल रहा है। साथ ही यह भी जाहिर हो रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के कर्ताधर्ता एचआईवी बीमारी फैलने का ठीकरा टैटू बनाने वालों पर फोडक़र इस मामले की गंभीरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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क्या होता है एचआईवी ?

अब आपको एचआईवी के विषय में भी बता देते हैं। दरअसल एचआईवी का मतलब है ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (Human Immunodeficiency Virus)। यह वायरस एड्स (AIDS) का कारण बनता है। मानव शरीर कि रक्षा प्रणाली को प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम कहा जाता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली कई वायरस और बैक्टीरिया से मानव शरीर को लड़ने कि क्षमता प्रदान करती है। HIV इसी प्रतिरक्षा प्रणाली कि कोशिकाओं पर हामला कर इसे कमजोर करता है। यह कोशिकाएं एक प्रकार कि श्वेत रक्त कोशिकाएं होती है जिन्हे सी डी 4 (CD4) सेल्स भी कहा जाता है। अगर वायरस को नियंत्रित करने के लिए दवा का उपयोग न किया गया तो , HIV के जीवाणु CD4 कोशिकाओं पर कब्ज़ा कर उन्हें लाखो वायरस कि प्रतियां बनाने वाली फैक्ट्री में रूपांतरित कर देते है। इस प्रक्रिया में CD4 कोशिकाएं नष्ट हो जाती है जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है। अंततः यह एड्स का रूप ले लेती है।

एचआईवी के कई अलग अलग प्रकार है। इन्हे दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

एचआईवी-1: यह प्रकार दुनिया भर में पाया जाता है और सबसे आम है।

एचआईवी-2: ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाया जाता है।

एच आय वी से प्रभावित किसी भी व्यक्ति के शरीर में एक समय पर एच आय वी के कई अलग प्रकार मौजूद हो सकते हैं।

एड्स क्या होता है?

एड्स (AIDS) का मतलब अक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired Immunodeficiency Syndrome) है। यह एचआईवी संक्रमण कि सबसे अंत में होनी वाली अवस्था है। एचआईवी , प्रतिरक्षा प्रणाली में काम आने वाली CD4 कोशिकाओं पर हामला कर , शरीर को एड्स कि स्थिति तक पहुंचा देता है। जब शरीर बहुत सी CD4 कोशिकाएं खो देता है तब कई गंभीर एवं घातक संक्रमणों का शिकार हो जाता है। इनको अवसरवादी संक्रमण ( opportunistic infections ) कहते हैं। जब किसी कि मृत्यु एड्स से होती है तब अक्सर मृत्यु का कारन अवसरवादी संक्रमण और HIV के दीर्घकालिक प्रभाव ही होते है। एड्स शरीर कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को दर्शाता है जो अब अवसरवादी संक्रमण को रोक नहीं सकती। एचआईवी के केवल शरीर में प्रवेश से आपको एड्स नहीं हो जाता। आप एचआईवी के साथ (HIV+ होना ) बिना किसी लक्षण के , या केवल थोड़े बहुत लक्षणों के साथ कई सालों तक जीवन यापन कर सकते है। एचआईवी के साथ जीने वाले लोग अगर परामर्श के अनुरूप दवाएं ले तो उन्हें एड्स होने कि सम्भावना बहुत कम होती है। किन्तु बिना इलाज के एचआईवी अंततः CD4 कोशिकाओं कि संख्या इतनी कम कर देता है कि प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमज़ोर हो जाती है। इन लोगो को अवसरवादी संक्रमण होने की गहरी संभावना होती है। UP News

एचआईवी के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध होने से पहले ही एड्स की परिभाषा स्थापित की गई थी। उस समय यह परिभाषा यह संकेत देती थी की वह एड्स ग्रसित व्यक्ति बीमारी या मृत्यु की उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल है। उन देशों में जहा एचआईवी उपचार आसानी से उपलब्ध है, एड्स अब इतना प्रासंगिक नहीं रहा। एचआईवी के प्रभावी उपचार के उपलब्ध होने पर , लोग कम CD4 संख्या होते हुए भी स्वस्थ रह सकते हैं । वर्षों पूर्व अगर किसी व्यक्ति को एड्स होने की पुष्टि हुई थी, तब से उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य स्तर तक वापस आ सकती है। ऐसा होने पर वे एड्स ग्रसित कहे जा सकते है किन्तु उनकी CD4 संख्या सामान्य हो सकती है।

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कैसे पता करें एचआईवी का ?

अधिकांश लोग यह नहीं बता सकते हैं कि वे एचआईवी के संपर्क में आ चुके हैं या उससे प्रभावित हो चुके हैं। एचआईवी के प्रारंभिक सूक्ष्म लक्षण , एचआईवी संपर्क में आने के दो से चार सप्ताह के भीतर दिखाई दे सकते हैं। यह लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

  • बुखार
  • ग्रंथियों में सूजन
  • गले में खराश
  • रात में अधिक पसीना आना
  • मांसपेशी में दर्द
  • सिर दर्द
  • अत्यधिक थकान
  • चकत्ते

कुछ लोग इन लक्षणों पर ध्यान नहीं देते क्योंकि ये दिखने में साधारण लगते हैं, या उन्हें लगता है कि उन्हें सर्दी या फ्लू है। इन “फ़्लू-जैसे” लक्षणों के गायब होने के बाद भी, एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति किसी भी लक्षण के बिना वर्षों तक जी सकता हैं। यदि आप एचआईवी से प्रभावित हैं तो इसे जानने का एक मात्र तरीका एचआईवी जाँच करवाना ही है। UP News

यदि आपको एचआईवी के कुछ शुरुआती या थोड़े लक्षण दिखाई पड़ते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप एचआईवी एंटीजन (न केवल एचआईवी एंटीबॉडी) की जाँच कराएं। एचआईवी एंटीजन यह एचआईवी वायरस, या संक्रमित कणों के अंश होते हैं। यदि एचआईवी एंटीजन आपके रक्त में है, तो ऐसी जाँचें उपलब्ध हैं जो आपके वायरस के संपर्क में आने से दो सप्ताह बाद ही एचआईवी संक्रमण की पहचान कर सकते हैं।

शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, एचआईवी को चिह्नित कर उनका विनाश करने के लिए एंटीबॉडीज नमक प्रोटीन बनाता है । यह एंटीबॉडीज बनाने में शरीर को एक से तीन महीने या कभी-कभी छह महीने तक का समय लगता है। एचआईवी से प्रभावित होने और एंटीबॉडी के उत्पादन के बीच के तीन से छह महीने की अवधि को “विंडो अवधि” कहा जाता है। इसलिए, एंटीबॉडी का पता लगाने वाली जाँच, एचआईवी के संपर्क में आने के एक से तीन महीने बाद ही विश्वसनीय होती हैं। UP News

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